प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में शुक्रवार को बिम्सटेक समिट से इतर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ द्विपक्षीय बैठक की. पिछले वर्ष अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन और यूनुस के अंतरिम सरकार का प्रमुख बनने के बाद यह पीएम मोदी के साथ उनकी पहली बैठक थी.
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मोहम्मद यूनुस द्वारा अपने हालिया चीन दौरे पर भारत के पूर्वोत्तरी राज्यों को लेकर दिए गए एक बयान से विवाद पैदा हो गया था. उन्होंने बीजिंग में कहा था कि भारत के पूर्वोत्तरी राज्य, जिन्हें 'सेवेन सिस्टर्स' कहा जाता है, लैंडलॉक्ड (चारों ओर से स्थल से घिरा हुआ) हैं और बांग्लादेश इस पूरे क्षेत्र में समुद्र का एक मात्र गार्डियन है.
पीएम मोदी ने मोहम्मद यूनुस को दी नेशनल-डे की बधाई
पीएम मोदी ने यूनुस के साथ बैठक के दौरान उन्हें बांग्लादेश के 'नेशनल डे' (26 मार्च) की बधाई दी, साथ ही भारत विरोधी बयानों को लेकर नसीहत भी दी. भारतीय प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के धार्मिक उत्पीड़न पर चिंता भी जताई. बता दें कि बांग्लादेश 26 मार्च को 'नेशनल डे' के रूप में मनाता है, क्योंकि इसी दिन 1971 में वह पाकिस्तान से आजाद होकर अलग मुल्क बना था.
#WATCH | Bangkok | On PM Modi's meeting with Bangladesh Chief Advisor Muhammad Yunus in Thailand, Foreign Secretary Vikram Misri says, "PM Modi reiterated India's support for democratic, stable, peaceful, progressive and inclusive Bangladesh. He underlined Prof. Yunus India's… pic.twitter.com/7kZiIMIZvP
— ANI (@ANI) April 4, 2025
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसके बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जानकारी दी. उन्होंने कहा, 'मोहम्मद यूनुस के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया. उन्होंने प्रो. यूनुस से कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने की इच्छा रखता है.'
माहौल खराब करने वाली बयानबाजी से बचने की दी सलाह
उन्होंने आगे कहा, 'प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस से यह भी आग्रह किया कि माहौल को खराब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचना चाहिए. पीएम ने प्रो. यूनुस से कहा कि भारत और बांग्लादेश की सीमा पर कानून का सख्त पालन और अवैध घुसपैठ पर रोक सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है. बांग्लादेश में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को भी प्रधानमंत्री मोदी ने यूनुस के समक्ष रखा.' विदेश सचिव मिसरी ने पुष्टि की कि बांग्लादेशी पक्ष द्वारा शेख हसीना का मुद्दा उठाया गया. उन्होंने कहा कि इस समय इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है.
बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित थे. अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं. बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों और कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों के उदय और अंतरिम सरकार के भारत विरोधी रुख के कारण संबंध और खराब हो गए हैं.
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बांग्लादेश ने भारत से किया था द्विपक्षीय बैठक का अनुरोध
मोहम्मद यूनुस ने पिछले सप्ताह चीन की यात्रा के दौरान बांग्लादेश को इस क्षेत्र में 'समुंदर का एकमात्र संरक्षक' बताया था. इसके बाद उन्होंने सुझाव दिया था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य बीजिंग के साथ घनिष्ठ संबंधों से लाभान्वित हो सकते हैं. उनकी टिप्पणी से भारत में काफी हंगामा हुआ, जिसके बाद बांग्लादेशी अधिकारियों को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा. विवाद के बीच ढाका ने नुकसान की भरपाई के लिए नई दिल्ली से संपर्क किया और यूनुस और पीएम मोदी के बीच बिम्सटेक समिट के दौरान बैठक का अनुरोध किया था.