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किसान पंचायत में बोले नितिन गडकरी- किसानों को पहली बार अपनी शर्तों पर उपज बेचने का अधिकार मिला

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमें किसानों को अधिक से अधिक दाम दिलाना है. हमें किसानों के साथ न्याय करना है. नए कानून में किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने का प्रावधान है. किसानों को अपने उत्पाद का सही कीमत पाने का अधिकार है.

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केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (फाइल फोटो-Getty Images)
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (फाइल फोटो-Getty Images)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • छह वर्षों में किसानों के हितों में सबसे अच्छा फैसला
  • किसानों को अपनी उपज बेचने को 2 विकल्प मिले-गडकरी
  • नए कानून से किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी

नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और केंद्र सरकार के बीच रार जारी है. किसान तीन कृषि कानूनों में संशोधन के बजाय पूरी तरह से रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम केंद्रीय मंत्री किसानों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये कानून उनके हक में हैं.  

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केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी सरकार से पिछले छह वर्षों में किसानों के हितों में अब तक का सबसे अच्छा फैसला लिया है. 'आजतक' से विशेष बातचीत में नितिन गडकरी ने कहा कि किसानों के हितों में पिछले 6 साल के दौरान एनडीए सरकार ने 50 सालों की सरकार की तुलना में कई गुना अच्छे फैसले किए हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लगातार छह साल में बढ़ती रही है. 

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए यह मजबूरी थी कि उसे अपनी उपज बाजार समिति में ही बेचना पड़ता था. लेकिन अब किसान के पास बाजार समिति के साथ अपनी उपज को बाहर भी बेचने का विकल्प है. नितिन गडकरी अपना उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि वह बाजार समिति में बेचने के बजाय अपने खेत की फसल बाहर बेचते हैं. इसके चलते उन्हें मार्केट से ज्यादा दाम मिलते हैं और बिचौलियों को दलाली देने से बच जाते हैं. 

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केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कहा, 'हमें किसानों को अधिक से अधिक दाम दिलाना है. हमें किसानों के साथ न्याय करना है. नए कानून में किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने का प्रावधान है. किसानों को अपने उत्पाद का सही कीमत पाने का अधिकार है.'

कीमत तय करने का अधिकार मिला

नितिन गडकरी ने कहा कि किसानों को अपने उत्पाद की कीमत तय करने का अधिकार नहीं था. किसानों के उपज की कीमत बिचौलिया तय किया करते थे. पहली बार किसानों को अपनी शर्तों पर अपनी उपज बेचने का अधिकार मिला है. इसलिए नए कृषि कानूनों में किसानों का भला है. इसलिए जो भलाई का काम है उसके लिए लोगों को साथ देना चाहिए. भलाई के काम का विरोध नहीं करना चाहिए.

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सरकार सुझाव मानने को तैयार

सरकार किसानों को भरोसे में क्यों नहीं ले पा रही है?, इस सवाल पर नितिन गडकरी ने कहा कि जब पार्लियामेंट में यह बिल आया था तब सभी पार्टियों के सुझाव को सरकार ने स्वीकार किया था और उसके बाद ही यह बिल पास हुआ था. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अगर कोई सुझाव आते हैं तो सरकार ने दिमाग खुला रखा है और उन सुझावों को लेने के लिए तैयार है. मैं विश्वास दिलाता हूं जिसमें किसानों का भला होगा वैसे सुझावों को सरकार मानने को तैयार है.

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नितिन गडकरी ने कहा कि बहुसंख्यक ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने नए कृषि कानूनों का समर्थन किया है. लेकिन फिर भी वो किसानों को सच्चाई से अवगत कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि किसान निश्चित रूप से सरकार की बात समझेंगे. आंदोलन में आए किसान बात समझकर नीतियों का साथ देंगे, इसका उन्हें पूरा भरोसा है.


 

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