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मशहूर चित्रकार लक्ष्मण पाई का निधन, गोवा को आजाद कराने के लिए गए थे जेल

मशहूर चित्रकार लक्ष्मण पाई, ललित कला राष्ट्रीय पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता भी थे. उन्हें गोवा सरकार द्वारा साल 1987 में नेहरू पुरस्कार और साल 2016 में गोमंत विभूषण से सम्मानित किया गया था. उन्हें भारत सरकार ने भी साल 1985 में पद्म श्री और 2018 में पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया था.

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पद्म भूषण और चित्रकार लक्ष्मण पाई का निधन हो गया (फोटो-ANI)
पद्म भूषण और चित्रकार लक्ष्मण पाई का निधन हो गया (फोटो-ANI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पद्म भूषण और पदम श्री सम्मान से थे सम्मानित
  • गोवा में 95 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
  • पुर्तगालियों के खिलाफ सत्याग्रह में लिया था भाग

गोवा के सुप्रसिद्ध चित्रकार और पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित लक्ष्मण पाई ने रविवार के दिन अपनी अंतिम सांस ले ली. उनकी उम्र करीब 95 साल थी. गोवा कॉलेज ऑफ आर्ट के पूर्व प्रिंसिपल रहे लक्ष्मण पाई कई अवॉर्डों से सम्मानित रहे हैं. उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण से लेकर नेहरु अवार्ड और ललित कला अकादमी सरीखे अवार्ड मिल चुके हैं. उनकी मृत्यु पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ट्वीट करते हुए दुःख प्रकट किया है.

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उन्होंने लिखा है कि ''गोवा के प्रसिद्द कलाकार और पदम भूषण अवॉर्डी लक्ष्मण पाई के निधन से गहरा दुःख पहुंचा है. गोवा ने एक आज एक रत्न खो दिया है. कला के क्षेत्र में उनके योगदान को हम हमेशा याद रखेंगे. उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं. ॐ शांति''

लक्ष्मण पाई का जन्म मारगाओ (Margao) में साल 1926 में हुआ था. अपने जीवन की शुरुआत में ही उनका ध्यान फाइन आर्ट की तरफ होने लगा था. उन्हें अपने चाचा के फोटो स्टूडियो से तभी से ही शुरुआती शिक्षा मिलने लगी थी जब वे मात्र 11 साल के थे. उन्होंने गोवा में पुर्तगालियों के खिलाफ हुए सत्याग्रह में भी भाग लिया था. इसके लिए वे पीटे भी गए और जेल भी भेजे गए.

चित्रकार लक्ष्मण पाई और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु (फोटो-laxmanpai.com)
चित्रकार लक्ष्मण पाई और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु (फोटो-laxmanpai.com)

मुंबई आने पर उन्होंने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से अपनी पढ़ाई पूरी की. यहीं पर उन्हें मेयो पदक मिला था. उन्होंने फ्रांस की राजधानी पेरिस में भी भी एक लंबा समय व्यतीत किया था. लेकिन मातृभूमि से अत्यधिक प्रेम होने के कारण वे गोवा वापस लौट आए. जहां वे गोवा कॉलेज ऑफ आर्ट में 1977 से 1987 तक प्रिंसिपल रहे. उन्होंने रामायण, गीत-गोविन्द जैसे प्राचीन ग्रंथों से प्रेरणा लेते हुए खूब चित्रकारी की है.

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वे ललित कला राष्ट्रीय पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता हैं. उन्हें गोवा सरकार द्वारा साल 1987 में नेहरू पुरस्कार और साल 2016 में गोमंत विभूषण से सम्मानित किया गया था. उन्हें भारत सरकार द्वारा साल 1985 में पद्म श्री और 2018 में पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया था.

 

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