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ऑक्सीजन सप्लाई पर मोदी का फैसला- PM Cares Fund से खरीदे जाएंगे एक लाख कंसंट्रेटर

कोरोना प्रबंधन के लिए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) आपूर्ति में सुधार के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. बैठक में पीएम ने निर्देश दिया कि पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को जल्द से जल्द खरीद लिया जाए और राज्यों को उपलब्ध कराया जाए. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों को तरजीह दी जाएगी. 

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PM नरेंद्र मोदी (फाइल-पीटीआई)
PM नरेंद्र मोदी (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ऑक्सीजन सप्लाई पर पीएम मोदी की बैठक
  • खरीदे जाएंगे एक लाख कंसंट्रेटर
  • पीएम केयर्स फंड का होगा इस्तेमाल

देश में कोरोना महामारी के बीच ऑक्सीजन की भारी कमी है. इसी को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) से एक लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (Oxygen Concentrator) खरीदने की मंजूरी दी है. बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में ये फैसला लिया गया.  

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आपको बता दें कि कोरोना प्रबंधन के लिए लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) आपूर्ति में सुधार के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. बैठक में पीएम ने निर्देश दिया कि पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को जल्द से जल्द खरीद लिया जाए और राज्यों को उपलब्ध कराया जाए. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों को तरजीह दी जाएगी. 

बैठक में पीएम केयर फंड के तहत पहले से स्वीकृत 713 PSA प्लांटों के अलावा, 500 नए ऑक्सीजन प्लांटों को मंजूरी दी गई. यानी कि पीएम केयर फंड जरिए 500 नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाएंगे और इनमें ऑक्सीजन का उत्पादन जल्द से जल्द शुरू करने के प्रयास किये जाएंगे.  

ये नए ऑक्सीजन प्लांट जिला मुख्यालय और टियर 2 शहरों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति में वृद्धि करेंगे. इन 500 PSA प्लांटों को DRDO और CSIR द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक के जरिए स्थापित किया जाएगा. 

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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर क्या होता है? 

बता दें कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर वह मशीन है जो कि हवा से ऑक्सीजन को अलग करता है. हवा को अपने भीतर लेकर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उसमें से अन्य गैसों को अलग करके शुद्ध ऑक्सीजन की सप्लाई करता है. ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को घरेलू ऑक्सीजन प्लांट भी कहा जा सकता है. घर पर रहकर इलाज करा रहा है लोगों के लिए ये एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. एक कंसंट्रेटर एक मिनट में करीब 5 से 10 लीटर ऑक्सीजन सप्लाई कर सकता है. 

गौरतलब है कि कोरोना संकट के बीच देश के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है. आलम ये है कि कई लोग अस्पतालों में दम तोड़ चुके हैं. मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को जमकर फटकार भी लगाई है. इस बीच सरकारें युद्ध स्तर पर ऑक्सीजन, बेड्स मुहैया कराने में जुटी हैं. 

उधर, कोरोना की दूसरी लहर के बीच असली डर मई को लेकर है. माना जा रहा है कि मई में कोरोना की दूसरी लहर का पीक होगा. अमेरिका में मिशिगन यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ भ्रामर मुखर्जी का कहना है कि मध्य मई के दौरान रोजाना 8-10 लाख केस सामने आ सकते हैं. उन्होंने आशंका जताई कि 23 मई के आसपास रोजाना 4,500 लोग कोरोना से जान गंवा सकते हैं.

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