केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में एक अहम संविधान संशोधन बिल पेश किया. इस बिल के तहत राज्यों को भी ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार मिलेगा. हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) ने इस पर मुहर लगाई थी. केंद्र सरकार इस बिल को क्यों लेकर आई? इसका असर क्या होगा? आइए जानते हैं...
क्या है OBC आरक्षण से जुड़ा बिल?
ये 127वां संविधान संशोधन बिल है, जिसे आर्टिकल 342A(3) के तहत लागू किया जाएगा. इससे राज्य सरकारों को ये अधिकार होगा कि वह अपने हिसाब से ओबीसी समुदाय की लिस्ट तैयार कर सकें. संशोधित बिल के पारित होने के बाद राज्यों को इसके लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना होगा.
केंद्र क्यों ला रही है ऐसा बिल?
दरअसल, 5 मई को मराठा आरक्षण के मामले में फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा था कि ओबीसी की लिस्ट तैयार करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास ही है. आरक्षण जैसे संवेदनशील मामले में केंद्र सरकार किसी तरह का कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है. इसलिए उसी वक्त केंद्र सरकार ने इस पर आपत्ति जताई थी. इसलिए संविधान संशोधन लाकर केंद्र सरकार राज्य सरकारों को भी ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार दे रही है.
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इस बिल का क्या होगा असर?
इस बिल के कानून बनते ही राज्य सरकारों को ओबीसी लिस्ट तैयार करने का अधिकार मिल जाएगा. इस बिल के कानून बनने का फायदा उन राज्यों में उन प्रभावशाली जातियों को होगा जो ओबीसी आरक्षण में शामिल होने की मांग कर रही हैं. जैसे- महाराष्ट्र में मराठा समुदाय और हरियाणा में जाट समुदाय, गुजरात में पटेल समुदाय और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को ओबीसी में शामिल होने का मौका मिल सकता है.
क्या यूपी चुनाव भी है बड़ी वजह?
अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं, जहां पर ओबीसी समुदाय का चुनावी गणित पर बड़ा असर है. ऐसे में केंद्र के इस फैसले को ओबीसी समुदाय के लुभाने के तौर पर भी देखा जा रहा है. हाल ही में मेडिकल एजुकेशन की रिजर्व सीटों में केंद्र ने ओबीसी समुदाय और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के लिए सीटें आरक्षित की थीं.