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मजदूरी मांगने पर मालिक देता था यातनाएं... 1000 किमी. पैदल चलकर घर लौट आए श्रमिक, सुनाई दर्द भरी कहानी

ओडिशा के मजदूरों की बेंगलुरु में दुर्दशा का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. वहां काम करने गए मजदूरों को कई महीनों से मजदूरी नहीं दी जा रही थी. पैसे मांगने पर मालिक बुरी तरह यातनाएं दे रहा था. आखिरकार परेशान होकर मजदूर पैदल ही बेंगलुरु से ओडिशा भाग आए. कांग्रेस ने इस मामले में नवीन पटनायक सरकार को घेर लिया है.

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बेंगलुरु से पैदल चलकर सात दिन में पहुंचे घर (पीटीआई)
बेंगलुरु से पैदल चलकर सात दिन में पहुंचे घर (पीटीआई)

अब बेंगलुरु में बाहरी मजदूरों को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है. मालिक की यातनाओं से परेशान होकर तीन मजदूर वहां से भागकर पैदल ही 7 दिन में 1000 किमी. का सफर तय कर ओडिशा के कोरापुट होते हुए कालाहांडी अपने घर पहुंच गए. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कालाहांडी के तिंगलकन गांव के बुडू मांझी, कटार मांझी और भिखारी मांझी को बेंगलुरु में उनका मालिक कथित तौर पर मजदूरी नहीं दे रहा था, जिससे तंग आकर उन्होंने यह कठिन यात्रा करने की ठानी. उनकी मामूली सी बचत खत्म हो गई थी. उनके पास न तो भोजन था और न ही पैसे. 

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक उन्होंने बताया कि वे 26 मार्च को बेंगलुरु से चले थे. इसके बाद दिन-रात चले. हालांकि कुछ जगहों पर उन्हें सवारी भी मिली. हालांकि श्रमिकों की समस्या सुन कुछ लोगों ने उनकी मदद की. एक दुकानदार ने उन्हें भोजन कराया तो ओडिशा मोटर वाहन चालक एसोसिएशन की पोतंगी इकाई के अध्यक्ष भगवान पडल ने उन्हें 1,500 रुपये दिए. इसके अलावा नबरंगपुर के लिए उनके परिवहन की व्यवस्था की. ये श्रमिक उस 12 सदस्यीय समूह का हिस्सा थे, जो दो महीने पहले नौकरी की तलाश में बिचौलियों की मदद से बेंगलुरु गया था.

दो महीने से नहीं मिली थी मजदूरी

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु में उन्हें काम तो मिल गया लेकिन उनके मालिक ने कथित तौर पर उन्हें दो महीने तक मजदूरी नहीं दी. तीनों ने कहा कि जब उन्होंने वेतन मांगा तो उन्हें पीटा गया. भिखारी माझी ने बताया,'हम अपने परिवार चलाने के लिए पैसा कमाने की उम्मीद से बेंगलुरु गए थे, लेकिन जब भी हमने वेतन मांगा तो भुगतान करने के बजाय हमारी पिटाई कर दी गई. जब यह सब सहन नहीं हो पाया तो हम वहां से चले आए.'

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कांग्रेस ने पटनायक सरकार पर बोला हमला

पिछड़े केबीके (कोरापुट-बोलंगीर-कालाहांडी) से जुड़े कांग्रेस विधायक संतोष सिंह सलूजा ने कहा कि यह घटना क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को दर्शाती है. उन्होंने नवीन पटनायक सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजू जनता दल (बीजद) ने 23 साल सत्ता में रहने के बाद भी लोगों को निराश किया है. 

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सरत पटनायक ने कहा कि सरकार गरीब लोगों की चिंता करने के बजाय निवेश लाने के नाम पर नौकरशाहों और नेताओं की जापान यात्रा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. वहीं मुख्यमंत्री जापान के दौरे पर हैं. ओडिशा के श्रम मंत्री श्रीकांत साहू और श्रम आयुक्त एन थिरुमाला नाइक ने इस मुद्दे पर कई फोन कॉल या संदेशों का जवाब नहीं दिया.

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