राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आईएसआईएस केरल मॉड्यूल केस मामले में सोमवार को श्रीनगर और कश्मीर में कई जगहों पर छापेमारी की. इससे पहले एनआईए ने 2021 में टेलीग्राम, हूप और इंस्टाग्राम जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आईएसआईएस प्रोपगैंडा चला रहे मामले की जांच शुरू की थी.
उस समय एनआईए की जांच में सामने आया था कि मोहम्मद अमीन उर्फ अबू याहया और उसके सहयोगी आतंकवादी गतिविधियों के लिए इन मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे. इन सोशल मीडिया ऐप के जरिए वे आईएसआईएस की हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और लोगों को गुमराह कर भर्तियां कर रहे थे. अबू याहया और उसके सहयोगी कई हत्याओं में भी शामिल रहे. उन्होंने हिजरा के लिए कई माध्यमों से पैसा भी जुटाया.
इस जांच के दौरान यह पता चला कि मोहम्मद अमीन दरअसल केरल की दीप्ति मार्ला के संपर्क में था, जिसने मैंगलोर के अनस अब्दुल रहिमन से शादी कर इस्लाम धर्म अपना लिया था. 2015 में वह पढ़ाई के लिए दुबई गई थी, जहां उसकी मुलाकात मिजहा सिद्दीकी से हुई. इन दोनों महिलाओं का झुकाव आईएसआईएस की तरफ हुआ. इसके बाद 2019 में वे ईरान के तेहरान पहुंची, जहां वे आईएसआईएस ऑपरेटिव के संपर्क में आईं. इसके बाद दोनों भारत लौट आईं. भारत में दीप्ति दरअसल अमीन, ओबेद हामिद माटा, मधेश शंकर उर्फ अब्दु्ला और अन्य के संपर्क में आई.
कैसे काम करता है हूप ऐप?
हूप ऐप में दूसरे सदस्य के साथ शेयर किए गए मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं. यहां तक कि रॉकेट चैट में यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर या अपनी ई-मेल आईडी वैरिफाई करने की जरूरत नहीं होती है. एनआईए ने इस साल मार्च में तीन आरोपी व्यक्तियों - अमीन, रहीस रशीद और मुशाब अनवर को गिरफ्तार किया था.
इससे पहले एनआईए ने आईएस इराक और सीरिया खुरासान प्रांत (आईएसआईएस-केपी) मामले की जांच के दौरान पाया था कि गिरफ्तार आरोपी जहांजैब सामी वानी और उसकी पत्नी हिना बशीर और बेंगलुरु के डॉक्टर अब्दुर रहमान उर्फ 'डॉ ब्रेव' का थ्रेमा ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे. थ्रेमा एक सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म माना जाता है.
हालांकि, पहली बार नहीं है जब एनआईए को आईएस आतंकवादियों के साथ-साथ हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और अल कायदा के आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का सामना करना पड़ा है.
फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के मामले की जांच के दौरान भी एनआईए और अन्य खुफिया एजेंसियों ने अपनी जांच में पहले पाया था कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी पीयर-टू-पीयर सॉफ्टवेयर सेवा का उपयोग कर रहे थे. भारत और विदेशों में अपने साथियों के साथ बात करने के लिए एक जैसी मोबाइल ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल करते हैं.