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मन की बात में पीएम मोदी की अपील- लोकल खिलौनों के लिए वोकल बनना है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'मन की बात' के जरिये देश को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कोरोना संकट के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि कोरोना से बचने के लिए मास्क और दो गज की दूरी जरूरी है. साथ ही पीएम मोदी ने बच्चों के खिलौनों पर भी बात की. उन्होंने लोकल खिलौनों के लिए वोकल बनने का आह्वान किया.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • पर्व और पर्यावरण में गहरा नाता-पीएम मोदी
  • पीएम बोले कि देश को आत्मनिर्भर बनाना है
  • कोरोना से बचने को मास्क, दो गज की दूरी जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं. मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में नागरिकों में अपने दायित्वों का अहसास है. हर तरह के उत्सवों में लोग संयम बरत रहे हैं. देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है.

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मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाएंगे. समय के साथ शिक्षकों के सामने भी चुनौती है. शिक्षकों ने चुनौती को स्वीकार किया है. शिक्षक और छात्र मिलकर नया कर रहे हैं. नई शिक्षा नीति के जरिये इसमें अहम भूमिका निभाएंगे. पीएम मोदी ने कहा कि भारतीयों के इनोवेशन और सॉल्यूशन देने की क्षमता का लोहा हर कोई मानता है और जब समर्पण भाव हो, संवेदना हो तो ये शक्ति असीम बन जाती है. हमारे यहां के बच्चे, हमारे विद्यार्थी, अपनी पूरी क्षमता दिखा पाएं, अपना सामर्थ्य दिखा पाएं, इसमें बहुत बड़ी भूमिका पोषण की भी होती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैसे मैं मन की बात सुन रहे बच्चों के माता-पिता से क्षमा मांगता हूं क्योंकि हो सकता है, उन्हें अब ये मन की बात कार्यक्रम सुनने के बाद खिलौनों की नई-नई डिमांड सुनने का शायद एक नया काम सामने आ जाएगा. खिलौने जहां एक्टिविटी को बढ़ाने वाले होते हैं, तो खिलौने हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं. खिलौने केवल मन ही नहीं बहलाते, खिलौने मन बनाते भी हैं और मकसद गढ़ते भी हैं.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है. कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं. भारत के कुछ क्षेत्र टॉय क्लस्टर यानी खिलौनों के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं. पीएम ने बताया कि ग्लोबल टॉय इंडस्ट्री 7 लाख करोड़ से भी अधिक की है. 7 लाख करोड़ रुपयों का इतना बड़ा कारोबार, लेकिन भारत का हिस्सा उसमें बहुत कम है. जिस राष्ट्र के पास इतने विरासत हो, परंपरा हो, क्या खिलौनों के बाजार में उसकी हिस्सेदारी इतनी कम होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री ने मन की बात में किसानों की चर्चा की. उन्होंने कहा कि ऋगवेद में मंत्र है- अन्नानां पतये नमः, क्षेत्राणाम पतये नमः अर्थात अन्नदाता को नमन है. किसान को नमन है. किसानों ने कोरोना जैसे कठिन समय में अपनी ताकत को साबित किया है. हमारे देश में इस बार खरीफ की फसल की बुआई पिछले साल के मुकाबले 7 प्रतिशत ज्यादा हुई है.

पीएम मोदी ने कहा कि हम बहुत बारीकी से अगर देखेंगे, तो एक बात अवश्य हमारे सामने आएगी- हमारे पर्व और पर्यावरण. इन दोनों के बीच एक बहुत गहरा नाता है. बिहार के पश्चिमी चंपारण में सदियों से थारू आदिवासी समाज के लोग 60 घंटे के लॉकडाउन, उनके शब्दों में ‘60 घंटे के बरना’ का पालन करते हैं. प्रकृति की रक्षा के लिए बरना को थारू समाज के लोगों ने अपनी परंपरा का हिस्सा बना लिया है और ये सदियों से है.

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पीएम मोदी ने कहा कि आम तौर पर ये समय उत्सव का है. जगह-जगह मेले लगते हैं, धार्मिक पूजा-पाठ होते हैं. कोरोना के इस संकट काल में लोगों में उमंग और उत्साह तो है ही, मन को छू लेने वाला अनुशासन भी है.

बता दें कि मन की बात के पिछले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान पर निशाना साधा था और कहा कि उसने भारत की भूमि पर कब्जा करने और अपने यहां चल रहे आंतरिक संघर्षों को हटाने के लिए भ्रामक योजना बनाई. करगिल युद्ध के दौरान सैनिकों के शौर्य की कहानियों को साझा करने के लिए प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील भी की थी.

 


 

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