प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिग्गज तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. जाकिर हुसैन का सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'महान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन जी के निधन से बहुत दुख हुआ. उन्हें एक सच्चे प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, वे इंडियन क्लासिकल म्यूजिक के क्रांति दूत थे. उन्होंने तबले को वैश्विक मंच पर भी लाया और अपनी बेजोड़ लय से लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. अपनी हुनर के माध्यम से उन्होंने भारतीय शास्त्रीय परंपराओं को वैश्विक संगीत के साथ सहजता से एक किया, वे सांस्कृतिक एकता के प्रतीक बन गए. जाकिर हुसैन के प्रतिष्ठित प्रदर्शन और भावपूर्ण रचनाएं संगीतकारों और संगीत प्रेमियों की पीढ़ियों को प्रेरित करने में योगदान देंगी. उनके परिवार, दोस्तों और वैश्विक संगीत समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं.'
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने व्यक्त की संवेदना
जाकिर हुसैन के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, तबला के जादूगर उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन संगीत जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. वे अपनी असाधारण रचनात्मकता और आविष्कारशीलता के लिए जाने जाते थे. उन्होंने दुनिया भर के संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया. वे भारत और पश्चिम की संगीत परंपराओं के बीच एक सेतु थे. मुझे उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का सौभाग्य मिला. मैं उनके परिवार के सदस्यों और उनके अनगिनत प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जताया दुख
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जाकिर हुसैन के निधन पर कहा कि तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन से भारत और दुनिया ने एक संगीत सम्राट को खो दिया है. हमने एक ऐसी धरोहर को खो दिया है जिन्होंने अपने तबले की धुन से सीमाओं और पीढ़ियों को एक दूसरे से जोड़ा था. हमारी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और दुनियाभर में फैले उनके प्रशंसकों के साथ हैं.
जाकिर हुसैन को मिले कई अवार्ड
अपने शानदार करियर के दौरान, हुसैन को कई पुरस्कार मिले, जिनमें 1990 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2018 में रत्ना सदस्य फेलोशिप शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, उन्हें 1999 में यूनाइटेड स्टेट्स नेशनल हेरिटेज फेलोशिप से सम्मानित किया गया, जो देश में पारंपरिक कलाकारों के लिए सर्वोच्च पुरस्कार है. उनकी असाधारण प्रतिभा ने उन्हें सात ग्रैमी नामांकन भी दिलाए, जिनमें से चार में उन्हें जीत मिली, जिनमें से तीन फरवरी 2024 में मिले.