ओडिशा में नक्सली गतिविधियों में पिछले कुछ सालों में भारी गिरावट आई है और अब राज्य में केवल 60-70 नक्सली ही सक्रिय हैं. इनमें से केवल सात नक्सली ओडिशा के निवासी हैं, लेकिन वो किसी भी नेतृत्वकारी भूमिका में नहीं हैं. इस बात की जानकारी बीएसएफ के फ्रंटियर मुख्यालय (विशेष अभियान) के आईजी सीडी अग्रवाल ने शनिवार को दी है.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएफ स्थापना दिवस (1 दिसंबर) के पूर्व आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि सक्रिय नक्सलियों में अधिकांश पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से हैं.
ओडिशा में बचे हैं अब बस 60-70 नक्सली: बीएसएफ
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, ओडिशा के सात जिले - कालाहांडी, कंधमाल, बलांगीर, मलकानगिरी, नबरंगपुर, नुआपाड़ा और रायगड़ा - वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. हालांकि, नक्सली गतिविधियां मुख्य रूप से कालाहांडी-कंधमाल-बौध-नयागढ़ (केकेबीएन) क्षेत्र तक ही सीमित हैं.
अग्रवाल ने बताया, 'ओडिशा में बीएसएफ की तैनाती 2010 में हुई थी, जब नक्सली हिंसा चरम पर थी. बीएसएफ ने कठिन इलाकों में अभियान चलाकर 250-300 नक्सलियों को निष्क्रिय किया, हथियार और विस्फोटक जब्त किए और कई कट्टरपंथियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया.'
2024 में मारे जा चुके हैं तीन बड़े नक्सली
बीएसएफ की कार्रवाई में 2024 में अब तक तीन कुख्यात नक्सली मारे गए हैं जबकि 24 ने आत्मसमर्पण किया है और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया है.
अधिकरी ने कहा, 'नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सबसे बड़ी उपलब्धि स्वाभिमान अंचल क्षेत्र को बदलना है. बीएसएफ ने ओडिशा पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय कर ड्रोन और उपग्रह निगरानी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर नक्सलियों को 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा है.'
2010 से अब तक नक्सलियों से लड़ते हुए 14 बीएसएफ जवानों ने अपनी जान गंवाई है. बीएसएफ का लक्ष्य केवल माओवादी खतरे को खत्म करना नहीं बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में विकास और विश्वास बहाल करना भी है.