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पेशाब कांड में पायलट को राहत नहीं, सालभर में इंडिगो की सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं: एविएशन मिनिस्ट्री

पिछले साल 26 नवंबर को न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में नशे में धुत शंकर मिश्रा ने बिजनेस क्लास में बैठी 70 साल की महिला यात्री पर पेशाब कर दिया था. इस मामले पुलिस ने 7 जनवरी को बेंगलुरु से आरोपी को गिरफ्तार किया था. मामले में DGCA ने पायलट का तीन महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था.

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केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया. (फाइल फोटो)
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया. (फाइल फोटो)

एयर इंडिया पेशाब कांड मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जिस पायलट पर एक्शन लिया था और तीन महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड किया गया था, उसे अब तक राहत नहीं दी गई है. इसके साथ ही विभाग ने अब तक कार्रवाई की समीक्षा भी नहीं की है. इसके अलावा, एविएशन मिनिस्ट्री ने पिछले तीन साल में 149 यात्रियों को गलत आचरण पर 'नो फ्लाई जोन' में डाला है. साथ ही पिछले साल 1171 उड़ानें तकनीकी गड़बड़ी की वजह से रद्द की गईं.
 
राज्यसभा में कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सवाल पूछे थे. सोमवार को मंत्रालय ने इन सवालों के जवाब में दिलचस्प तथ्यों का खुलासा किया है. मंत्रालय ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान यानी 2020 से अब तक एयरलाइन द्वारा गठित संबंधित आंतरिक समिति की सिफारिशों के अनुसार, 149 यात्रियों को एक अवधि के लिए 'नो फ्लाई लिस्ट' में रखा गया है. इतना ही नहीं, इन पिछले तीन साल में किसी यात्री को राहत नहीं दी गई. यानी ऐसा कोई मामला वापस नहीं लिया गया है.

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तीन साल में सिर्फ एक पायलट का लाइसेंस सस्पेंड हुआ

मंत्रालय ने आगे बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान एक पायलट का लाइसेंस भी सस्पेंड किया गया. पायलट को अपनी ड्यूटी का पालन नहीं कर पाने का दोषी पाया गया, जिसकी वजह से 3 महीने की अवधि के लिए लाइसेंस सस्पेंड किया गया. हैरान करने वाली बात यह रही कि इस मामले की ना तो समीक्षा की गई है और ना ही कार्रवाई निरस्त की गई है.

पेशाब कांड में विभाग ने लिया था एक्शन

बता दें कि ये उसी फ्लाइट का पायलट था, जो पिछले साल 26 नवंबर 2022 को न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही थी और उसमें शंकर मिश्रा नाम के पैंसेजर ने महिला यात्री पर पेशाब कर दी थी. डीजीसीए नागरिक उड्डयन नियमों का उल्लंघन करने पर एयर इंडिया पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसके अलावा पायलट-इन कमांड का लाइसेंस भी तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया था.

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पायलट ने निलंबन को वापस लेने की अपील की थी

संबंधित पायलट की तरफ से निलंबन वापस लेने के लिए 24 जनवरी को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को एक ज्वॉइंट पिटीशन भेजी गई थी.  लेकिन डीजीसीए ने मांग को खारिज कर दिया था. याचिका में कहा गया था कि हमारा मानना है कि रेगुलेटर ने रिकॉर्ड पर सभी तथ्यों को लिए बिना ये कार्रवाई की है. जांच की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और जांच में महत्वपूर्ण बातों को छोड़ दिया गया. अब मंत्रालय की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि इस कार्रवाई की ना तो समीक्षा की गई और ना ही इसे निरस्त किया गया.

इंडिगो की सबसे ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं

राज्यसभा में एक अन्य सवाल के जवाब में उड्डयन मंत्रालय ने खुलासा किया कि पिछले साल 1171 उड़ानें तकनीकी गड़बड़ियों के कारण रद्द की गईं. इनमें सबसे ज्यादा इंडिगो की फ्लाइट (613 उड़ानें) रद्द की गईं.

 

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