एल्गार परिषद मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सागर गोरखे, रमेश गैचोर और ज्योति जगताप को गिरफ्तार कर लिया है. एनआईए का कहना है कि तीनों आरोपी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं. इन तीनों ने फरार माओवादी मिलिंद तेलतुंबडे से मुलाकात की थी और जून 2018 में एल्गार परिषद की योजना बनाई.
एनआईए का यह भी कहना है कि इन तीनों आरोपियों ने हथियारों और विस्फोटक से जुड़े कई प्रशिक्षणों और माओवादी आंदोलन से जुड़े विषयों पर जागरुकता कार्यक्रम पर भी काम किया हुआ है. जांच एजेंसी ने भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में सागर गोरख, रमेश गैचोर और ज्योति जगताप को गिरफ्तार किया है.
एनआईए की ओर से साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एनआईए ने 7 सितंबर को आरोपी सागर तोताराम गोरखे (उम्र 32 साल) को गिरफ्तार किया था. सागर पुणे के वाकाड के रहने वाले हैं. जबकि 36 साल के रमेश पुणे के यरवदा इलाके में रहते हैं, 8 सितंबर को एनआईए ने एक अन्य आरोपी 33 साल की ज्योति राघोबा जगताप को भी पकड़ा जो पुणे की रहने वाली हैं.
ये तीनों गिरफ्तारियां भीमा कोरेगांव एल्गर परिषद केस (आरसी -01/2020/एनआईए/मुंबई) में यू/एस 153 (ए), 505 (1) (बी), 117,120 (बी), 121,001 (ए), 124 (ए), और आईपीसी की धारा, धारा 13, 16, 17, 18 बी, 20, 38, 39 और यूए (पी) एक्ट के तहत 40 के तहत की गई हैं. आरोपी व्यक्ति प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के संगठन कबीर कला मंच के सदस्य हैं.
लोगों को भड़काने का आरोप
कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद के दौरान लोगों को उकसाने और भड़काऊ भाषण देने के संबंध में विशराम पुलिस स्टेशन में पुणे सीआर नंबर 04/2018 नाम से केस दर्ज है. जिन्होंने कई जाति समूहों की दुश्मनी को बढ़ावा दिया और इससे हिंसा हुई जिसके परिणामस्वरूप कई लोग मारे गए. महाराष्ट्र में राज्य व्यापी आंदोलन के दौरान संपत्ति को नुकसान भी पहंचा.
जांच के दौरान, यह भी पता चला कि सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ नेता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूएपीए के तहत प्रतिबंधित किए गए हैं.
पुणे पुलिस ने इस मामले में क्रमशः 2018 में 15 नवंबर और 2019 में 21 फरवरी को आरोप-पत्र और एक पूरक आरोप-पत्र दायर किया. इसमें सागर, रमेश और ज्योति जगताप नामजद आरोपी हैं.
एनआईए ने जनवरी में शुरू की जांच
एनआईए ने इस साल 24 जनवरी को मामले की जांच शुरू की और 14 फरवरी को आरोपी आनंद तेलतुंबडे और गौतम नवलखा को गिरफ्तार कर लिया. इसके अलावा, आरोपी हान्या बाबू तराईल को 28 जुलाई को गिरफ्तार किया गया.
आगे की जांच के दौरान, यह पता चला कि आरोपी सागर गोरखे, रमेश गैचोर और ज्योति जगताप नक्सली गतिविधियों और माओवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और अन्य गिरफ्तार आरोपियों के साथ सह-साजिशकर्ता भी थे. यह भी रिकॉर्ड में आया कि गिरफ्तार आरोपी व्यक्ति सीपीआई (माओवादी) के शहरी नेटवर्क के बारे में फरार आरोपी मिलिंद तेलतुंबडे के संपर्क में थे.
यह भी स्थापित किया गया कि रिकॉर्ड के सबूतों के अनुसार जून 2018 में फरार आरोपी मिलिंद तेलतुंबडे ने एल्गार परिषद कार्यक्रम के बारे में चर्चा की थी जो पुणे में आयोजित की गई थी.
गिरफ्तार आरोपियों को 8 सितंबर को मुंबई में एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया और पूछताछ के लिए 4 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया गया.