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OROP के पांच साल, पीएम मोदी ने बताया- भारत का ऐतिहासिक कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से पांच साल पहले, भारत ने अपने महान सैनिकों की भलाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था, जो साहसपूर्वक तरीके से राष्ट्र की रक्षा करते हैं. ओआरओपी को लागू किए जाने के 5 साल का एक महत्वपूर्ण अवसर है. दशकों तक भारत OROP का इंतजार करता रहा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-PTI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • समान रैंक के लिए समान पेंशन का प्रावधान
  • एक जुलाई 2014 को शुरू हुई थी OROP
  • पांच साल में कुल 42740.28 करोड़ खर्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से पांच साल पहले, भारत ने अपने महान सैनिकों की भलाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था, जो साहसपूर्वक तरीके से राष्ट्र की रक्षा करते हैं. ओआरओपी को लागू किए जाने के 5 साल एक महत्वपूर्ण अवसर है. दशकों तक भारत OROP का इंतजार करता रहा.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 'वन रैंक वन पेंशन' योजना पर पूर्व सैनिकों से किए गए वादे को पूरा किया है. सशस्त्र बलों और उनके परिवारों का कल्याण हमारी अटूट प्रतिबद्धता और सर्वोच्च प्राथमिकता है. 

रक्षा मंत्री ने बताया कि 10795.4 करोड़ की रकम (जिसमें नेपाली पेंशनर्स को किए गए 348.56 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है) OROP के क्रियान्वयन के कारण 2060220 सैन्य पेंशनभोगियों को बकाया के रूप में वितरित की गई है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन की योजना के तहत सालाना 7123.38 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. वन रैंक वन पेंशन की योजना एक जुलाई 2014 को शुरू की गई थी. इसके बाद से इस योजना पर अनुमानित तौर पर 42740.28 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. 

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ओआरओपी में समान रैंक के लिए समान पेंशन का प्रावधान है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सरकार ने पांच नवंबर 2015 को एक रैंक एक पेंशन की 45 वर्ष पुरानी मांग को पूरा करने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया था.

 

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