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नीरव मोदी भारत लाया जाएगा, लंदन की कोर्ट ने भगोड़े के प्रत्यर्पण को दी मंजूरी

नीरव मोदी मामले की सुनवाई करते हुए लंदन की एक अदालत ने यह भी कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं है कि अगर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उनके साथ न्याय नहीं होगा. भारत की न्यायपालिका निष्पक्ष है. कोर्ट ने मानसिक सेहत को लेकर नीरव की ओर से लगाई गई याचिका को ठुकरा दिया.

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लंदन कोर्ट में पिछले महीने पूरी हुई थी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई (फाइल-एएनआई)
लंदन कोर्ट में पिछले महीने पूरी हुई थी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई (फाइल-एएनआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत सरकार के सभी साक्ष्यों को स्वीकार कियाः कोर्ट
  • मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के लिए नीरव जिम्मेदारः CPS
  • प्रत्यर्पण मामले पर पिछले महीने सुनवाई हुई थी पूरी

पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी और भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी की याचिका को लंदन की अदालत ने आज गुरुवार को ठुकरा दिया है. कोर्ट ने उसके भारत प्रत्यर्पित किए जाने को अपनी मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने कहा कि भारत की न्यायपालिका निष्पक्ष है. 

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वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज सैमुअल गोजी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि नीरव मोदी को भारत में कई सवालों के जवाब देने हैं. भारत में जाने पर उसे दोषी करार दिए जाने की पूरी संभावना है. जज ने यह भी कहा कि नीरव मोदी की ओर से दिए कई बयान आपस में मेल नहीं खाते हैं. पहली नजर में सबूत नीरव के खिलाफ जाते हैं. 

लंदन कोर्ट के फैसले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है. भारत सरकार नीरव मोदी को भारत लाने के लिए विचार करेगी.

फैसले के खिलाफ अपील का मौका

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं है कि अगर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया जाता तो उनके साथ न्याय नहीं होगा. भारत की न्यायपालिका निष्पक्ष है. कोर्ट ने मानसिक सेहत को लेकर नीरव की ओर से लगाई गई याचिका को ठुकरा दिया है. लंदन कोर्ट ने प्रत्यर्पण का आदेश देते हुए नीरव को फैसले के खिलाफ अपील करने की इजाजत दे दी है. 

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अब नीरव के पास क्या विकल्प

कोर्ट के फैसले के बाद नीरव को भारत लाए जाने का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि उसके तुरंत भारत आने की संभावना नहीं दिख रही है. कोर्ट के फैसले के बाद नीरव मोदी के पास ऊपरी अदालत में जाने का विकल्प होगा. फैसले के खिलाफ वह हाईकोर्ट में अपील कर सकता है. नीरव के पास अपील के लिए 28 दिनों का वक्त है. हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद वह मानवाधिकार कोर्ट जा सकता है.

इसके अलावा उसके पास मानवाधिकारों की बात करते हुए यूरोपीय अदालत में जाने का विकल्प होगा. फिलहाल उसके तुरंत भारत आने की संभावना नहीं लग रही है. कोर्ट ने यह भी कहा कि गवाहों को धमकाने की कोशिश भी गई. कोर्ट ने भारत में जेलों के हालात को लेकर संतुष्टि जताई. 

पिछले महीने सुनवाई हुई पूरी

ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई पूरी हुई. 13,600 करोड़ रुपये के पीएनबी फ्रॉड केस में उसे भारत भेजे जाने को लेकर कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने उसे भारत भेजने को लेकर पिछले महीने सुनवाई के दौरान 25 फरवरी की तारीख तय की थी.

पिछले महीने सुनवाई के दौरान भारतीय जांच एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करने वाले क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने ब्रिटेन की कोर्ट को बताया कि नीरव मोदी एक ''पोंजी जैसी योजना'' में शामिल था और वह मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार है यानी कि इसी के चलते पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ भारी धोखाधड़ी हुई. सुनवाई के दौरान नीरव मोदी वीडियो लिंक के जरिए कोर्ट में पेश हुआ.   

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क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने कोर्ट को यह भी बताया था कि नीरव मोदी ने बैंक अधिकारियों के साथ साजिश रचने के बाद अपनी 3 फर्मों (डायमंड्स आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स) का इस्तेमाल कर बैंक को धोखा दिया. कोर्ट के सामने यह भी कहा गया कि नीरव मोदी ने गवाह को जान से मारने की धमकी दी थी. नीरव मोदी जनवरी 2018 में भारत से भाग गया था. 

 

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