मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने रविवार को दो आरोपियों को मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया. EOW ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक और मुख्य लेखाकार के रूप में काम करने वाले हितेश मेहता और घोटाले के कथित लाभार्थी धर्मेश पोन को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों को 21 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है.
शिकायत के अनुसार, मेहता ने 2019 से बैंक की प्रभादेवी और गोरेगांव शाखाओं से लगभग 122 करोड़ रुपये नकद निकाल लिए थे. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मुंबई स्थित बैंक पर कथित अनियमितताओं के कारण छह महीने का लेनदेन प्रतिबंध लागू किया है. पुलिस के अनुसार, मेहता ने अपराध स्वीकार किया और बताया कि वे बैंक की तिजोरियों से कैश निकाल रहे थे.
122 करोड़ रुपये के गायब होने का मामला
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि धर्मेश पोन ने 122 करोड़ रुपये में से 70 करोड़ रुपये हासिल किए. मई से दिसंबर 2024 के बीच मेहता से पोन को 1.75 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. जनवरी 2025 में भी 50 लाख रुपये की राशि मेहता ने पोन को दी. पुलिस ने आगे की जांच के लिए दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत मांगी थी.
1988 से बैंक में काम कर रहे थे आरोपी मेहता
मेहता 1988 से बैंक में काम कर रहे थे और गोरेगांव और प्रभादेवी शाखाओं को संभालते थे. पुलिस जांच कर रही है कि मेहता फंड निकालने में कैसे सफल हुए और किसने उनकी मदद की. दोनों आरोपियों को 21 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है. उन्नाथन अरुणाचलम उर्फ अरुण भाई मामले में फरार चल रहे हैं.
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हितेश मेहता के वकील जयेश पारकर ने कहा, “अदालत ने सवाल उठाया है कि जब यह कथित अपराध हो रहा था, तब ऑडिटर क्या कर रहे थे. चूंकि दोनों आरोपी अब पुलिस हिरासत में हैं, इसलिए हम पुलिस जांच का इंतजार करेंगे.”