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बालासोर रेल हादसाः मुआवजे के लिए महिला ने गढ़ी पति की मौत की झूठी कहानी, ऐसे पकड़ में आई

यह मामला उस समय सामने आया, जब महिला के पति विजय दत्त ने खुद इस संबंध में पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज की. महिला की पहचान कटक जिले के मणिबांधा इलाके की रहने वाली गीतांजली दत्ता के रूप में की गई है. यह महिला उस अस्पताल पहुंची थी, जहां शिनाख्त के लिए शवों को रखा गया था.

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कटक में महिला के पति ने शिकायत दर्ज कराई
कटक में महिला के पति ने शिकायत दर्ज कराई

ओडिशा के बालासोर में दो जून को हुए ट्रिपल रेल हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए प्रशासन ने मुआवजा राशि का ऐलान किया है. लेकिन इस बीच एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है. एक महिला ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने जीवित पति को मृत बताकर मुआवजा लेने की कोशिश की.

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यह मामला उस समय सामने आया, जब महिला के पति विजय दत्त ने खुद इस संबंध में पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज की. महिला की पहचान कटक जिले के मणिबांधा इलाके की रहने वाली गीतांजली दत्ता के रूप में की गई है. यह महिला उस अस्पताल पहुंची थी, जहां शिनाख्त के लिए शवों को रखा गया था.

महिला ने बालासोर के एनओसीसी इलाके के एक यात्री का फर्जी आधार कार्ड दिखाकर यह दावा किया कि उसके पति की रेल हादसे में मौत हो गई है. लेकिन जांच में महिला का झूठ पकड़ा गया. जांच के दौरान पता चला कि महिला ने मुआवजा राशि पाने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए थे. 

इस पूरे मामले पर महिला के पति ने कहा, मैं शर्मिंदा हूं. मैं चाहता हूं कि सभी लोग इस तरह की महिलाओं से दूर रहें. मैंने पुलिस में केस दर्ज करवा दिया है. मुझे इंसाफ चाहिए. 

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बता दें कि ओडिशा के बालासोर में 2 जून को ट्रेन हादसा हुआ था. इस हादसे में अब तक 288 लोगों की मौत हुई है. 1100 से ज्यादा घायल हुए. लेकिन ट्रेन में यात्रा कर रहे सैकड़ों लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस भीषण हादसे के बावजूद मौत को मात दी है. ऐसी ही कहानी 24 साल के विश्वजीत मलिक की है. विश्वजीत के पिता हेलाराम मलिक ने दिल दहला देने वाली इस घटना को साझा किया. उन्होंने बताया कि कैसे वे अपने बेटे के पास पहुंचे?

सीबीआई कर रही हादसे की जांच

हादसे की जांच सीबीआई कर रही है. सीबीआई की टीम ने मंगलवार को दो बार बालासोर में घटना स्थल और बहनागा रेलवे स्टेशन पहुंचकर जांच की. टीम ने मेन लाइन और लूप लाइन दोनों की जांच की. CBI के अधिकारी इस दौरान सिग्नल रूम भी गए. टीम के साथ रेलवे के अधिकारी भी मौजूद थे. टीम का पूरा फोकस हादसे के पीछे की वजह और गुनहगार की पड़ताल करने पर है. इस सिलसिले में टीम रेलवे सुरक्षा एक्सपर्ट से भी विचार-विमर्श कर सकती है. जांच के लिए बनाई गई टीम का नेतृत्व सीबीआई के संयुक्त निदेशक (विशेष अपराध) विप्लव कुमार चौधरी कर रहे हैं.

कब और कैसे हुआ था ओडिशा रेल हादसा?

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ट्रेन नंबर 12481 कोरोमंडल एक्सप्रेस बहानगा बाजार स्टेशन के (शालीमार-मद्रास) मेन लाइन से गुजर रही थी, उसी वक्त डिरेल होकर वो अप लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई. ट्रेन पूरी रफ्तार (फुल स्पीड) में थी, इसका परिणाम यह हुआ कि 21 कोच पटरी से उतर गए और 3 कोच डाउन लाइन पर चले गए.दरअसल, बहानगा बाजार स्टेशन पर इन ट्रेन का स्टॉपेज नहीं है. ऐसे में दोनों ही ट्रेनों की रफ्तार तेज थी. बहानगा बाजार स्टेशन से गुजर रही कोरोमंडल एक्सप्रेस अचानक पटरी से उतरी तो ट्रेन के कुछ डिब्बे मालगाड़ी से जा भिड़े. इसी दौरान हादसे के समय डाउन लाइन से गुजर रही यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के पीछे के दो डिब्बे भी पटरी से उतरी कोरोमंडल एक्सप्रेस की चपेट में आ गए. हादसा भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन से करीब 171 किलोमीटर और खड़गपुर रेलवे स्टेशन से करीब 166 किलोमीटर दूर स्थित बालासोर जिले के बहानगा बाजार स्टेशन पर हुआ.

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