Pegasus spy case: पेगासस जासूसी मामले की आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. यहां सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले की जांच कर रही टेक्निकल कमेटी का कार्यकाल चार हफ्ते बढ़ा दिया है. कमेटी ने खुद जांच के लिए और वक्त मांगा था. फिर सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले की जांच कर रही जस्टिस रवींद्रन समिति का कार्यकाल चार हफ्ते बढ़ा दिया.
पेगासस मामले पर CJI जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच में सुनवाई हुई थी. सुनवाई शुरू हुई तो सीजेआई ने टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट के बारे में बताते हुए कहा कि
कमेटी ने कई टेक्निकल मुद्दों पर जांच की है. जांच पड़ताल के दौरान कमेटी ने 29 उपकरणों और कुछ गवाहों की जांच पड़ताल और पूछताछ की बात कही है.
जांच कमेटी ने कुछ मुद्दों पर जनता की राय भी मांगी थी, जिसमें लोगों ने बड़ी तादाद में अपनी राय भेजी है. लेकिन कुछ विशेषज्ञ एजेंसियों की राय का अभी इंतजार है. अब पीठ ने रिटायर्ड जस्टिस आरवी रवींद्रन की अगुवाई वाली कमेटी को चार हफ्ते में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.
चीफ जस्टिस (CJI) ने कहा कि तकनीकी कमेटी मई अंत तक फाइनल रिपोर्ट तैयार करके जस्टिस रवींद्रन को देगी. इसके बाद अगले एक महीने में यानी 20 जून तक जस्टिस रवींद्रन अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट को सौंप देंगे. सुनवाई जुलाई में होगी.
एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2019 में ही भारत में कम से कम 1400 लोगों के निजी मोबाइल या सिस्टम की जासूसी हुई थी. कहा गया कि इसमें 40 मशहूर पत्रकार, विपक्ष के तीन बड़े नेता, संवैधानिक पद पर आसीन एक महानुभाव, केंद्र सरकार के दो मंत्री, सुरक्षा एजेंसियों के कई आला अफसर, दिग्गज उद्योगपति भी शामिल हैं. काफी हंगामे के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. मांग उठी की इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
क्या है पेगासस
पेगासस एक जासूसी सॉफ्टवेयर का नाम है. इस वजह से इसे स्पाईवेयर भी कहा जाता है. इसे इजरायली सॉफ्टवेयर कंपनी NSO Group ने बनाया है. पेगासस एक जासूसी सॉफ्टवेयर है जो टारगेट के फोन में जाकर डेटा लेकर इसे सेंटर तक पहुंचाता है. इस सॉफ्टवेयर के फोन में जाते ही फोन सर्विलांस डिवाइस के तौर पर काम करने लगता है. इससे एंड्रॉयड और आईओएस दोनों को टारगेट किया जा सकता है.