प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से पांच साल पहले, भारत ने अपने महान सैनिकों की भलाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था, जो साहसपूर्वक तरीके से राष्ट्र की रक्षा करते हैं. ओआरओपी को लागू किए जाने के 5 साल एक महत्वपूर्ण अवसर है. दशकों तक भारत OROP का इंतजार करता रहा.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने 'वन रैंक वन पेंशन' योजना पर पूर्व सैनिकों से किए गए वादे को पूरा किया है. सशस्त्र बलों और उनके परिवारों का कल्याण हमारी अटूट प्रतिबद्धता और सर्वोच्च प्राथमिकता है.
रक्षा मंत्री ने बताया कि 10795.4 करोड़ की रकम (जिसमें नेपाली पेंशनर्स को किए गए 348.56 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है) OROP के क्रियान्वयन के कारण 2060220 सैन्य पेंशनभोगियों को बकाया के रूप में वितरित की गई है.
A sum of Rs. 10795.4 crore (which includes payment of Rs. 348.56 crore made to Nepali pensioners) has been disbursed to 2060220 Defence Forces Pensioners/Family Pensioners as arrears on account of implementation of OROP.
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) November 7, 2020
राजनाथ सिंह ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन की योजना के तहत सालाना 7123.38 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. वन रैंक वन पेंशन की योजना एक जुलाई 2014 को शुरू की गई थी. इसके बाद से इस योजना पर अनुमानित तौर पर 42740.28 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
देखें: आजतक LIVE TV
ओआरओपी में समान रैंक के लिए समान पेंशन का प्रावधान है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सरकार ने पांच नवंबर 2015 को एक रैंक एक पेंशन की 45 वर्ष पुरानी मांग को पूरा करने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया था.