बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को पुणे पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि टीपू सुल्तान जयंती के लिए रैली पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. इस मामले में सुनवाई करते हुए दो जजों की बेंच (न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और शिवकुमार दिघे) ने कहा कि पुलिस रैली का रूट तय कर सकती है, लेकिन रैली करने से मना नहीं कर सकती.
महाराष्ट्र सरकार ने अदालत में कहा कि टीपू सुल्तान की जयंती मनाने पर कोई पाबंदी नहीं है. हालांकि, कुछ समुदायों के विरोध के चलते कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में पुणे पुलिस ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को रैली की अनुमति नहीं दी.
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एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि बीते साल भी इस मामले में बवाल हुआ था और पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की थीं. इस साल भी पुलिस ने बारामती इलाके में रैली के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया और सुझाव दिया कि रैली सिर्फ निजी स्थान पर आयोजित की जाए.
निजी जगह क्यों?
AIMIM के वकील ने दलील दी कि संविधान में रानी लक्ष्मीबाई और टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक नायकों की तस्वीरें हैं. उन्होंने पूछा, 'तो फिर बारामती में रैली क्यों नहीं हो सकती?' इस पर हाईकोर्ट ने कहा, 'आप रूट तय करें, शर्तें लगाएं, लेकिन रैली पर पूरी तरह प्रतिबंध क्यों?'
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न्यायमूर्ति डेरे ने पुणे ग्रामीण के एसपी पंकज देशमुख को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया. देशमुख ने कहा कि बीते साल की घटनाओं और क्रॉस एफआईआर को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.
कोर्ट ने कहा, 'अगर कोई आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल होता है या कोई अपराध होता है, तो आप कानूनी कार्रवाई करें. लेकिन रैली करने से रोकना सही नहीं है.'
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रूट तय करने पर सहमति
देशमुख ने कहा कि वे शुक्रवार या शनिवार को AIMIM के सदस्यों से मुलाकात करेंगे और रैली का रूट तय करेंगे. कोर्ट ने कहा कि रैली 24 दिसंबर को होनी चाहिए और इस पर 17 दिसंबर को फिर सुनवाई होगी.
गौरतलब है कि बीते साल विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कुछ सदस्यों ने इस रैली का विरोध किया था, जिसके चलते बारामती पुलिस ने इस साल भी अनुमति देने से इनकार कर दिया था.