राज्यसभा में सोमवार को बजट पर चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने अमेरिका से भारतीयों के डिपोर्टेशन का मुद्दा उठाया. पी चिदंबरम ने एलन मस्क का भी जिक्र किया और डिपोर्टेशन को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर पर कई सवाल दागे. उन्होंने ये भी कहा कि विदेश मंत्री यहां खड़े होकर अमेरिकी एसओपी का बचाव कर रहे थे.
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने चिदंबरम पर पलटवार करते हुए कहा कि ये नींद से 2009 में नहीं जागे, 2012 में नहीं जागे, 2013 में नहीं जागे. जागे तो 2025 में जागे. ये सत्ता में हों तो अमावस का चांद बन जाते हैं और वहां हैं तो अपनी पूरी चांदनी दिखाने की कोशिश करते हैं. तब आपने क्यों आपत्ति नहीं की.
दरअसल, पी चिदंबरम ने बजट पर चर्चा के दौरान अमेरिका से भारतीयों के डिपोर्टेशन को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर को जमकर घेरा. उन्होंने सवाल किया कि क्या विदेश मंत्री ने अपनी अमेरिकी समकक्ष के सामने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया, नहीं कराया तो क्यों. पी चिदंबरम ने कहा विदेश मंत्री यहां सदन में खड़े होकर अमेरिकी एसओपी का बचाव कर रहे थे. क्या विदेश मंत्री ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात कर ये ऑफर किया कि हम अपना विमान भेज रहे हैं?
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उन्होंने बजट पर बोलते हुए कहा कि इसमें मध्यम वर्ग को टैक्स से राहत मिली है, इसका स्वागत करता हूं. इस बजट में अमीर और अमीरतम के लिए भी बहुत कुछ है. चिदंबरम ने 12 लाख तक की आय को करमुक्त किए जाने के कारण जनता ने एक लाख करोड़ रुपये बचने और ये पैसा उपभोग में इस्तेमाल होने के दावे, इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को बूम मिलने के दावे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री किस तरह से ये दावा कर सकती हैं कि ये एक लाख करोड़ रुपये सारा का सारा उपभोग पर ही खर्च होगा.
चिदंबरम का सवाल- क्या 0.34 परसेंट इकोनॉमी को बूम कर देगा?
पी चिदंबरम ने कहा कि जीडीपी की साइज के हिसाब से देखें तो ये एक लाख करोड़ 0.34 फीसदी है. आप क्या ये कहना चाहते हो कि 0.34 परसेंट इकोनॉमी को बूम कर देगा? वित्त मंत्री ने मध्यम वर्ग को याद रखा, इसके लिए उनको बधाई. 12 साल में शिक्षा से लेकर भोजन तक, उन्होंने महंगाई की दरें गिनाते हुए सरकार को घेरा और कहा कि औसत मासिक पर कैपिटा खर्च के आंकड़े गिनाए. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि इनकम टैक्स के साथ ही जीएसटी में कट करना चाहिए, पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कट करना चाहिए, मनरेगा की मजदूरी बढ़ानी चाहिए, न्यूनतम मजदूरी बढ़ानी चाहिए. इससे बड़ी आबादी को लाभ होता. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया और इनकम टैक्स पर फोकस किया, दिल्ली चुनाव पर फोकस किया.
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उन्होंने कहा कि बेरोजगारी को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि पीएलएफएस के मुताबिक बेरोजगारी की दर 3.2 परसेंट है. आर्थिक सर्वे में भी यही कहा गया है. हमें यही पढ़ाया जाता है कि 5 परसेंट से कम है तो वह पूर्ण रोजगार के बराबर है. फिर हम इतने चिंतित क्यों हैं. पी चिदंबरम ने यूथ और ग्रेजुएट्स एम्प्लॉयमेंट रेट का जिक्र कर भी सरकार को घेरा और कहा कि बजट में आठ लाइन रोजगार उत्पन्न करने को लेकर है. पीएम न्यू एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम, न्यू एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम है. उन्होंने मजदूरी में आई गिरावट को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि आय में कमी आई है. इस बजट में नीचे के 50 फीसदी के लिए कुछ नहीं है.
कैपिटल एक्सपेंडिचर में कटौती गलत प्रैक्टिस- चिदंबरम
मेक इन इंडिया को लेकर चिदंबरम ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग ट्रेड में भारत इतना बड़ा प्लेयर नहीं हैं. उन्होंने आंकड़े बताते हुए कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग इस सरकार में बढ़ नहीं सका. फिस्कल डेफिसिट में कमी के दावे पर पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्री ने रेवेन्यू नहीं, कैपिटल एक्सपेंडिचर में कटौती की. केंद्र और राज्य सरकारों ने कैपिटल एक्सपेंडिचर में 1 लाख 83 हजार करोड़ कटौती की है. इससे 44 हजार करोड़ की बचत हुई है. ये गलत प्रैक्टिस है. स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण, कृषि, ग्रामीण विकास के बजट में की गई कटौती के आंकड़े गिनाते हुए पी चिदंबरम ने योजनाओं के नाम भी गिनाए. उन्होंने डॉक्टर मनमोहन सिंह के लिए भारत रत्न की मांग भी की.