संसद के चालू बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही चल रही है. लोकसभा से एक दिन पहले ही वित्त विधेयक पारित हुआ था. आज सदन में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल सहकारिता अमित शाह ने पेश किया जिस पर चर्चा जारी है. वहीं, राज्यसभा में राज्यसभा में बैंकिंग कानूनों में संशोधन के बिल पर चर्चा हो रही है.
राज्यसभा से बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक पारित हो गया है. राज्यसभा ने संशोधनों के साथ इस बिल को पारित कर दिया और इसके बाद आसन से डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने सदन की कार्यवाही 27 मार्च, गुरुवार दिन में 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
लोकसभा से त्रिभुवन सहकारिता यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल पारित हो गया है. एनके प्रेमचंद्रन, के राधाकृष्णन, सौगत राय, अभय कुमार सिन्हा समेत विपक्ष के सदस्यों की ओर से मूव किए गए संशोधन ध्वनिमत से गिर गए. .यह विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार, 26 मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
अमित शाह ने कहा कि भारत ब्रांड प्रोडक्ट्स के लिए 20 फीसदी ही सहकारी समिति के खाते में जाता है. 80 फीसदी किसान के खाते में भेज दिया जाता है. एनसीडीसी 2020-21 में 25 हजार करोड़ का टर्नओवर था. अब तक 1 लाख 28 हजार करोड़ पहुंच गया है. इसका शुद्ध मुनाफा भी बढ़ा है और एनपीए जीरो पैसा है. छोटा किसान प्रमाणिक व्यक्ति है. वह ऋण लेता है तो चुकाता भी है और सूद भी देता है. उन्होंने एनसीडीसी की ओर से मछुआरों, सहकारी चीनी मिल को दिए ऋण के आंकड़े भी सदन में गिनाए और कहा कि मुनाफा 800 करोड़ तक पहुंच गया है. सहकारी क्षेत्र में कई सारे बदलाव किए गए. गुजरात के पंचनाल और बनासकांठा जिले में ये किया है कि हर सहकारी समिति का अकाउंट सहकारी बैंक में होगा. सदस्यों के खाते भी सहकारी बैंक में होगा और मैंने अपना अकाउंट भी सहकारी बैंक में कर लिया है. इससे सहकारी बैंकों में डिपॉजिट बढ़ा है. अमित शाह ने ब्रांच खोलने से लेकर डोर स्टेप बैंकिंग, वन टाइम सेटलमेंट तक, नियमों में बदलाव कर उपलब्ध कराई गई सुविधाएं भी गिनाईं और कहा कि नॉन शेड्यूल बैंकों के लिए ढेर सारे काम किए गए जिससे वे मजबूत हों. एक अंब्रेला संगठन भी बनाया गया है जो कमजोर पड़ने वाले सहकारी बैंक को मदद कर बंद होने से बचाया गया. सहकारी चीनी मिलों की इनकम टैक्स की समस्या कभी समाप्त नहीं होती थी. हमने इस समस्या को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया और हर साल आठ हजार करोड़ की नई डिमांड जेनरेट हो रही है. सहकारी चीनी मिल की एथेनॉल ब्लेंडिंग में जिम्मेदारी तय की गई. मल्टी फीड संयंत्र में परिवर्तित करने की हमने योजना तय की.
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र पैक्स बनाए. पीएम जन औषधि केंद्र बनाने का भी मौका हमने पैक्स दिया. 400 पैक्स अपना पेट्रोल पंप बना दिए हैं. गैस एजेंसी के लिए कई सारे पैक्स ने आवेदन कर दिए हैं. भंडारण का काम प्राइवेट हाथों में चला गया था, पैक्स के जरिये भंडारण का काम किया जा रहा है. ये सब काम करने के लिए भारत सरकार ने 2516 करोड़ के खर्च से कम्प्यूटर, सॉफ्टवेयर भी दिए हैं. दो तिहाई पैक्स लाइव हो गए हैं. इनका सारा कारोबार ऑनलाइन होता है. दो लाख बहुउद्देश्यीय पैक्स बनाने के लिए राज्यों को जिम्मेदारी दे दी गई है, गांव भी चिह्नित कर लिए गए हैं. जब पैक्स हर पंचायत में पहुंचेगा तो फिर एकबार सहकारी आंदोलन खड़ा होगा. पैक्स को हर गांव में पहुंचाने का काम हम जब दूसरी बार जनादेश के लिए जनता के बीच जाएंगे, उसके पहले समाप्त हो जाएगा. कांग्रेस के शासन में पैक्स पर आयकर में बड़ा अन्याय होता था. हमने अधिभार और मैट में कटौती की और दो लाख से कम लेनदेन पर आयकर जुर्माने से छूट दी गई. पैक्स और बाकी लोगों के लविए नगदी जमा करने का काम 20 हजार से बढ़ाकर दो लाख कर दी गई और तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समिति बनाने का काम हमने किया. राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड से आठ हजार पैक्स जुड़ चुके हैं. इसके माध्यम से 12 लाख टन से अधिक उत्पादन निर्यात कर मुनाफा सीधे किसान के खाते में पहुंचाने का काम हमने किया है. उन्होंने भारत ब्रांड के प्रोडक्ट बेचने वाली सहकारी समिति के गठन की भी जानकारी दी और कहा कि हजारों किसान बीबीएसएल के माध्यम से अपने प्रोडक्ट बेच रहे हैं जो भारत ब्रांड के साथ जाते हैं. भारतीय जैविक सहकारी बीज लिमिटेड से बीज का संरक्षण कर रहे हैं. हाईब्रिड बीज के उत्पादन के लिए ढाई एकड़ के किसान को भी हमने जोड़ा. पूरा देश जानता है कि अनाज उगाने से अधिक ढाई गुना मुनाफा बीज की खेती करने में है. लेकिन छोटा किसान नहीं कर पाता है.
अमित शाह ने कहा कि गरीब को अब आगे बढ़ना है, कुछ उद्यम करना है, देश के विकास में योगदान देना है लेकिन उसके पास पूंजी नहीं है. इसका एक ही रास्ता है सहकारिता. ढेर सारे अर्थशास्त्रियों के हिसाब से देश के अर्थतंत्र का एक बहुत बड़ा मानक जीडीपी है. भारत जैसे विशाल देश में जीडीपी के साथ-साथ रोजगार भी बड़ा माध्यम है. सहकारिता ऐसा क्षेत्र है जो स्वरोजगार से भी जोड़ता है और अपने सम्मान की भी रक्षा करता है. देश के उद्यमी ये मांग करते थे कि कोऑपरेटिव मंत्रालय होना चाहिए लेकिन कोई नहीं सुनता था. मोदी जी ने साढ़े तीन साल पहले ये मंत्रालय भी बना दिया. देश में साढ़े आठ लाख सहकारी समितियां हैं. देश का हर पांचवां व्यक्ति सहकारिता से जुड़ा है. साढ़े तीन साल के अंदर कोऑपरेटिव मंत्रालय ने ढेर सारा काम किया है. 75 साल से चलता आ रहा सहकारिता आंदोलन देशभर में असमान चल रहा था. इसमें विसंगतियां भी आईं. गैप ढूंढने के लिए डेटाबेस ही नहीं था. ढाई साल में राज्य सरकारों के सहयोग से सहकारिता का पूरा डेटाबेस बन चुका है. तय हुआ कि देश में ढाई लाख नए पैक्स बनाए जाएंगे और इसके बाद कोई गांव ऐसा नहीं होगा जहां पैक्स न हो. हमने पैक्स के बाइलॉज बदलने का काम किया. इसके लिए इस सदन में खड़े होकर, फ्लोर पर खड़े होकर सभी राज्यों की सरकारों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं. हमने बाइलॉज बदल कर 25 से ज्यादा आर्थिक कार्यकलाप पैक्स से जोड़ा. कृषि ऋण दे पाएगा, मधुमक्खी उत्पादन कर पाएगा, पैक्स डेयरी भी होगी. पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर भी होगा. इस देश में 43 हजार पैक्स सीएससी बन चुके हैं जिसमें केंद्र और राज्य की 300 से ज्यादा योजनाएं एक क्लिक पर उपलब्ध हैं.
अमित शाह ने कहा कि गैस देने का काम हुआ. पांच लाख तक का दवा का पूरा खर्च माफ कर दिया गया. इनके घर में बिजली पहुंचाने का काम हुआ. आप कह रहे हैं कि 10 ही साल में हुआ. उन्होंने मोदी सरकार के आने से पहले और उसके बाद के आंकड़े बताकर कांग्रेस को घेरा और कहा कि दिल्ली बाकी था, वहां भी कमल खिल गया और गरीब को इलाज की चिंता नहीं है. अब बंगाल बाकी है दादा, वहां भी चुनाव में कमल खिल जाएगा. गरीब को सब मिल तो गया लेकिन सामने बड़ी समस्या आ गई. समस्या ये आई कि पहले इसका जीवन पीढ़ियों तक जिन चीजों के लिए जाता था, उसे मोदी जी ने समाप्त कर दिया. अब वो क्या करे. कोई काम ही नहीं बचा था. वैचारिक गरीबी का नरेंद्र भाई के पास इलाज नहीं है. इसको हम कैसे मिटा सकते हैं.
गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह लोकसभा में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि त्रिभुवन भाई पटेल वह व्यक्ति हैं जिनकी अगुवाई में 250 लीटर से शुरू हुआ सफर आज अमूल के रूप में हमारे सामने है. अमित शाह ने अमूल की नींव पड़ने का किस्सा भी सदन में सुनाया और अमूल के टर्नओवर की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी ने इस सहकारी यूनिवर्सिटी का नाम त्रिभुवन भाई पटेल के नाम पर कर उनको बड़ी श्रद्धांजलि देने का काम किया है. 2014 में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. इस 10 साल के अंदर ही गरीब को घर, शौचालय देने का काम हुआ और पीने का पानी देने का प्रयास हुआ. पांच किलो अनाज मुफ्त में दिया गया.
राज्यसभा में बुधवार को बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने आसन पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पश्चिम बंगाल के लिए अलग रूल है. बंगाल की आवाज को दबाया जा रहा है.
यह भी पढ़ें: 'बंगाल के लिए अलग रूल...', राज्यसभा में TMC सांसद साकेत गोखले ने आसन पर उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान लोन राइट ऑफ का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि खास आदमी और आम आदमी का खेल चल रहा है. आम आदमी लोन नहीं चुका पाता तो रिकवरी एजेंट्स तोड़-फोड़ करते हैं, डराते-धमकाते हैं. लोन राइट ऑफ हुए हैं, आंकड़े वित्त मंत्री के पास होंगे.
लोकसभा में त्रिभुवन सहकारिता यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल पर चर्चा के दौरान पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि डेनमार्क के बाद सबसे अधिक दूध मिथिला-कोसी-सीमांचल में होता है. त्रिभुवन यूनिवर्सिटी की स्थापना गुजरात की जगह पूर्णिया में होनी चाहिए, पटना में होनी चाहिए. वहीं, केरल के आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि त्रिभुवन पटेल का पूरा सम्मान करता हूं लेकिन अगर आप इस यूनिवर्सिटी का नाम उनके नाम रख रहे हैं तो इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आणंद (आईआरएमए) का नामकरण इसके संस्थापक डॉक्टर वर्गीज कूरियन के नाम पर किया जाना चाहिए.
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी बुधवार को सदन में बोलना चाहते थे, लेकिन स्पीकर ने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें शिष्टाचार बनाए रखना चाहिए. स्पीकर का कहना था कि आप सबसे अपेक्षा की जाती है कि सदन की मर्यादा और शालीनता को बनाए रखेंगे.
राघव चड्ढा ने बैंको के माध्यम से डेटा मार्केटिंग का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि हमारे माता-पिता हाल-चाल पूछें या न पूछें लेकिन हर रोज कई कॉल्स आ जाती हैं कि क्रेडिट कार्ड अप्रूव हो गया है, ये लोन अप्रूव हो गया है. ये डेटा उनके पास आता कहां से है. लोगों के डेटा की सुरक्षा भी जरूरी है. उन्होंने बैलेंस चार्ज से लेकर लोन पर प्री क्लोजर चार्ज, नॉमिनी चेंज कराने पर चार्ज का मुद्दा भी उठाया और कहा कि टार्गेट पूरा करने के लिए बैंक गलत प्रोडक्ट्स सेल करते हैं. लोगों को ऐसे प्रोडक्ट बेच दिए जाते हैं जिनकी जरूरत उन्हें हैं ही नहीं. बुनियादी समस्याएं हैं जिनका सामना आम खाताधारक को करना पड़ रहा है. वित्त मंत्री को इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह हिंदी अनुवाद में गलती को लेकर भिड़ गए. कांग्रेस सांसद ने एक प्रश्न के उत्तर के हिंदी अनुवाद में गलती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये गंभीर तथ्यात्मक गलती है.
यह भी पढ़ें: राज्यसभा में हिंदी अनुवाद की गलती पर क्यों भिड़ गए कांग्रेस के सांसद और केंद्रीय मंत्री?
बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने मेहुल चौकसी के देश से भागने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि एक लिखित एफिडेविट के साथ याचिकाकर्ता ने कहा था कि उसने बैंकों को ही नहीं, गरीब लोगों को भी ठगा है. उसने ये भी कहा था कि ये विजय माल्या की तरह भाग जाएगा. ये बात याचिकाकर्ता ने 18 महीने पहले कहा था. बीजेपी की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए उत्तर प्रदेश से बीजेपी के सांसद अरुण सिंह ने यूपीए सरकार के समय एनपीए फ्रॉड से संबंधित आर्टिकल दिखाते हुए अपने समय के स्कैम देखने की नसीहत दी.
भोजनावकाश के बाद लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही फिर से शुरू हो गई है. लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल पर चर्चा शुरू हो गई है. गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ये बिल पेश किया. चर्चा की शुरुआत गुजरात के बनासकांठा से कांग्रेस की सांसद गनीबेन नगाजी ठाकोर ने की है. वहीं, राज्यसभा में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक पर गुजरात से ही कांग्रेस के सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने चर्चा की शुरुआत की है. उन्होंने कहा कि आपने कानून बनाया था कि सहकारी बैंक में डायरेक्टर आठ साल ही पद पर रह सकता है. अब संशोधन क्या ला रहे हैं, यह कि 10 साल डायरेक्टर रह सकता है. शक्ति सिंह गोहिल ने पंचशील मार्केंटिंग कोऑपरेटिव बैंक के डायरेक्टर्स का कार्यकाल आठ साल से ज्यादा हो जाने का मुद्दा आरबीआई तक जाने का उल्लेख किया.
लोकसभा और राज्यसभा, संसद के दोनों ही सदनों में भोजनावकाश हो गया है. दोनों सदनों की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित हो गई है.
सोनिया गांधी ने शून्यकाल के दौरान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना चलाई जा रही है. इस कानून में असंगठित क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को 6 हजार रुपये प्रति बच्चा पोषण के लिए देने का भी प्रावधान है. प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना 2017 में शुरू हुई थी जो इस प्रावधान को ही पूरा करने के लिए थी. लेकिन इस योजना के तहत पहले बच्चे के जन्म पर केवल पांच हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं. दूसरा बच्चा अगर लड़की है तो यही लाभ दिया जा रहा है. 2022-23 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक 68 फीसदी महिलाओं को इस योजना के तहत केवल एक किश्त ही दी गई. इसके अगले ही साल इसमें भारी गिरावट आई और आंकड़ा 12 फीसदी पर आ गया. सोनिया गांधी ने कहा एनएफएसए के तहत पूर्ण मैटरनिटी बेनिफिट्स के लिए 12000 करोड़ रुपये वार्षिक बजट की जरूरत है. यह आश्चर्यजनक है कि बजट में एनएफएसए के तहत मातृ वंदन योजना के लिए आवंटन का आंकड़ा ही नहीं दिया गया है. उन्होंने ये भी कहा कि एनएफएसए के पांच कम्पोनेंट हैं और पीएमएमवीवाई इनमें से एक है. इसके लिए कुल 2521 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है.
यूपी से बीजेपी की राज्यसभा सांसद डॉक्टर संगीता बलवंत ने गाजीपुर में सेना की कैंटीन शुरू करने की मांग उठाई. शून्यकाल के दौरान संगीता बलवंत ने 30026 रिटायर सैनिक, 300 से ज्यादा वीर नारियों और 40 हजार से ज्यादा कार्यरत सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां सीएसडी कैंटीन नहीं है. कैंटीन के नाम पर यहां वाराणसी का एक्सटेंशन काउंटर है. सैनिकों को कैंटीन से सामान लेने और ईसीएचएस की सुविधा के लिए वाराणसी जाना पड़ता है जो सौ किलोमीटर से अधिक दूर है. बुजुर्ग पूर्व सैनिकों और उनके परिवार को इसमें बड़ी दिक्कत आती है और वे सुविधा से वंचित रह जाते हैं. गाजीपुर में में ईसीएचएस और सीएसडी कैंटीन की सुविधा शुरू किए जाने की मांग करती हूं.
फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मध्य प्रदेश में एक ही प्लांट मिला है मेरे क्षेत्र में. इसके काम की गति कितनी है और कब तक पूरा होगा. डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि आर एंड आर को लेकर वहां के लोगों को थोड़ी दिक्कतें हो रही थीं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की टीम बनाई है जो वहां गई थी. कुछ राशि और चाहिए होगी केंद्र से. यह जल्द पूरा किया जाएगा. दूसरा प्लांट शिवपुरी में है जहां पानी की दिक्कत आ रही है. खंडवा का तीसरा प्लांट है और मुझे उम्मीद है कि उसका नाम भी जल्द ही सूची में शामिल हो जाएगा.
राजस्थान में पांच यूनिट पहले थे और एक यूनिट अभी सात सौ मेगावाट की है. क्या सरकार राज्य का हिस्सा बढ़ाएगी और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर क्या असर हुआ है. ये यूरेनियम राजस्थान के सीकर में मिला है तो इसका खनन कब तक शुरू हो जाएगा. इसके जवाब में पीएमओ में राज्य मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि सबसे अधिक संख्या में कहीं रिएक्टर हैं तो राजस्थान में हैं. 25 में से सात राजस्थान में हैं और एक जो फंक्शनल नहीं था, वो भी अब फंक्शनल है. न केवल रिएक्टर्स की संख्या बढ़ी है, बल्कि उन क्षेत्रों में भी स्थापित करने का काम शुरू हुआ है जहां ये पहले नहीं थे. हरियाणा में भी रिएक्टर स्थापित होने वाला है. 2017 की एक ही कैबिनेट मीटिंग में एक साथ 10 रिएक्टर्स की स्थापना को मंजूरी दी थी. इसी बजट में न्यूक्लियर मिशन के लिए भी राशि आवंटित की गई है. परमाणु ऊर्जा का बजट 2014 के पहले कम हुआ करता था और उसके मुकाबले इस बजट में 170 फीसदी का इजाफा हुआ है. इसी बजट में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने का फैसला लिया गया है. 2014 के मुकाबले हमारी कैपेसिटी दोगुने से अधिक बढ़ी है. इस मिशन के दौरान स्मॉल मॉड्यूल रिएक्टर का फैसला लिया गया है. सेफ्टी फर्स्ट, प्रोडक्शन नेक्स्ट हमारा मूल मंत्र है. निर्माण कार्य के दौरान हर तीन महीने बाद, फंक्शनल होने पर हर छह महीने बाद स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है. वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की बात है तो रेडिएशन के इफेक्ट से कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं, उनमें इन इलाकों का औसत राष्ट्रीय एवरेज से काफी कम है. हमारे किसी भी प्लांट में देखें तो इसमें गिरावट आई है. सीकर में यूरेनियम मिलने की बात है तो यह एनवायरनमेंट क्लीयरेंस के चरण में है. हम राजस्थान सरकार के संपर्क में हैं.
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे डॉक्टर देवेंद्र प्रधान के निधन की सूचना दी. लोकसभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान के निधन पर शोक व्यक्त किया गया. सदस्यों ने मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी.
लोकसभा में आज त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल आएगा. गोवा विधानसभा में अनुसूचित जनजाति के लोगों के प्रतिनिधित्व से संबंधित बिल पर भी चर्चा होनी है. हाउसिंग और अर्बन मामलों के साथ ही शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल से संबंधित स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट भी आज लोकसभा में पेश होनी है.