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खिलौना उद्योग से PM मोदी की अपील, हाथ से बने टॉय को प्रमोट करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें हाथ से बने खिलौनों को प्रमोट करने की जरूरत है. अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने चेन्नापटनम, वाराणसी और जयपुर के खिलौना निर्माताओं से बात और उन्हें पारंपरिक खिलौनों को लोकप्रिय बनाने को कहा. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो- पीटीआई)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'हाथ से बने खिलौनों को करें प्रमोट'
  • 'खिलौने बनाने में कम प्लास्टिक का करें प्रयोग'
  • 'सरकार ने बनाया नेशनल टॉय एक्शन प्लान'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के खेल निर्माताओं से अपील की है कि वे खिलौनों को बनाने में प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करें और प्लास्टिक की जगह पर इको फ्रेंडली मैटेरियल का प्रयोग करें, जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो. 

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शनिवार को पीएम मोदी ने इंडिया टॉय फेयर 2021 का उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान खिलौना निर्माताओं से कम प्लास्टिक, अधिक रिसाइकिल करने योग्य सामग्री का उपयोग करने की अपील की है. पीएम मोदी ने कहा है कि खिलौनों को बनाने में नवाचार को बढ़ावा दें.

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम खिलौनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होते जा रहे हैं और अब हम धीरे धीरे दुनिया के बाजार में भी अपने खिलौने भेज रहे हैं. पीएम मोदी ने थोड़ी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि दुनिया में 100 बिलियन यूएस डॉलर के खिलौनों के बाजार में भारत का हिस्सा बहुत कम है. भारत में बेचे जाने वाले 85 फीसदी खिलौने आयातित किए जाते हैं."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें हाथ से बने खिलौनों को प्रमोट करने की जरूरत है. अपने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने चेन्नापटनम, वाराणसी और जयपुर के खिलौना निर्माताओं से बात और उन्हें पारंपरिक खिलौनों को लोकप्रिय बनाने को कहा. 

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खिलौना बनाने वाली कंपनियों से अपील करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वे पर्यावरण के अनुकूल, आकर्षक और अभिनव खिलौने बनाएं और रिसाइकिल होने वाली सामग्री का इस्तेमाल करें. 

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने एक नेशनल टॉय एक्शन प्लान बनाया है जिसमें 15 मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं ताकि घरेलु खिलौना उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाया जाए.  

पीएम मोदी ने कहा कि खिलौनों का जो वैज्ञानिक पक्ष है, बच्चों के विकास में उसकी अहम भूमिका है, उसे अभिभावकों को समझना चाहिए और अध्यापकों को स्कूलों में भी उसे प्रयोग करना चाहिए. 

 

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