scorecardresearch
 

मटन-मछली और मुगल... तेजस्वी-राहुल पर पीएम मोदी के वार से 'मसालेदार' हुआ चुनाव

भारत एक हिंदू बहुसंख्यक देश है और भारत में शाकाहार के मुकाबले नॉनवेज खाने वाले भी बहुसंख्यक हैं यानी नॉनवेज खाने वालों की संख्या ज्यादा है. 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 57 प्रतिशत पुरुष और 45 फीसदी महिलाएं नॉनवेज खाते हैं. ऐसे में सवाल उठाते हैं कि क्या किसी का मछली खाना राजनीतिक मुद्दा हो सकता है? क्या खाने की आदत से धर्म और इंसान पहचाना जाएगा? क्या हिंदू सिर्फ शाकाहारी होते हैं और जो नॉनवेज खा लेते हैं वो विधर्मी?

Advertisement
X
राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और तेजस्वी यादव
राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और तेजस्वी यादव

यूं तो खाने के कई प्रकार सुने होंगे. भारतीय, मैक्सिकन, थाई, इटैलियन और भी कई सारे. लेकिन देश में इस बार चुनाव भी मसालेदार मुगलई हो चुका है. कारण, राहुल गांधी सावन में मटन बनाते नजर आए थे तो इसके फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे. वहीं अब नवरात्रि के पहले दिन तेजस्वी यादव मछली खान का वीडियो डालते हैं. ऐसे चुनाव मुगलई तब हो गया जब प्रधानमंत्री जम्मू के उधमपुर से सावन और नवरात्रि में मटन-मछली के वीडियो से मुगल सोच के तहत चिढ़ाने का आरोप बिना नाम लिए लालू परिवार और राहुल गांधी पर लगाया.

Advertisement

दरअसल, भारत एक हिंदू बहुसंख्यक देश है और भारत में शाकाहार के मुकाबले नॉनवेज खाने वाले भी बहुसंख्यक हैं यानी नॉनवेज खाने वालों की संख्या ज्यादा है. 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 57 प्रतिशत पुरुष और 45 फीसदी महिलाएं नॉनवेज खाते हैं. ऐसे में सवाल उठाते हैं कि क्या किसी का मछली खाना राजनीतिक मुद्दा हो सकता है? क्या खाने की आदत से धर्म और इंसान पहचाना जाएगा? क्या हिंदू सिर्फ शाकाहारी होते हैं और जो नॉनवेज खा लेते हैं वो विधर्मी? अगर सावन या नवरात्रि में कोई नॉनवेज खाता है तो क्या गलत है? क्या सावन या नवरात्रि में नॉनवेज खाकर वीडियो बनाने या पोस्ट करने से दूसरों की भावना को चोट पहुंचती है और क्या सावन-नवरात्र में किसी के नॉनवेज खाने का वीडियो डालने से अल्पसंख्यक वोटर वोट दे देते हैं? 

Advertisement

जानें क्या है पूरा मामला

इन सारे सवालों की शुरुआत सात महीने पहले होती है. देश में श्रावण मास यानी सावन का महीना चल रहा था. लालू यादव के घर पर मटन बना तो राहुल गांधी सीखते नजर आए. राहुल गांधी के मटन बनाना सीखने वाले वीडियो के बाद अब सात महीने बाद जब चैत्र मास की नवरात्रि का पहला दिन शुरू हुआ तो तेजस्वी यादव द्वारा एक दिन पहले खाई गई मछली का वीडियो पोस्ट करते हैं. अब ऐसे में ये चुनावी मुद्दा बन चुका है और इन वीडियो के जरिए चुनाव में मुगल मानसिकता का जिक्र किया जा रहा है. कारण, सावन में मटन बनाने का वीडियो डालने के 7 महीने बाद और नवरात्रि के दिन मछली का वीडियो पोस्ट करने के 4 दिन बाद बिहार की राजधानी से 1000 किमी दूर उधमपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर वोट मांगते नजर आए.

इन्हें लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने में मजा आता है: PM

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नॉनवेज बनाने और खाने वाले इन वीडियो पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हें लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने में मजा आता है. कोर्ट ने जिसको सजा दी है, जो जमानत पर है, ऐसे मुजरिम के घर जाकर सावन के महीने में मटन बनाने की मौज ले रहे हैं. इतना ही नहीं, उसका वीडियो बनाकर देश के लोगों को चिढ़ाने का काम करते हैं. कानून किसी को खाने से नहीं रोकता, ना ही मोदी रोकता है. सबको स्वतंत्रता है कि जब मन करे वेज खाएं या नॉनवेज खाएं. 

Advertisement

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जब मुगल आक्रमण करते थे, सत्ता राजा को पराजित करने से संतोष नहीं होता था. जब तक मंदिर तोड़ते नहीं थे, उनको संतोष नहीं होता था. उनको मजा आता था. सावन के महीने में वीडियो दिखाकर मुगल के जमाने की मानसिकता है ना, उसके द्वारा वो चिढ़ाना चाहते हैं. अपनी वोट बैंक पक्की करना चाहते हैं. आप किसे चिढ़ाना चाहते हैं? नवरात्रि के दिनों में अपका नॉनवेज खाना, इस मंशा से वीडियो दिखाकर लोगों को भावनाओं को चोट पहुंचाकर किसको खुश करने का खेल कर रहे हो? 

दस्तक देते ये तीन सवाल

सावन-नवरात्र में नॉनवेज का वीडियो पोस्ट करके चिढ़ाने की कोशिश करते हुए सियासत राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने की है या फिर मटन-मछली के वीडियो पोस्ट करने के पीछे मुगल मानसिकता का मिश्रण डालकर पीएम नरेंद्र मोदी ने वोटर को लुभाने वाली सियासत की? ऐसे में तीन सवालों का जवाब दस्तक देकर खोजना है. देश में नॉनवेज खाने वाले लोग कितने हैं? राहुल या तेजस्वी ने आखिर वीडियो क्यों डाला था? क्या चिढ़ाने के लिए डाला था? और प्रधानमंत्री ने क्यों इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है? इन सवालों का जवाब एक एक करके दस्तक देते हुए बताएंगे. 

Advertisement

बता दें कि सियासत में तुष्टिकरण होता आया है. अल्पसंख्यक वोट के लिए कई दल देश में लंबे वक्त से कई तरीके अपनाते आए हैं. ऐसे में गौर करने वाली बात ये है कि आखिर नॉनवेज कितने लोग खाते हैं? दरअसल, 2019 से 2021 के बीच हुआ राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ये बताता है कि देश के 57.3 प्रतिशत पुरुष और 45.1 प्रतिशत महिलाएं हफ्ते में कम से कम एक बार चिकन, मछली, मीट जैसी नॉनवेज डिश खाते हैं. अब चूंकि प्रधानमंत्री ने बात नवरात्र या सावन में मटन-मछली की उठाई है तो धर्म के आधार पर नॉनवेज का आंकड़ा देखने की भी जरूरत है. ईसाई धर्म में 79 प्रतिशत, मुस्लिम धर्म के 75 फीसदी, 68 प्रतिशत बौद्ध, हिंदू 47 प्रतिशत नॉनवेज खाते हैं. 

किस राज्य में कितने लोग खाते हैं नॉनवेज?

अब अगर भारत के नक्शे पर देखें तो गोवा, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में 75 फीसदी से 90 प्रतिशत तक लोग हफ्ते में कम से कम एक बार मछली, चिकन या मीट खाते हैं. उत्तर की बात करें तो उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड में 25 से 50 फीसदी तक लोग हफ्ते में एक बार जरूर नॉनवेज खाते हैं. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश वो राज्य हैं, जहां 13 से 20 फीसदी लोग ही नॉनवेज खा रहे हैं. ये आंकड़े इस बात को साफ करते हैं कि देश में नॉनवेज खाने वालों की तादाद कोई कम नहीं है. लेकिन सवाल है कि ऐसा वीडियो डालने के पीछे मंशा क्यों ना माने कि तेजस्वी की चिढ़ाने की हो सकती है? क्योंकि आठ तारीख को जो तेजस्वी मछली खाते हैं, वो आठ को वीडियो नहीं डालते. वीडियो डालने की तारीख वो नवरात्र के पहले दिन की क्यों चुनते हैं.

Advertisement

दरअसल, तेजस्वी यादव जब से प्रचार कर रहे हैं, तीन वीडियो उनकी टाइमलाइन पर प्रमुखता से दिखते हैं. पहला वीडियो, जिसमें वो प्रचार बस में रोटी साग खाते दिखते हैं. फिर 9 अप्रैल मछली खाने वाला वीडियो पोस्ट किया. फिर विवाद हुआ तो 10 अप्रैल को संतरा खाने का वीडियो डाला गया. तीनों वीडियो में सबसे ज्यादा चर्चा मछली भोज वाले वीडियो की हुई, जिस पर प्रधानमंत्री तक ने इसे नवरात्र में बहुसंख्यकों को चिड़ाने वाली मुगल सोच का प्रतीक बताया और बिना नाम लिए आरोप ये लगाया कि नवरात्र में इस वीडियो से वोट बैंक तेजस्वी सेट करना चाहते हैं.

मल्लाहों को लुभाने को पोस्ट हुआ वीडियो?

तेजस्वी के सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर गौर करें तो वह लिखते हैं कि 8 तारीख को हेलिकॉप्टर में भोजन और ये वीडियो नौ अप्रैल की रात 11.36 बजे का है. मछली आठ को खाकर 9 तारीख को वीडियो डालने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? क्या मल्लाह समाज में आने वाली कई जाति के वोटर को लुभाने के लिए ये वीडियो डाला गया? इस सवाल की वजह दो हैं. पहली हेलिकॉप्टर में तेजस्वी यादव VIP पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी के साथ बैठ हैं. मुकेश सहनी बिहार में मल्लाहों के बड़े नेता हैं. बिहार में मल्लाह समाज कई जातियों मे बंटा है, जिसकी ताकत 12 से 14 फीसदी है. मिथिलांचल और उत्तर बिहार में मल्लाह समाज की जातियों का प्रभाव है. मल्लाहों के बड़े नेता मुकेश सहनी मछली बनाकर तेजस्वी के लिए लाते हैं. मल्लाह जाति से जुड़े नेता अजय निषाद पहले ही INDIA गठबंधन में आ चुके हैं. तब मछली और मल्लाह के समीकरण के साथ संभव है कि तेजस्वी मल्लाह समाज को लुभाने में जुटे रहे हों. 

Advertisement

वीडियो डालना क्या एक सियासत का हिस्सा था? 

लेकिन एक शंका ये भी उठती है कि आखिर आठ को मछली खा ली थी तो आठ को ही ये वीडियो क्यों नहीं डाला? 9 अप्रैल की रात में मछली वाला वीडियो डालने की जरूरत क्यों पड़ी? ऐसे में गौर किया गया तो पता चला कि 9 अप्रैल को रात 9:42 बजे आरजेडी के उम्मीदवारों की लिस्ट आती है. और इसके कुछ ही देर बाद तेजस्वी यादव दो घंटे के भीतर मछली वाला वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर देते हैं. तब सवाल उठा कि उम्मीदवारों की लिस्ट आते ही मछली वाला वीडियो डालना क्या एक सियासत का हिस्सा था? क्योंकि आरजेडी उम्मीदवारों की लिस्ट में इस बार मुस्लिम उम्मीदवार कम हैं. आरजेडी ने इस बार लालू यादव की दोनों बेटियों को उम्मीदवार बनाया है. आरजेडी की लिस्ट में मुन्ना शुक्ला जैसे बाहुबलियों का नाम रहता है. तो क्या मुस्लिम उम्मीदवार कम होना, परिवारवाद ज्यादा और बाहुबली कैंडिडेट वाले सवालों से ध्यान हटाने को मछली का वीडियो डाल दिया गया? कारण, इसके अगले ही दिन और जेडीयू के नेता इस बात पर जोर देने लगे कि नवरात्र के दिन तेजस्वी यादव ने मछली खाने का वीडियो डालकर सनातान का अपमान किया है. इस पर तेजस्वी आईक्यू टेस्ट की बात कहने लगे.

Advertisement

अब सियासत की इस मछली फ्राइ पर वोट का स्वाद किसको किसको कैसे मिला या मिलेगा समझिए. जहां कहा जा रहा है कि तेजस्वी- मल्लाह वोट को संदेश देना चाहा लेकिन पीएम तक के मछली को मुगल सोच से जोड़ने पर मुस्लिम वोटरभी आरजेडी से जुड़ेगदा. यानी मछली, मल्लाह और मुस्लिम तीनों का फायदा हो सकता है. बीजेपी- नवरात्र में मछली के वीडियो पर वार करके बहुसंख्यक वोट को बिहार समेत दूसरी जगह एकजुट करना चाहती है. लेकिन इन सबके बीच एक जनता भी है, जिसके हाथ सिर्फ बयानबाजी का कांटा लगा है.

(आजतक ब्यूरो)

Live TV

Advertisement
Advertisement