वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़ा विधेयक आज यानी मंगलवार को लोकसभा में पेश हो गया है. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को सदन के पटल पर रखा है. इस विधेयक को 'संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024' नाम दिया गया है. सरकार इस बिल को पेश करने के बाद संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेजने की सिफारिश करने जा रही है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन के नेता को अपने विचार रखने का समय मिलेगा.
लोकसभा में डीएमके नेता टीआर बालू ने कहा, यह संविधान संशोधन संघीय व्यवस्था विरोधी है. यह विविधता और लोकतंत्र को खत्म कर देगा. जब सरकार के पास दो तिहाई बहुमत भी नहीं है तो आप अनुमति कैसे देंगे? इस बिल को कैसे अनुमति दी जा सकती है? उसे दो तिहाई बहुमत की जरूरत है. मतदाताओं को सरकार चुनने का अधिकार है. एक साथ चुनाव के जरिये उनके अधिकारों में कटौती नहीं की जा सकती है.
टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने कहा, यह बिल संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर को तोड़ता है. ये बिल संविधान की मूल संरचना पर प्रहार करता है. विधेयक के प्रावधान संविधान के मौजूदा प्रावधानों से असंगत हैं. राज्य विधानमंडल संसद के अधीन नहीं हैं. ये बिल राज्य विधान सभाओं की स्वायत्तता छीन लेगा. राज्य विधान सभा का कार्यकाल सिर्फ केंद्र के कार्यकाल पर निर्भर करता है. यह देश की जनता द्वारा दिया गया जनादेश है. राज्य विधानसभा का कार्यकाल इस सदन के सिद्धांत पर निर्भर करेगा, यह कैसे संभव है. राज्य विधानसभा संसद के अधीन नहीं है. यह संसद कानून बना सकती है, उसी प्रकार राज्य विधानसभा सातवीं अनुसूची के तहत कानून बना सकती है. इससे ईसीआई को अनियंत्रित शक्तियां मिल जाएंगी. ECI सब कुछ तय करेगा. हमारे राज्य विधानमंडल संसद के अधीन नहीं हैं.
कल्याण बनर्जी ने कहा, राज्य विधानसभा का कार्यकाल केवल केंद्र के कार्यकाल पर निर्भर होना कैसे संभव है. यह चुनाव सुधार नहीं है, यह सिर्फ एक व्यक्ति की इच्छा की पूर्ति है. हमारे राज्य विधानमंडल संसद के अधीन नहीं हैं. अब वे इस ढांचे पर प्रहार करना चाहते हैं. मैं इसके बारे में सोच नहीं सकता. ये बिल कोई चुनाव सुधार नहीं है.
इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा, एक तरह से ये संविधान को ख़त्म करने का एक और षड्यंत्र भी है.
वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देश का मुद्दा है. देश देखेगा कि कैसे कांग्रेस हमेशा निगेटिव रहती है. देश आजाद हुआ तो देश में एक देश-एक चुनाव था. लेकिन कांग्रेस ने अपने हिसाब से वो बदल दिया. देश में हमेशा चुनाव ही होते रहते हैं, जिससे देश का काफी नुकसान होता है.
TDP ने भी साफ कर दिया है कि वो एक राष्ट्र एक चुनाव के बिल को पूरा समर्थन करेगी. पार्टी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है. वहीं, YSRCP के सांसद पीवी मिथुन रेड्डी ने कहा, हम पहले से ही आम चुनावों के साथ-साथ राज्य चुनाव भी करा रहे हैं. हमारे पास ज्यादा मुद्दे नहीं हैं. हम बिल का समर्थन करेंगे.
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ये बिल संविधान के खिलाफ है. संविधान के मूलभूत ढांचे के खिलाफ है. हम इस बिल का विरोध करते हैं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ये संविधान बदलने का बिल बिगुल है. सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा, हम इस बिल का विरोध करेंगे. ये बिल संविधान के खिलाफ है.
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ये बिल संविधान के खिलाफ है. ये संविधान पर हमला है. चुनाव की प्रक्रिया के साथ छेड़खानी है. बीजेपी पावर सेंट्रलाइज्ड करना चाहती है. कितना कॉस्ट इफेक्टिव रहेगा, हमें ये पता नहीं है. हम इस बिल का विरोध करेंगे.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, वन नेशन वन इलेक्शन, आज देश की आवश्यकता है. बार-बार होने वाले चुनावों से देश की प्रगति और विकास कार्य प्रभावित होते हैं. आजादी के बाद कई वर्षों तक एक साथ लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव होते रहे लेकिन कांग्रेस ने अपने स्वार्थ के लिए विधानसभाओं को भंग करना शुरू कर दिया और देश को बार-बार चुनाव कराने की प्रक्रियाओं में उलझा दिया. कांग्रेस तो संवैधानिक नियमों और प्रक्रियाओं का निरंतर उल्लंघन करती रही है.
एक देश एक चुनाव से जुड़े विधेयक को लेकर बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया था. वहीं, कांग्रेस ने सुबह इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और तीन लाइन की व्हिप जारी किया था. विपक्ष लगातार वन नेशन, वन इलेक्शन का विरोध करता आ रहा है. फिलहाल, लोकसभा में आज की कार्यवाही काफी हंगामेदार रहने वाली है.
देश में एक साथ चुनाव कराए जाने की तैयारी
दरअसल, देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने की तैयारी चल रही है. कानून मंत्री ने संविधान संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक लोकसभा के पटल पर रखा है. संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के लिए प्रावधान है. जबकि केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक में दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों को भी चुनाव चक्र की इस योजना के अनुरूप लाने की तैयारी है. विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा जा सकता है.
विधेयक को जेपीसी को भेजने का अनुरोध करेगी सरकार
लोकसभा के एजेंडे में कहा गया है कि संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किया जाएगा. ये विधेयक 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के नाम से चर्चित है. इसके पेश होने के बाद मेघवाल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का अनुरोध करेंगे.
क्या है आगे की प्रोसेस?
सबसे पहले जेपीसी की कमेटी का गठन किया जाएगा. संयुक्त पैनल का गठन विभिन्न दलों के सांसदों की संख्या के आनुपातिक आधार पर किया जाता है. चूंकि, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. ऐसे में कई सदस्यों के अलावा कमेटी की अध्यक्षता भी बीजेपी सांसद को मिलने की संभावना है. जेपीसी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी और सुझाव लेगी. इस प्रस्ताव पर सामूहिक सहमति की जरूरत पर जोर देगी. उसके बाद JPC अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपेगी. अगर जेपीसी ने हरी झंडी दे दी तो यह विधेयक संसद में लाया जाएगा. संसद के दोनों सदनों से विधेयक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करते ही ये बिल कानून बन जाएगा. अगर ऐसा होता है तो देशभर में एक साथ चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो जाएगा.
कानून मंत्री मेघवाल ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 भी लोकसभा में पेश किया है. इसके तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, पुडुचेरी और एनसीटी दिल्ली के चुनाव एक साथ कराए जाने की योजना है.
वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को कमेटी बनाई गई थी. इस कमेटी के गृह मंत्री अमित शाह भी सदस्य थे. कमेटी ने चरणबद्ध तरीके से लोकसभा, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की है. आज विधेयक की शुरुआत के समय अमित शाह के भी निचले सदन में उपस्थित रहने की संभावना है.
इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का फैसला किया और कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी. हालांकि, स्थानीय निकाय चुनाव कैसे होंगे, इस पर अभी फैसला नहीं लिया है.
मेघवाल निचले सदन को बता सकते हैं कि चूंकि विधेयक को कानून निर्माताओं और जनता के साथ व्यापक परामर्श की जरूरत होगी, इसलिए इसे एक संयुक्त समिति को भेजा जाना चाहिए. स्पीकर उसी दिन पार्टियों से प्रस्तावित पैनल के लिए सदस्यों के नाम मांगेंगे. पार्टियों को पैनल के लिए नामों की जानकारी देना जरूरी होगा.
स्पीकर विधेयक पेश होने के दिन शाम तक जेपीसी का ऐलान करेंगे. शुरुआत में प्रस्तावित समिति का कार्यकाल 90 दिनों का होगा, लेकिन बाद में इसे बढ़ाया जा सकता है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए दो विधेयकों को मंजूरी दे दी है.
रामनाथ कोविंद कमेटी ने एक राष्ट्र, एक चुनाव पर परामर्श प्रक्रिया के दौरान कहा था कि 32 दलों ने इस विचार का समर्थन किया, जबकि 15 ने नहीं किया. 1951 से 1967 के बीच देश में एक साथ चुनाव हुए. एक साथ चुनाव की अवधारणा 1983 के बाद से कई रिपोर्टों और अध्ययनों में सामने आई है. केंद्र ने कोविंद कमेटी की रिपोर्ट में सुझावों को स्वीकार कर लिया है और 'एक राष्ट्र एक चुनाव' विधेयक को दो चरणों में लागू करने का फैसला किया है. पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे. जबकि दूसरे चरण में आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) होंगे.
बीजेपी ने जारी किया व्हिप
बीजेपी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को 17 दिसंबर 2024 को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है. पार्टी ने कहा है कि इस दिन संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा होगी.
कांग्रेस ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग
कांग्रेस ने CPP (कांग्रेस संसदीय दल) कार्यालय में वन नेशन वन इलेक्शन पर चर्चा के लिए आज सुबह 10.30 बजे एक जरूरी बैठक बुलाई है. सभी कांग्रेस लोकसभा सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया गया है, जिसमें आज की महत्वपूर्ण कार्यवाही के लिए सदन में उपस्थिति अनिवार्य की गई है.
बताते चलें कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन समेत कई विपक्षी नेताओं ने देश में एक साथ चुनाव कराने के विचार का विरोध किया है और इस विधेयक को लोकतंत्र विरोधी और देश के लोकतंत्र को कमजोर करने वाला कदम बताया है.
अखिलेश यादव ने क्या कहा...
कन्नौज से सपा सांसद अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट लिखा और कहा, ‘एक देश-एक चुनाव’ के संदर्भ में जन-जागरण के लिए आपसे कुछ जरूरी बातें साझा कर रहा हूं. इन सब बिंदुओं को ध्यान से पढ़िएगा क्योंकि इनका बहुत गहरा संबंध हमारे देश, प्रदेश, समाज, परिवार और हर एक व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य से है. लोकतांत्रिक संदर्भों में ‘एक’ शब्द ही अलोकतांत्रिक है. लोकतंत्र बहुलता का पक्षधर होता है. ‘एक’ की भावना में दूसरे के लिए स्थान नहीं होता, जिससे सामाजिक सहनशीलता का हनन होता है. व्यक्तिगत स्तर पर ‘एक’ का भाव, अहंकार को जन्म देता है और सत्ता को तानाशाही बना देता है. ‘एक देश-एक चुनाव’ का फ़ैसला सच्चे लोकतंत्र के लिए घातक साबित होगा. ये देश के संघीय ढांचे पर भी एक बड़ी चोट करेगा. इससे क्षेत्रीय मुद्दों का महत्व ख़त्म हो जाएगा और जनता उन बड़े दिखावटी मुद्दों के मायाजाल मे फंसकर रह जाएगी, जिन तक उनकी पहुंच ही नहीं है.
उन्होंने कहा, हमारे देश में जब राज्य बनाए गये तो ये माना गया कि एक तरह की भौगोलिक, भाषाई व उप सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के क्षेत्रों को ‘राज्य’ की एक इकाई के रूप में चिन्हित किया जाए. इसके पीछे की सोच ये थी कि ऐसे क्षेत्रों की समस्याएं और अपेक्षाएं एक सी होती हैं, इसीलिए इन्हें एक मानकर नीचे-से-ऊपर की ओर ग्राम, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा के स्तर तक जन प्रतिनिधि बनाएं जाएं. इसके मूल में स्थानीय से लेकर क्षेत्रीय सरोकार सबसे ऊपर थे. ‘एक देश-एक चुनाव’ का विचार इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही पलटने का षड्यंत्र है. एक तरह से ये संविधान को ख़त्म करने का एक और षड्यंत्र भी है.
इससे राज्यों का महत्व भी घटेगा और राज्यसभा का भी. कल को ये भाजपावाले राज्यसभा को भी भंग करने की मांग करेंगे और अपनी तानाशाही लाने के लिए नया नारा देंगे ‘एक देश-एक सभा’. जबकि सच्चाई ये है कि हमारे यहां राज्य को मूल मानते हुए ही ‘राज्यसभा’ की निरंतरता का सांविधानिक प्रावधान है. लोकसभा तो पांच वर्ष तक की समयावधि के लिए होती है. ऐसा होने से लोकतंत्र की जगह एकतंत्रीय व्यवस्था जन्म लेगी, जिससे देश तानाशाही की ओर जाएगा. दिखावटी चुनाव केवल सत्ता पाने का ज़रिया बनकर रह जाएगा.
अगर भाजपाइयों को लगता है कि ‘ONE NATION, ONE ELECTION’ अच्छी बात है तो फिर देर किस बात की, केंद्र व सभी राज्यों की सरकारें भंग करके तुरंत चुनाव कराइए. दरअसल ये भी ‘नारी शक्ति वंदन’ की तरह एक जुमला ही है. ये जुमला भाजपा की दो विरोधाभासी बातों से बना है, जिसमें कथनी-करनी का भेद है. भाजपावाले एक तरफ़ ‘एक देश’ की बात तो करते हैं, पर देश की एकता को खंडित कर रहे हैं, बिना एकता के ‘एक देश’ कहना व्यर्थ है; दूसरी तरफ़ ये जब ‘एक चुनाव’ की बात करते हैं तो उसमें भी विरोधाभास है, दरअसल ये ‘एक को चुनने’ की बात करते हैं. जो लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ़ है. क्या ‘एक देश, एक चुनाव’ का मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी, बीमारी से बड़ा मुद्दा है जो भाजपाई इसे उठा रहे हैं. दरअसल भाजपा इन बड़े मुद्दों से ध्यान भटका रही है. जनता सब समझ रही है.
सच तो ये है कि BJP को सोते-जागते सिर्फ़ चुनाव दिखाई देता है, और ये सोचते हैं कि किस तिकड़म से परिणाम इनके पक्ष में दिखाई दे. ये हर बार जुगाड़ से चुनाव जीतते हैं. इसीलिए चाहते हैं कि एक साथ जुगाड़ करें और सत्ता में बने रहें.अगर ‘वन नेशन, वन नेशन’ सिद्धांत के रूप में है तो कृपया स्पष्ट किया जाए कि प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक के सभी ग्राम, टाउन, नगर निकायों के चुनाव भी साथ ही होंगे या फिर त्योहारों और मौसम के बहाने सरकार की हार-जीत की व्यवस्था बनाने के लिए अपनी सुविधानुसार?
भाजपा जब बीच में किसी राज्य की चयनित सरकार गिरवाएगी तो क्या पूरे देश के चुनाव फिर से होंगे? किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर क्या जनता की चुनी सरकार को वापस आने के लिए अगले आम चुनावों तक का इंतज़ार करना पड़ेगा या फिर पूरे देश में फिर से चुनाव होगा? ‘एक देश-एक चुनाव’ को लागू करने के लिए जो सांविधानिक संशोधन करने होंगे उनकी कोई समय सीमा निर्धारित की गयी है या ये भी महिला आरक्षण की तरह भविष्य के ठंडे बस्ते में डालने के लिए उछाला गया एक जुमला भर है? कहीं ‘एक देश-एक चुनाव’ की ये योजना चुनावों का निजीकरण करके परिणाम बदलने की साज़िश तो नहीं है? ऐसी आशंका इसलिए जन्म ले रही है क्योंकि कल को सरकार ये कहेगी कि इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराने के लिए उसके पास मानवीय व अन्य ज़रूरी संसाधन ही नहीं हैं, इसीलिए हम चुनाव कराने का काम भी (अपने लोगों को) ठेके पर दे रहे हैं.
जनता का सुझाव है कि भाजपा सबसे पहले अपनी पार्टी के अंदर ज़िले-नगर, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के चुनावों को एक साथ करके दिखाए फिर पूरे देश की बात करे. आशा है देश-प्रदेश की जागरुक जनता, पत्रकार बंधु और लोकतंत्र के पक्षधर सभी दलों के कार्यकर्ता, पदाधिकारी व नेतागण ये बातें स्थानीय स्तर पर अपनी-अपनी भाषा-बोली में हर गाँव, गली, मोहल्लों में जाकर आम जनता को बताएंगे और उन्हें समझाएंगे कि ‘एक देश, एक चुनाव’ किस तरह पहले तानाशाही को जन्म देगा और फिर उनके हक़ और अधिकार को मारेगा, आरक्षण को ख़त्म करेगा और फिर एक दिन संविधान को भी और आख़िर में चुनाव को भी. चेत जाइए, भविष्य बचाइए.