भारतीय राजनीति में इजरायली सॉफ्टवेयर Pegasus से कथित जासूसी का मामला एक बार फिर गर्मा गया है. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि 2017 में एक रक्षा सौदे में भारत ने इजरायल से Pegasus खरीदा था. ये डील 2 अरब डॉलर (15 हजार करोड़ रुपये) में हुई थी. Pegasus को इजरायली कंपनी NSO ने बनाया है.
इस रक्षा सौदे के तहत भारत ने इजरायल से हथियार खरीदे थे. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इसी 2 अरब डॉलर की डील के साथ भारत ने इजरायली सॉफ्टवेयर Pegasus भी खरीदा था.
पिछले साल जुलाई में Pegasus का मामला तब गर्माया था, जब एक मीडिया हाउस ने पत्रकारों, नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के कॉल रिकॉर्ड किए जाने का दावा किया था. रिपोर्ट में दावा किया था ये केंद्र सरकार ने Pegasus के जरिए 300 फोन नंबर को टैप किया गया. जिनके कॉल रिकॉर्ड होने का दावा किया गया था, उनमें राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का नाम भी शामिल था.
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अश्विनी वैष्णव विपक्ष के निशाने पर
ऐसे में एक बार फिर जब Pegasus का मामला गर्माया है तो आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) को पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने अश्विनी वैष्णव के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की मांग की है.
अधीर रंजन चौधरी ने अश्विनी वैष्णव पर सदन को गुमराह करने और झूठ बोलने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि सरकार हमेशा सदन में कहती आई है कि Pegasus से उसका कुछ लेना-देना नहीं है और उसने NSO से सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा. लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स के खुलासे से लगता है कि सरकार ने सदन को गुमराह किया और जनता से झूठ बोला.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी मोदी सरकार को घेरा और देशद्रोह करने का आरोप लगाया. राहुल ने ट्वीट कर लिखा, 'मोदी सरकार ने हमारे लोकतंत्र की प्राथमिक संस्थाओं, राज नेताओं और जनता की जासूसी करने के लिए पेगासस खरीदा था. फोन टैप करके सत्ता पक्ष, विपक्ष, सेना, न्यायपालिका सब को निशाना बनाया है. ये देशद्रोह है. मोदी सरकार ने देशद्रोह किया है.'
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अश्विनी वैष्णव क्यों निशाने पर?
अश्विनी वैष्णव आईटी मंत्री हैं. 19 जुलाई 2021 को लोकसभा में उन्होंने Pegasus मामले पर सरकार का पक्ष रखा था. उन्होंने इस जासूसी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की बात को नकारा था. उन्होंने कहा था, 'एक वेब पोर्टल पर कल रात बढ़ा-चढ़ाकर एक अति संवेदनशील रिपोर्ट प्रकाशित की गई. ये रिपोर्ट मॉनसून सत्र के एक दिन पहले सामने आई, ये संयोग नहीं हो सकता. ये देश की छवि को धूमिल करने की कोशिश है.'
उन्होंने आगे कहा, 'पहले भी वॉट्सऐप पर Pegasus के इस्तेमाल को लेकर दावे किए गए थे. तब सुप्रीम कोर्ट समेत सभी पार्टियों ने इसे नकार दिया था. इस रिपोर्ट का आधार एक समूह है जिसने दावा किया कि उसे 50 हजार फोन नंबर मिले के लीक किए गए डेटा मिले हैं. डेटा बेस में फोन नंबर मिलने से ये साबित नहीं हो जाता कि फोन स्पाईवेयर से प्रभावित था.'
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, 'स्पाईवेयर बनाने वाली कंपनी NSO ने भी कहा है कि डेटा का निगरानी या कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है. NSO ने ये भी कहा है कि Pegasus का इस्तेमाल करने वाले देशों की लिस्ट भी गलत है और जिन देशों का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है, वो उसके क्लाइंट ही नहीं हैं. उसके ज्यादातर क्लाइंट पश्चिमी देश हैं.'
अश्विनी वैष्णव का पूरा जवाब यहां पढ़ सकते हैं...
सरकार स्पाईवेयर खरीदने की बात नकारती रही है
देश में 2019 में Pegasus का नाम चर्चा में आया था. उस समय एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सरकार ने Pegasus के जरिए पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनेताओं के फोन की जासूसी की. संसद में सरकार कई मौकों पर इस बात को खारिज कर चुकी है.
12 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में सवाल पूछा गया 'क्या सरकार ने पेगासस से कोई सॉफ्टवेयर प्राप्त किया है?' इसके जवाब में सरकार ने कहा, 'जी नहीं.'
24 मार्च 2021 को लोकसभा में सवाल पूछा गया, 'क्या सरकार को देश में पेगासस जैसे स्पाईवेयर या निगरानी सॉफ्टवेयर की मौजूदगी का पता चला है?' जवाब में सरकार ने कहा, 'सरकार के पास इस तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.'
लेकिन NYT ने अलग ही किया दावा
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि भारत ने 2017 में इजरायल से 2 अरब डॉलर की रक्षा डील के तहत जासूसी सॉफ्टवेयर Pegasus खरीदा था. इस रक्षा सौदे में भारत ने मिसाइल सिस्टम और हथियार खरीदे थे. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने भी ये सॉफ्टवेयर खरीदा था, लेकिन टेस्टिंग के बाद इसका इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया.
इस मामले में भारत में अब तक क्या हुआ?
जुलाई 2021 में Pegasus से जासूसी करने का आरोप लगाया. सड़क से लेकर संसद तक हंगामा हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को रिटायर्ड जज आरवी रविंद्रन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया. जस्टिस रविंद्रन 2005 से 2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे हैं. इस कमेटी को 8 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी. हालांकि, अभी तक ये रिपोर्ट आई नहीं है.