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हर साल 68.5 करोड़ मामले, 2 लाख मौतें... क्या है Norovirus, जो केरल में बच्चों में फैल रहा? जानें इसके लक्षण और इलाज

Norovirus in Kerala: केरल के एर्नाकुलम जिले में 19 स्कूली बच्चे नोरोवायरस की चपेट में आ गए हैं. कुछ बच्चों के पैरेंट्स भी इससे संक्रमित हुए हैं. उल्टियां और दस्त इस वायरस के प्रमुख लक्षण हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, हर साल 68 करोड़ से ज्यादा लोग नोरोवायरस की चपेट में आते हैं. जानें कितना खतरनाक है ये वायरस? कैसे फैलता है? इसका इलाज क्या है?

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अचानक उल्टी-दस्त आना नोरोवायरस के प्रमुख लक्षण हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
अचानक उल्टी-दस्त आना नोरोवायरस के प्रमुख लक्षण हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Norovirus in Kerala: केरल में एक बार फिर नोरोवायरस का संक्रमण फैल रहा है. यहां के एर्नाकुलम जिले में कक्कानाड में एक स्कूल में 19 बच्चे नोरोवायरस से संक्रमित मिले हैं. कुछ बच्चों के माता-पिता भी इससे संक्रमित हुए हैं. 

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नोरोवायरस से 19 बच्चों के संक्रमित होने के बाद पहली से पांचवीं तक के छात्रों की क्लासेस को ऑनलाइन कर दिया गया है. स्थानीय प्रशासन ने वायरस को फैलने से रोकने के उपायों पर काम शुरू कर दिया है.

एक दिन पहले ही जिले के सीनियर मेडिकल ऑफिसर ने बताया था कि 62 छात्रों और कुछ पैरेंट्स में नोरोवायरस के लक्षण मिले हैं, जिनमें से दो के सैम्पल को टेस्टिंग के लिए लैब भेजा गया है. 

केरल में पिछले साल भी तिरुवनंतपुरम के विझिंजम में दो बच्चे नोरोवायरस से संक्रमित मिले थे. जबकि, दो साल पहले वायनाड में भी इस वायरस ने कई बच्चों को संक्रमित किया था.

क्या है नोरोवायरस?

नोरोवायरस एक वायरल बीमारी है. चूंकि इससे पेट की बीमारी होती है, इसलिए इसे 'स्टमक फ्लू' या 'स्टमक बग' भी कहा जाता है.

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अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, इसे स्टमक फ्लू जरूर कहा जाता है, लेकिन ये बीमारी फ्लू से जुड़ी नहीं है जो इन्फ्लूएंजा वायरस से होती है.

क्या हैं इसके लक्षण?

अचानक उल्टी या दस्त होना इस वायरस के मुख्य लक्षण हैं. इसके अलावा तेज बुखार, बदन दर्द और सिरदर्द भी होता है. संक्रमित होने के एक या दो दिन बाद इसके लक्षण दिखते हैं.

कैसे फैलता है ये वायरस?

नोरोवायरस सीवेज या खाने के जरिए फैलता है. इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर भी नोरोवायरस से संक्रमित हो सकते हैं.

इसके अलावा अगर आपने किसी ऐसी सतह या चीज को छुआ हो जहां नोरोवायरस के कण मौजूद हों तो उससे भी आप वायरस की चपेट में आ सकते हैं.

किन लोगों को है खतरा?

इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों को है. इनके अलावा बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोग भी इस वायरस की चपेट में आसानी से आ सकते हैं.

कितना खतरनाक है ये वायरस?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल नोरोवायरस के लगभग 68.5 करोड़ मामले सामने आते हैं. इनमें से 20 करोड़ मामले 5 साल से कम उम्र के बच्चों में आते हैं.

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WHO का मानना है कि नोरोवायरस की वजह से हर साल दो लाख मौतें होती हैं, जिनमें से 50 हजार से ज्यादा मौतें छोटे बच्चों की होती हैं. 

बचाव का क्या है तरीका?

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के मुताबिक, नोरोवायरस से संक्रमित होने के बाद घर पर ही ठीक हुआ जा सकता है. 

चूंकि इस वायरस से संक्रमित होने पर उल्टी-दस्त आते हैं, इसलिए शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. दो से तीन दिन में मरीज को आराम मिलने लगता है.

इसके अलावा वायरस से बचने के बार-बार हाथों को साबुन और गर्म पानी से धोना चाहिए. कपड़ों को भी गर्म पानी से धोना चाहिए.

संक्रमित होने के बाद क्या बचा जा सकता है?

सीडीसी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में कई बार नोरोवायरस की चपेट में आ सकता है, क्योंकि ये कई तरह का होता है. 

ये जरूरी नहीं है कि अगर आप एक बार नोरोवायरस से संक्रमित हो गए, तो दोबारा इसकी चपेट में नहीं आ सकते. एक टाइप के नोरोवायरस से संक्रमित होने पर दूसरे टाइप के वायरस के खिलाफ इम्युनिटी नहीं बनती है.

सीडीसी के मुताबिक, नोरोवायरस के खिलाफ इम्युनिटी जरूर बनती है लेकिन ये कितने लंबे समय तक रहती है, इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है. इसके अलावा नोरोवायरस से संक्रमित होना आपके जीन पर भी डिपेंड करता है.

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