NITI Aayog Health Index Report: नीति आयोग ने सोमवार को हेल्थ इंडेक्स जारी किया. इसके मुताबिक, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के मामले में केरल लगातार चौथी बार पहले नंबर पर रहा. इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश सबसे नीचे रहा. 19 बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश भले ही सबसे नीचे हो लेकिन यहां 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है. केरल ने ओवरऑल परफॉर्मेंस तो उत्तर प्रदेश ने इन्क्रिमेंटल परफॉर्मेंस के मामले में टॉप किया है.
उत्तर प्रदेश की ओवरऑल परफॉर्मेंस रैंकिंग बहुत खराब है और 19 बड़े राज्यों में सबसे नीचे है. उसका स्कोर 30.57 है. हालांकि, इन्क्रिमेंटल चेंज +5.52 है. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत (Amitabh Kant) का कहना है कि जैसा काम यूपी में हुआ है, वैसा काम किसी और राज्य में नहीं हुआ.
नीति आयोग ने नवजात मृत्यु दर, 5 साल से कम वालों की मृत्यु दर, जन्म के समय लिंग अनुपात, मातृ मृत्यु दर, नवजातों का पूर्व टीकाकरण और टीबी के मामले समेत 43 मानकों पर हेल्थ इंडेक्स बनाया है. उत्तर प्रदेश ने 43 मानकों में से 33 में सुधार हुआ है. वहीं, केरल में सिर्फ 19 मानकों में ही सुधार हुआ है. उसके बावजूद केरल ने टॉप किया है लेकिन उत्तर प्रदेश सबसे नीचे आया है.
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क्या है इसका कारण?
- नवजात मृत्यु दर उत्तर प्रदेश में 32 है, जबकि केरल में 5.
- 5 साल के कम उम्र की मृत्यु दर यूपी में 47 और केरल में 10 है.
- जन्म के समय लिंग अनुपात यूपी में 880 और केरल में 957 है.
- मातृ मृत्यु दर यूपी में 197 है तो केरल में 43.
- आधुनिक गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने की दर यूपी में 37.50 है तो केरल में ये आंकड़ा 53.50 है.
- टीबी के इलाज का सक्सेस रेट में यूपी में 78.93% और केरल में 88.21% है.
- राज्य के सरकारी खजाने से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मिले फंड को इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी तक पहुंचने में यूपी में 124 दिन और केरल में 31 दिन लगते हैं.
इन मामलों में केरल से आगे है यूपी
कई मामलों में उत्तर प्रदेश केरल से आगे है. उत्तर प्रदेश में पूर्ण टीकाकरण की दर 95.99% है, जबकि केरल में ये दर 92.44% है. इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के 70% से ज्यादा कायाकल्प स्कोर वाले जिला अस्पतालों का अनुपात यूपी में 50.33 तो केरल में 38.89 है. नीति आयोग की रिपोर्ट ये भी बताती है कि 2018-19 की तुलना में 2019-20 में यूपी में पीएचसी और सीएचसी में भी सुधार हुआ है. जबकि, केरल में ऐसा नहीं हुआ.