बांदीपुर और मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को एक अलग ही अंदाज दिखाई दिया. ब्लैक हैट, स्टाइलिश चश्मा, प्रिंटेड टी-शर्ट और खाकी रंग की हाफ जैकेट पहने पीएम मोदी टाइगर रिजर्व के दौरे पर पहुंचे.
ये दौरा प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया. पीएम मोदी ने यहां कैमरे से कई तस्वीरें क्लिक कीं. हाथी को अपने हाथों से गन्ना खिलाया और दूरबीन की मदद से नजारों का लुत्फ भी उठाया.
पीएम मोदी ने मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में थेप्पाकडू हाथी कैंप (Theppakadu elephant camp) का दौरा भी किया. यह वही हाथी कैंप है, जिसमें ऑस्कर विनिंग फिल्म 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' वाला रघु भी रहता है. 'द एलिफेंट व्हिसपरर्स' भारत की पहली डॉक्यूमेंट्री है, जिसे ऑस्कर से सम्मानित किया गया है. यहां पर पीएम मोदी ने हाथी के बच्चे रघु को पालने वाले आदिवासी कपल बेली और बोमन से मुलाकात की.
इसके बाद पीएम मोदी यहां से मैसूर पहुंचे और प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर स्मरणोत्सव कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने अमृत काल का विजन फॉर टाइगर कंजर्वेशन और स्मारक सिक्का भी जारी किया. प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान टाइगर सेंसस 2022 जारी किया. इसमें बताया गया कि बाघों की संख्या बढ़कर 3167 हो गई है. बता दें कि 2018 के सेंसस में बाघों की संख्या 2,967 बताई गई थी. इससे पहले 2014 में यह संख्या 2226, वहीं 2010 में 1706 तो वहीं 2006 में 1411 थी.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दशकों पहले भारत से चीता विलुप्त हो गए थे, हम शानदार चितों को नामीबिया और दक्षिण अफ्रिका से भारत लेकर आए. कुछ दिन पहले ही कूनो नेशनल पार्क में 4 सुंदर शावकों ने जन्म लिया है. भारत ने न सिर्फ टाइगर को बचाया है बल्कि उसे फलने फूलने का एक बेहतरीन ईको सिस्टम दिया है.
उन्होंने कहा कि जिस एलीफेंट व्हिस्परर्स डॉक्यूमेंट्री को ऑस्कर मिला है वह भी नेचर और क्रिएचर के बीच के अद्भुत संबंधों की हमारी विरासत को दर्शाती है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि आदिवासी समाज के जीवन और परंपरा से अपने देश और समाज के लिए कुछ न कुछ लेकर जाएं.
महावतों -फ्रंटलाइन स्टाफ से की बात
बांदीपुर टाइगर रिजर्व में पीएम मोदी ने बाघों के संरक्षण की गतिविधियों में शामिल फ्रंटलाइन फील्ड स्टाफ और स्वयं सहायता समूहों के साथ बातचीत भी की. इसके साथ ही उन्होंने मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के थेप्पाकडू हाथी शिविर पहुंचकर शिविर के महावतों और 'कावड़ियों' से भी चर्चा की.
प्रोजेक्ट टाइगर क्या है?
बाघों की घटती आबादी को संरक्षण देने के लिए 1 अप्रैल 1973 को भारत में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया. शुरुआत में इस योजना में 18,278 वर्ग किमी में फैले 9 टाइगर रिजर्व को शामिल किया गया. पिछले 50 सालों में इस योजना का विस्तार हुआ और आज इनकी संख्या बढ़कर 53 हो गई है. ये 53 टाइगर रिजर्व 75,500 वर्ग किमी में फैले हैं. इंदिरा गांधी सरकार में शुरू हुए प्रोजेक्ट टाइगर के पहले निदेशक का जिम्मा कैलाश सांखला ने संभाला था. कैलाश को 'द टाइगर मैन ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है. बाघों के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए ही उन्हें प्रोजेक्ट टाइगर का पहला निदेशक बनाया गया था.
कर्नाटक में 10 मई को होना है चुनाव
कर्नाटक में चुनाव सिर पर हैं. वहां 10 मई को निर्वाचन होना है, जिसके नतीजे 13 मई को आएंगे. चुनाव को देखते हुए पीएम मोदी का यह दौरा बेहद खास माना जा रहा है. पीएम के इस दौरे पर कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने दौरे से पहले कहा था कि आचार संहिता प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रियों या विधायकों की परवाह किए बिना सभी के लिए समान रूप से लागू होती है.
SC को बताई गई थी बाघों की संख्या
इससे पहले जनवरी 2023 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि देश के 53 टाइगर रिजर्व में 2,967 बाघ हैं. ये आंकड़ा 2018 की एख रिपोर्ट के हवाले से दिया गया था. अदालत 2017 की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विलुप्त हो रहे बाघों को बचाने का अनुरोध किया गया था.
घटती आबादी का बड़ा कारण शिकार
बाघ को अभी भी 'लुप्तप्राय' के रूप में वर्गीकृत किया गया है. बाघों की 93 फीसदी तक नुकसान हो गया है और बाघों की संख्या एक सदी पहले 100,000 से कम हो गई. अवैध शिकार और आवास विनाश प्रमुख कारणों में से हैं.