पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोगों ने शोक जताया है. पीएम मोदी ने गुरुवार को उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और फिर शुक्रवार को डॉ. सिंह के घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
पीएम मोदी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से डॉ. मनमोहन के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा, 'पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन ने हम सभी को ह्रदय को गहरी पीड़ा पहुंचाई है. उनका जाना एक राष्ट्र के रूप में भी हमारे लिए बहुत बड़ी क्षति है. विभाजन के उस दौर में बहुत कुछ खोकर भारत आना और यहां जीवन के हर क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करना ये सामान्य बात नहीं है. अभावों और संघर्षों से ऊपर उठकर, कैसे ऊंचाईयों को हासिल किया जा सकता है, उनका जीवन ये सीख भावी पीढ़ी को देता रहेगा.'
उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा- मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'एक नेक इंसान के रूप में , एक विद्वान अर्थशास्त्री के रूप में,रिफॉर्म्स के प्रति एक समर्पित लीडर के रूप में, उन्हें याद हमेशा किया जाएगा. एक अर्थशास्त्री के रूप में उन्होंने अलग-अलग स्तर पर भारत सरकार में अनेक सेवाएं दी. एक चुनौतीपूर्ण समय में उन्होंने रिजर्व बैंक के गवर्नर की भूमिका निभाई. पूर्व पीएम भारतरत्न नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने वित्तीय संकट से घिरे देश को एक नई अर्थव्यवस्था के मार्ग पर प्रशस्त किया. प्रधानमंत्री के रूप में देश के विकास और प्रगति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. '
डॉ. सिंह के कमिटमेंट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'जनता के प्रति, देश के विकास प्रति उनका जो कमिटमेंट था, उसे हमेशा एक सम्मान के नजरिए से देखा जाएगा. उनका जीवन, उनकी ईमानदारी और सादगी का प्रतिबिंब था. वो विलक्षण सांसद थे. उनकी विनम्रता, सौम्यता और बुद्धिमता उनके संसदीय जीवन की पहचान बनी. मुझे याद है कि इस साल की शुरूआत में जब राज्यसभा में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था, तब मैंने कहा था कि सांसद के रूप उनकी निष्ठा सबके लिए प्रेरणादायक है. सत्र के समय अहम मौकों पर वह व्हीलचेयर पर आते थे और अपना संसदीय दायित्व निभाते थे. दुनिया के प्रतितिष्ठित संस्थानों से शिक्षा लेने और सरकार के अनेक शीर्ष पदों पर रहने के बावजूद, वह अपनी सामान्य पृष्ठभूमि के मूल्यों को कभी भी नहीं भूले.'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'दलगत राजनीति से उठकर उन्होंने हमेशा हर के व्यक्ति से संपर्क रखा. सबके लिए सहज उपलब्ध रहे. जब मैं सीएम था, तब डॉ. सिंह के साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खुले मन से चर्चा होती थी. यहां दिल्ली आने के बाद मेरी उनसे समय-समय पर बात होती थी, मुलाकात होती थी. मुझे उनके साथ हुई मुलाकातें, देश को लेकर हुई चर्चाएं हमेशा याद रहेगी. अभी जब उनका जन्मदिन था तब भी मैंने उनके बात की. मैं उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. '
पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए. प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस नेता की बुद्धिमत्ता और विनम्रता की प्रशंसा की और उनके साथ हुई बातचीत की तस्वीरें भी साझा कीं.
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा 'दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं डॉ. मनमोहन सिंह जी के परिवार, उनके मित्रों और असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति. भारत ने अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी को खो दिया है. साधारण पृष्ठभूमि से उठकर उन्होंने एक सम्मानित अर्थशास्त्री के रूप में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने वित्त मंत्री समेत सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं और हमारी आर्थिक नीति पर गहरी छाप छोड़ी. प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत प्रयास किए.'
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब मैं और डॉ. मनमोहन सिंह नियमित रूप से बातचीत करते थे. हम शासन से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करते थे. उनकी बुद्धिमत्ता और विनम्रता हमेशा दिखाई देती थी."
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "संसद में उनके हस्तक्षेप भी व्यावहारिक थे. हमारे प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए." मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और सिंह के देश के प्रधानमंत्री रहते हुए हुई अपनी बातचीत को याद करते हुए कहा कि वे शासन से संबंधित विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करते थे.
मनमोहन सिंह लगातार दो कार्यकालों तक प्रधानमंत्री रहे, उन्होंने 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के तहत गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया. पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री के रूप में, वे 1991 में भारत के आर्थिक उदारीकरण के वास्तुकार थे.