भारतीय जनता पार्टी के सांसद विनय सहस्रबुद्धे की अगुआई वाली संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि स्कूल की किताबों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जिक्र की समीक्षा किए जाने की जरूरत है. विनय सहस्त्रबुद्धे Education, Women, Children, Youth and Sports से संबंधित संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं.
मंगलवार को राज्यसभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में इस समिति का कहना है कि वेदों के प्राचीन ज्ञान को बच्चों के स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए. समिति ने इस बात पर भी जोर दिया है कि पाठ्यक्रम में सिख और मराठा इतिहास (Sikh-Maratha History) का हिस्सा और विस्तृत रूप में जोड़े जाने की जरूरत है. समिति ने सिफारिश में ये भी कहा है कि स्कूल पाठ्यक्रम को ‘पक्षपात मुक्त’ (Free From Biases) किया जाना चाहिए.
स्थानीय हस्तियों का योगदान भी शामिल हो
समिति ने अपनी सिफारिश में ये भी कहा है कि एनसीईआरटी को पाठ्यपुस्तकों के पाठ्यक्रम को तैयार करते समय समिति से मिले सुझावों पर विचार करना चाहिए. इसके अलावा राज्य के विशिष्ट ऐतिहासिक आंकड़ों की पहचान करनी चाहिए. राज्य के पाठ्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में कई स्थानीय हस्तियों के योगदान को शामिल करने और उजागर करने का भी प्रयास किया जा सकता है. एनसीईआरटी और एससीईआरटी को स्कूली पाठ्यक्रम में वेदों और अन्य महान भारतीय ग्रंथों, पुस्तकों से जीवन और समाज के बारे में प्राचीन ज्ञान, शिक्षा को शामिल करना चाहिए. नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में अपनाई गई शैक्षिक पद्धतियों का अध्ययन किया जाना चाहिए.
इसके अलावा समिति की सिफारिश हैं कि दर्शनशास्त्र, विज्ञान, गणित, चिकित्सा, आयुर्वेद, ज्ञानमीमांसा, प्राकृतिक विज्ञान, राजनीति, अर्थव्यवस्था, नैतिकता, भाषाविज्ञान, कला आदि के क्षेत्र में प्राचीन भारत के योगदान को भी पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जा सकता है. पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा जाना चाहिए. एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. इतिहास की शिक्षा के लिए बेहतर शिक्षा शास्त्र के लिए नई तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए.