Nepal Plane Crash: पिछले दिनों नेपाल (Nepal) के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट क्रैश होने से बड़ा हादसा हो गया. अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गई थी. प्लेन में सवार एक बच्चे सहित 18 लोगों की मौत हो गई और पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसे में सिर्फ एक ही शख्स (पायलट) की जान बची.
सौर्या एयरलाइंस का बॉम्बार्डियर सीआरजे-200 विमान, जिसमें एयरलाइन के दो चालक दल के सदस्य और तकनीकी कर्मचारी सहित 19 लोग सवार थे. विमान रेगुलर मेंटेनेंस सर्विस के लिए पोखरा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जा रहा था और हादसे का शिकार हो गया.
'उड़ान भरने के कुछ देर बाद...'
नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, "रनवे 02 से उड़ान भरने के कुछ ही वक्त बाद विमान दाईं ओर मुड़ गया और रनवे के पूर्वी हिस्से में दुर्घटनाग्रस्त हो गया." इसमें कहा गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन फौरन शुरू कर दिया गया और आग पर काबू पा लिया गया.
बयान में कहा गया कि घायल (कैप्टन मनीष रत्न शाक्य) को बचा लिया गया और हॉस्पिटल ले जाया गया और हादसे में 18 लोग मारे गए. मृतकों की पहचान को-पायलट एस कटुवाल, सौर्या एयरलाइंस के कर्मचारी और एक यमनी नागरिक (आरेफ रेडा) के रूप में हुई है.
हादसे में जान गंवाने वालों में एयरलाइन के टेक्निशियन मनु राज शर्मा, उनकी पत्नी प्रिजा खातीवाड़ा और उनका चार साल का बेटा आदि राज शर्मा शामिल हैं. प्रिजा (Priza), ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्रालय में सहायक कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करती थीं.
एयरलाइन के द्वारा जारी किए गए स्टेटमेंट में कहा गया कि प्रिजा और उनका बेटा शुरुआत में कंपनी के कर्मचारी के रूप में पहचाने गए थे लेकिन बाद में यह खुलासा हुआ कि वो पैसेंजर के रूप में सवार थे.
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हादसे में सिर्फ एक जिंदा
एजेंसी के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में से 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोगों ने हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिट भेज दिया गया. हादसे में सिर्फ पायलट कैप्टन शाक्य (37) की ही जान बची. मौजूदा वक्त में काठमांडू माडल हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है.
काठमांडू मेडिकल हॉस्पिटल (KMC) के अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना में लगी चोटों के कारण कैप्टन शाक्य की हालत गंभीर बनी हुई है. केएमसी अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन शाक्य की आंख और रीढ़ की हड्डी की सर्जरी हो रही है और उन्हें न्यूरो-इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराया गया है.
PM और गृह मंत्री ने किया साइट का दौरा
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृह मंत्री रमेश लेख ने हादसे की साइट का दौरा किया. उन्होंने हादसे की जानकारी ली और जरूरी निर्देश दिए.
ओली ने कहा कि वह विमान दुर्घटना में हुई दुखद मौतों से बहुत दुखी हैं और नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अधिकारियों से विमान हादसे के पीछ की वजहों के बारे में जानकारी लेने के लिए घटनास्थल पर हैं. उन्होंने सभी से दुख की इस घड़ी में धैर्य रखने की गुजारिश की है.
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'गलत दिशा में मुड़ गया था प्लेन...'
त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चीफ जगन्नाथ निरौला के मुताबिक, काठमांडू से पोखरा जा रहा प्लेन गलत दिशा में मुड़ गया था. BBC न्यूज नेपाली के मुताबिक, निरौला ने कहा कि जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, वह बायीं ओर मुड़ने के बजाय दायीं ओर मुड़ गया.
हालांकि, अभी तक हादसे के पीछे का वास्तविक कारण नहीं पता चल सका है. उड़ान भरने के एक मिनट के अंदर ही प्लेन हादसे का शिकार हो गया.
जांच के लिए बनी कमेटी
सिंहदरबार में आयोजित कैबिनेट की मीटिंग में हादसे की जांच के लिए नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के पूर्व महानिदेशक रतीश चंद्र लाल सुमन के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी बनाने का फैसला लिया गया. कमेटी में नेपाल एयरलाइंस के कैप्टन दीपू ज्वारचन, श्री एयरलाइंस के इंजीनियर संजय अधिकारी, पुलचौक इंजीनियरिंग कैंपस के सहायक प्रोफेसर सुदीप भट्टाराई और संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तकनीकी अधिकारी मुकेश डांगोल शामिल हैं. कमेटी को रिपोर्ट पेश करने के लिए 45 दिन का वक्त दिया गया है.
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एयरपोर्ट के अधिकारियों ने बताया कि हादसे के बाद काठमांडू एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए सर्विसेज रोक दी गई थीं, लेकिन बाद में उन्हें फिर से चालू कर दिया गया.
1955 से अब तक हवाई हादसों में सैकड़ों मरे
हाल के वर्षों में नेपाल की एयर सेफ्टी के खराब रिकॉर्ड के लिए आलोचना की गई है, लेकिन इसके कारणों में आंशिक रूप से अचानक मौसम में बदलाव और आंशिक रूप से मानवीय भूल के अलावा दुर्गम चट्टानी इलाकों में हवाई पट्टियों का होना भी शामिल है. नेपाल के नागरिक उड्डयन निकाय के मुताबिक, अगस्त 1955 में पहला हादसा दर्ज होने के बाद से देश के अंदर हवाई दुर्घटनाओं में 914 लोग मारे गए हैं.