सुप्रीम कोर्ट ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के तहत रिटायर्ड स्थायी कैप्टनों की पेंशन मामले में केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है.कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 5 लाख का जुर्माना लगाते हुए 4 हफ्ते में जुर्माने की राशि को जमा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि 14 नवंबर तक अगर इस मामले पर फैसला नहीं लिया गया तो वह सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों की 10 फीसदी पेंशन बढ़ाने का निर्देश देंगे. इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को तय की गई है.
ओआरओपी योजना 2015 में केंद्र द्वारा शुरू की गई थी. इस योजना के तहत, पहले रिटायर्ड हुए सैनिकों की पेंशन की दर सशस्त्र बलों के वर्तमान सेवानिवृत्त लोगों के बराबर तय की गई थी. कोर्ट ने कहा कि साल 2021 में ये मामला सामने आया था लेकिन अब तक इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया. ये हैरानी वाली बात है.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि इस मामले पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है. इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम 10 लाख का जुर्माना लगा रहे हैं. लेकिन इसपर जस्टिस संजीव खन्ना ने केंद्र सरकार के वकील ए एसजी ऐश्वर्या भाटी से कहा कि आप 5 लाख का भुगतान करें. अगर सरकार कोई निर्णय नहीं ले रही है, तो मैं कुछ नहीं कर सकता. इससे इन अधिकारियों को कोई राहत नहीं मिलती.
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पूछा-कितने सालों तक ऐसा ही चलेगा
जस्टिस खन्ना ने पूछा कि कितने साल तक ऐसा ही चलता रहेगा? वे रिटायर कैप्टन हैं. उनकी कोई बात नहीं सुनता है. उनकी सरकार तक पहुंच नहीं है इसलिए इन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है. या तो सरकार 10% अधिक भुगतान करना शुरू करे या जितना बनता है उतना भुगतान करें. आप अपना विकल्प चुनें. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया है.
दरअसल, अदालत ने कुछ साल पहले वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना के अनुसार सेना से सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों को बकाया भुगतान करने के लिए कहा था. मगर बकाया पेंशन पर वर्षों तक कोई फैसला नहीं लेने पर शीर्ष अदालत ने आज केंद्र को कड़ी फटकार लगाई.