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'मजरूह सुल्तानपुरी और बलराज साहनी को भी जेल में डाल दिया...', नेहरू और कांग्रेस पर संसद में बरसीं निर्मला

संविधान पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सीतारमण ने कवि और संगीतकार मजरूह सुल्तानपुरी और अभिनेता बलराज साहनी की गिरफ्तारी का उल्लेख किया. उन्होंने एक परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए इसमें बदलाव करने के लिए कांग्रेस पर आरोप लगाया.

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निर्मला सीतारमण
निर्मला सीतारमण

लोकसभा में बाद सोमवार को राज्यसभा में संविधान में चर्चा हो रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में संविधान पर चर्चा की शुरुआत करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर निशाना साधा.

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संविधान लागू होने के 75 साल पूरा होने के मौके पर सीतारमण ने कवि और संगीतकार मजरूह सुल्तानपुरी और अभिनेता बलराज साहनी की गिरफ्तारी का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए संविधान में संशोधन किए.

सीतारमण ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए 1951 में नेहरू ने पहला संवैधानिक संशोधन किया था. उन्होंने कहा कि इस दौरान कई हस्तियों को गिरफ्तार किया गया और कई किताबों पर प्रतिबंध लगाया गया.

एक परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए संविधान में संशोधन हुए

सीतारमण ने कहा कि मजरूह सुल्तानपुरी और बलराज साहनी दोनों को 1949 में जेल में डाला गया. 1949 में मिल मजदूरों के लिए आयोजित बैठकों में से एक बैठक में मजरूह सुल्तानपुरी ने एक कविता पढ़ी थी. यह कविता जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ लिखी गई थी. लेकिन उन्होंने इसके लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया था और उन्हें जेल में डाल दिया गया.

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उर्दू के सबसे उम्दा कवियों में से एक और 20वीं सदी के हिंदी फिल्मों के संगीतकार सुल्तानपुरी 'तीसरी मंजिल', 'आशा', 'यादों की बारात', 'कयामत से कयामत तक', 'जो जीता वही सिकंदर' जैसी फिल्मों के लोकप्रिय गानों के लिए प्रसिद्ध हैं. वहीं, बलराज साहनी हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता रहे हैं. उनकी फिल्में 'धरती के फूल' और 'दो बीघा जमीन' काफी लोकप्रिय रही हैं. उन्हें अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए 1949 में जेल जाना पड़ा था.

सीतारमण ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर नकेल कसने का कांग्रेस का रिकॉर्ड सिर्फ इन दो लोगों तक सीमित नहीं था. माइकल एडवर्ड्स ने 1975 में नेहरू की बायोग्राफी लिखी थी, जिस पर प्रतिबंध लगा दिया गया. कांग्रेस ने 'किस्सा कुर्सी का' फिल्म पर भी बैन लगा दिया. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि यह प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे पर सवाल उठाती थी.

सीतारमण ने कहा कि नेहरू की उत्तराधिकारी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी अपने परिवार और वंश को फायदा पहुंचाने के लिए संविधान में संशोधन करते रहे. ये संशोधन लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नहीं थे बल्कि सत्ता में बैठे लोगों को सुरक्षा देने के लिए थे. एक परिवार को मजबूती देने के लिए थे.

महिला विरोधी पार्टी है कांग्रेस

सीतारमण ने कांग्रेस पार्टी को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस ने 1986 में मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम पारित किया. दूसरी तरफ, हमारी पार्टी ने नारी शक्ति अधिनियम पारित किया. राजीव गांधी के लोकसभा में 426 जबकि राज्यसभा में 159 सांसद थे लेकिन उन्होंने महिला आरक्षण बिल पारित नहीं किया. यह पार्टी हमेशा से महिला विरोधी रही है.

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