संसद के चालू शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन संविधान सभा की ओर से संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर मनाए जाने वाले संविधान दिवस पर आज संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र आहूत किया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगी. इस मौके पर संविधान के निर्माण और इसकी ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ी शॉर्ट फिल्म भी दिखाई जानी है.
संसद भवन में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संसद भवन से रवाना हो गए हैं.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हो गई हैं. राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देशवासियों से संविधान में बताए गए मूल कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान भी किया.
राष्ट्रपति की अगुवाई में संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया. राष्ट्रपति के साथ ही कार्यक्रम में मंच पर मौजूद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय कक्ष में मोजूद सभी सांसदों ने भी संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया.
राष्ट्रपति ने संविधान दिवस पर देशवासियों को बधाई दी और यह आह्वान भी किया कि सभी देशवासी संविधान में बताए गए मूल कर्तव्यों का पालन करें और देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने में अपना योगदान दें.
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान की भावना के अनुसार विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का दायित्व है कि जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए काम करे. ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम से नए युग की शुरुआत की गई है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता को पारित करके आधुनिक सोच अपनाने का प्रभावशाली परिचय दिया गया है. पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने समाज के कमजोर तबके के विकास के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं. पक्का घर से खाद्य सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं मिलने का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे अनेक प्रयास हमारे संवैधानिक आदर्शों को आगे बढ़ाते हैं. उच्चतम न्यायालय के प्रयासों से न्यायपालिका अनेक प्रयास कर रही है. मूलभूत अधिकारों का दायरा समय के साथ बढ़ता गया है. संविधान में प्रत्येक नागरिक के मूल कर्तव्य का स्पष्ट उल्लेख किया गया है. हमारा संविधान जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे होने पर संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा सबसे पवित्र ग्रंथ है. उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद और प्रारूप निर्माण समिति के अध्यक्ष बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को भी याद किया. राष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों और नेपथ्य में रहकर काम करने वाले अधिकारियों को याद करने का भी है. संविधान सभा के सलाहकार डीएन राव समेत कई अधिकारियों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 26 जनवरी को हम गणतंत्र की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे. ऐसे समारोह हमें भविष्य की योजना बनाने का अवसर प्रदान करते हैं.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संस्कृत भाषा में भारत के संविधान का भी विमोचन किया. राष्ट्रपति ने संविधान का मैथिली भाषा में भी विमोचन किया.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान पर आधारित दो पुस्तकों का विमोचन किया. राष्ट्रपति ने एक पुस्तिका का भी विमोचन किया.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान के 75 साल पूरे होने पर स्मारक सिक्के और डाक टिकट जारी किए.
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अपने संबोधन में आर्थिक प्रगति से लेकर वैश्विक मान्यताओं तक, आजादी के बाद की प्रगति यात्रा का जिक्र किया और संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को भी याद किया. उन्होंने 'हम भारत के लोग' से संविधान की शुरुआत से लेकर संविधान की प्रस्तावना का जिक्र किया और कहा कि समय आ गया है कि हम मूलभूत कर्तव्य का पालन करते हुए राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलें और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें. समतामूलक समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं. लोगों की आकांक्षा पूरी करने में अपना योगदान दें.
संविधान सभा की ओर से संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे होने के मौके पर संविधान के निर्माण और इसकी अब तक की यात्रा पर आधारित शॉर्ट फिल्म दिखाई जा रही है. इस शॉर्ट फिल्म में स्वतंत्रता के समय वैश्विक धारणा से लेकर देश के शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने तक की यात्रा को दर्शाया गया है.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया. स्पीकर ने संविधानसभा में सहमति-असहमति का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपने दोनों सदनों में भी इस तरह की परंपरा स्थापित करनी चाहिए. स्पीकर ने कहा कि साढ़े सात दशकों में संविधान देश की आम जनता के जीवन में परिवर्तन लाने में सफल रहा है. हमारी संविधान में गहरी आस्था है. सभी सांसदों से भी आग्रह करूंगा कि वे अपने-अपने क्षेत्र में इसे लेकर कार्यक्रमों का आयोजन करें.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद भवन पहुंच चुकी हैं. राष्ट्रपति संविधान सभा की ओर से संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे होने पर केंद्रीय कक्ष में आयोजित दोनों सदनों के संयुक्त सेशन को संबोधित करेंगी.
लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने संविधान दिवस की बधाई देते हुए कहा है कि साढ़े सात दशकों में हमारा संविधान सच्चे अर्थों में लोकतांत्रिक संविधान सिद्ध हुआ है.
संसद के चालू शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होगी. दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संबोधित करेंगी. इस आयोजन के साथ ही संविधान सभा की ओर से संविधान को अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरा होने पर सालभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी.