scorecardresearch
 

One Nation-One Election पर कोविंद कमेटी ने राष्ट्रपति को सौंपी 18626 पेज की रिपोर्ट

एक देश एक चुनाव को लेकर बनाई गई उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कौ सैंप दी है. 18 हजार से ज्यादा पेज की इस रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद 100 दिनों के अंदर निकाय चुनाव भी करा लिए जाएं.

Advertisement
X
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अध्यक्षता में 'एक देश-एक चुनाव' को लेकर उच्च स्तरीय समिति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपी. 18,626 पेजों की इस रिपोर्ट के लिए 2 सितंबर 2023 को एक समिति का गठन किया गया था, जिसने 191 दिनों तक एक्सपर्ट के साथ चर्चा करने के बाद रिपोर्ट जमा की है.

Advertisement

प्रस्तावित रिपोर्ट में लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए एकल यानी साझा मतदाता सूची तैयार करने की बात कही गई है. बता दें कि अभी लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए अलग मतदाता सूची तैयार की जाती है. वहीं, स्थानीय नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में मतदाता सूची जारी होती है.

इस रिपोर्ट के पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बारे में बताया गया है. दूसरे चरण में नगर पालिकाओं और पंचायतों को लोकसभा-विधानसभा के साथ इस तरह जोड़ने के लिए कहा गया है कि निकायों के चुनावों को लोकसभा और विधानसभा चुनाव के 100 दिनों के अंदर करा लिया जाए.

रिपोर्ट में दी गई यह सलाह

1. लोकसभा और राज्य विधान सभाओं के आम चुनावों के साथ-साथ पंचायतों और नगर पालिकाओं में चुनाव कराने के लिए अनुच्छेद 324A की शुरुआत की जाए.

Advertisement

2. एकल मतदाता सूची और एकल मतदाता फोटो पहचान पत्र को सक्षम करने के लिए अनुच्छेद 325 में संशोधन किया जाए

3. सूची और पहचान पत्र में संशोधन का काम राज्य चुनाव आयोग की सलाह पर भारत का चुनाव आयोग करे.

पहले एक साथ ही होते थे चुनाव

बता दें कि एक देश-एक चुनाव का सीधा सा मतलब है कि देश में होने वाले सारे चुनाव एक साथ करा लिए जाएं. दरअसल, आजादी के बाद कुछ सालों तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ ही होते थे. लेकिन बाद में समय से पहले विधानसभा भंग होने और सरकार गिरने के कारण ये परंपरा टूट गई.

यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट

एक देश-एक चुनाव के क्या हैं लाभ?

पैसों की बर्बादी से बचना: इसके पक्ष में कहा जाता है कि एक देश-एक चुनाव बिल लागू होने से देश में हर साल होने वाले चुनावों पर खर्च होने वाली भारी धनराशि बच जाएगी. बता दें कि 1951-1952 लोकसभा चुनाव में 11 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2019 लोकसभा चुनाव में 60 हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि खर्च हुई थी. पीएम मोदी कह चुके हैं कि इससे देश के संसाधन बचेंगे और विकास की गति धीमी नहीं पड़ेगी.

बार-बार चुनाव कराने के झंझट से छुटकारा: एक देश- एक चुनाव के समर्थन के पीछे एक तर्क ये भी है कि भारत जैसे विशाल देश में हर साल कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं. इन चुनावों के आयोजन में पूरी की पूरी स्टेट मशीनरी और संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यह बिल लागू होने से चुनावों की बार-बार की तैयारी से छुटकारा मिल जाएगा. पूरे देश में चुनावों के लिए एक ही वोटर लिस्ट होगी, जिससे सरकार के विकास कार्यों में रुकावट नहीं आएगी.

Advertisement

काले धन पर लगेगी लगा: मएक देश-एक चुनाव के पक्ष में एक तर्क यह भी है कि इससे कालेधन और भ्रष्टाचार पर रोक लगने में मदद मिलेगी. चुनावों के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर ब्लैक मनी के इस्तेमाल का आरोप लगता रहा है. लेकिन कहा जा रहा है कि यह बिल लागू होने से इस समस्या से बहुत हद तक छुटकारा मिलेगा.

Live TV

Advertisement
Advertisement