सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई के दौरान एक नया नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि से पूछा है कि जिन दवाओं का लाइसेंस सस्पेंड किया गया है, उन्हें बाजार से वापस मंगाने का प्लान क्या है? कोर्ट ने नोटिस पर जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है.
पिछले महीने उत्तराखंड के औषधि नियंत्रण विभाग के लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने पतंजलि की दिव्य फार्मेसी कंपनी के 14 प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया था.
योगगुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के एमडी बालकृष्ण के खिलाफ अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच सुनवाई कर रही है. दोनों पर अवमानना का मुकदमा चलेगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को सुरक्षित रख लिया है. वहीं, अगले आदेश तक रामदेव और बालकृष्ण को व्यक्तिगत पेशी से भी छूट मिल गई है.
हलफनामा दायर करेगी पतंजलि
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को कहा है कि जिन दवाओं के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं, उसको दुकान पर बेचने से रोकने और उसको वापस लाने को लेकर उनकी तरफ से क्या कदम उठाए गए हैं? इसे लेकर एक हलफनामा दायर करें.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मकसद बस इतना है कि लोग सतर्क रहें. रामदेव में लोगों की आस्था है. उसे उन्हें सकारात्मक रूप से इस्तेमाल करना चाहिए. दुनियाभर में योग को जो बढ़ावा मिला है, उसमें रामदेव का भी योगदान है.
सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने हल्के-फुल्के अंदाज में रामदेव के वकील मुकुल रोहतगी से कहा कि आपके मुवक्किल को कुछ साल पहले दिल का दौरा पड़ने के कारण एम्स जाना पड़ा था. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कई एलोपैथिक डॉक्टर आयुर्वेदिक दवाओं पर निर्भर हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में सभी राज्य सरकारों से पूछा कि किन-किन राज्यों ने हलफनामा दाखिल किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा की सभी राज्य सरकारें इस बात का ध्यान रखें की अगर शिकायत दर्ज हुई है तो करवाई करें. अगर शिकायत दायर नही हुई है तो भी ये देखें की क्या प्रोडक्ट भ्रामक विज्ञापन वाला है या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा की केवल पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल हुआ है. नगालैंड की तरफ से कल रात हलफनामा दाखिल किया है. कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों की लाइसेंसिंग ऑथोरिटी को जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दियाहै. सुप्रीम कोर्ट चार हफ्ते के बाद सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने कहा कि ये लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है. सरकारों ने भ्रामक विज्ञापन को लेकर क्या कार्रवाई की है, उसे लेकर ब्योरा देना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि FSSAI की तरफ से हलफनामा दाखिल नही हुआ है. कंज्यूमर अफेयर मिनिस्ट्री को एक नया हलफनामा दाखिल करना होगा.
कोर्ट ने FSSAI से भी हलफनामा मांगा है. IMA के अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से एक आखिरी मौका मांगा. सुप्रीम कोर्ट ने अध्यक्ष के वकील से कहा की आपने वो क्यों नही किया जो पतंजलि को तरफ से किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड आयुष विभाग से पूछा हलफनामे में क्या कहा गया?
उत्तराखंड के आयुष विभाग की लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने कार्रवाई करने में काफी देरी कर दी. फरवरी के बाद से केवल एक कार्रवाई हुई. आप ये बताइए की आपने क्या करवाई की. कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप अदालत के साथ खेल खेलना बंद कीजिए. आप 'हॉट एंड कोल्ड' खेलना बंद करें. आप ये नहीं कह सकते है की आप कोर्ट में साफ इरादों से आए हैं. ये हम तय करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए जहा कि बहुत हो गया. हम ऑफिसर स्वास्तिक पर 10 हजार का व्यक्तिगत जुर्माना लगाएंगे. बता दें कि स्वास्तिक ड्रग इंस्पेक्टर हैं.
कोर्ट ने स्वास्तिक को फटकार लगाते हुए कहा कि आप परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाएं. अगस्त से लेकर अब तक आपने क्या किया? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड लाइसेंसिंग ऑथॉरिट को भी हलफनामा दाखिल करने को कहा है.
किन दवाओं पर लगा है बैन?
दिव्य फार्मेसी के जिन प्रोडक्ट्स पर बैन लगा है उनमें श्वासारि गोल्ड, श्वासारि वटी, दिव्य ब्रोंकोम, श्वासारि प्रवाही, श्वासारि अवलेह, मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर, लिपिडोम, बीपी ग्रिट, मधुग्रिट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईग्रिट गोल्ड और पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप शामिल हैं.
उत्तराखंड औषधि नियंत्रण विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक दिव्य फार्मेंसी की ओर से अपने उत्पादों की प्रभावशीलता के बारे में बार-बार भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए लाइसेंस को रोक दिया गया है.