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कर्नाटक: बांग्लादेशी नागरिक को NIA कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा, मुस्लिम युवकों को कट्टरपंथी बनाने का आरोप

एनआईए ने कहा कि छिपने के दौरान, आरोपी और उसके साथी अक्टूबर 2014 के बर्दवान विस्फोट मामले में शामिल थे. एनआईए की जांच में आगे पता चला कि आरोपी और उसके साथियों ने प्रतिबंधित संगठन जेएमबी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए डकैती के जरिए धन जुटाने की भी साजिश रची थी.

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NIA कोर्ट ने बांग्लादेशी को सुनाई सजा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
NIA कोर्ट ने बांग्लादेशी को सुनाई सजा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कर्नाटक की एनआईए कोर्ट ने मुस्लिम युवकों को कट्टरपंथी बनाने और आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के आरोप में एक बांग्लादेशी व्यक्ति को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को एक बयान में कहा कि जहीदुल इस्लाम उर्फ ​​कौसर पर डकैती, साजिश और धन जुटाने के साथ-साथ गोला-बारूद की खरीद से जुड़े मामलों में 57,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

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बयान में कहा गया है कि इसके साथ ही इन मामलों में कुल 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है. एनआईए जांच के अनुसार, भारत के जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आमिर जहीदुल ने फरार जेएमबी प्रमुख सलाउद्दीन सालेहिन के साथ बांग्लादेश में 2005 के सिलसिलेवार बम धमाकों के सिलसिले में बांग्लादेश पुलिस की हिरासत से भागने के बाद 2014 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था.

पीटीआई के मुताबिक एनआईए ने कहा कि छिपने के दौरान, वह और उसके साथी अक्टूबर 2014 के बर्दवान विस्फोट मामले में शामिल थे. 2 अक्टूबर 2014 को पश्चिम बंगाल के बर्दवान के खगरागढ़ इलाके में एक घर में हुए बम विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई थी और एक अन्य घायल हो गया था.

एजेंसी ने कहा, "विस्फोट के बाद जाहिदुल और उसके साथी बेंगलुरु भाग गए, जहां उन्होंने जेएमबी की भारत विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल और असम के भोले-भाले मुस्लिम युवकों को कट्टरपंथी बनाया और भर्ती किया. आरोपी और उसके साथियों ने जनवरी 2018 में बोधगया में भी विस्फोट किया था." 

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एनआईए की जांच में आगे पता चला कि आरोपी और उसके साथियों ने प्रतिबंधित संगठन जेएमबी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए डकैती के जरिए धन जुटाने की भी साजिश रची थी.

जांच एजेंसी ने कहा कि 2018 के दौरान, उन्होंने इस एजेंडे के तहत बेंगलुरु में चार डकैतियां की थीं और लूटे गए पैसे का इस्तेमाल गोला-बारूद खरीदने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ठिकाने और प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के लिए किया था.

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