
देश की पहली सी-प्लेन सर्विस को शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब 8 नवंबर को सूरत के हजीरा से भावनगर के घोघा के बीच पहली रो-पैक्स फेरी सेवा शुरू करने जा रहे हैं. पीएम मोदी डिजिटल लॉन्चिंग के जरिए यह शुरुआत करेंगे. गुजरात में रो-पैक्स फेरी की यह दूसरी सेवा होगी.
हजीरा से घोघा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा शुरू होने से पहले आज शुक्रवार को इसका ट्रायल रन होना था, और रो-पैक्स फेरी भावनगर से हजीरा पर पहुंचने वाली थी, लेकिन पहले ही बीच समुद्र में जहाज बंद हो गया. जिसकी वजह से 11 बजे हजीरा पर जहाज का ट्रायल रन होना था, लेकिन जहाज देर शाम तक पहुंचा.
रो-पैक्स फेरी सेवा की शुरुआत होने से हजीरा से घोघा सिर्फ 4 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. यह फेरी दिन में तीन ट्रिप लगाएगी. इससे यात्रियों और गाड़ियों का भी आवागमन हो पाएगा. हजीरा से घोघा के बीच सड़क से जहां 380 किलोमीटर का सफर होता है जबकि समुद्र के रास्ते रो-पैक्स फेरी के जरिए यह सफर महज 80 किमी का हो जाएगा.
इस सेवा की शुरुआत से हर रोज करीब 9 हजार लीटर ईंधन बचेगा और यात्रियों का सफर 10 घंटों की जगह पर महज 4 घंटे में पूरा हो जाएगा.
रो-पैक्स फेरी वेसल में तीन अलग-अलग डेक है जिसके मेन डेक में 30 ट्रक जितनी जगह है तो वहीं बीच वाले डेक में करीब 100 कार और सबसे ऊपरी हिस्से में 500 यात्री सफर कर सकेंगे. फेरी वेसल में 34 क्रू मेंबर्स सवार हो सकते हैं.
पैसेंजर डेक में अन्य सुविधाएं यानी चाइनीज नाश्ता भी मौजूद रहेगा. हजीरा से घोघा रोरो फेरी सेवा के कई व्यापारिक लाभ सूरत के व्यापारियों को होगा, जो सौराष्ट्र में अपना व्यापार करने के लिए करीब 400 किमी तक का सफर तय करते हैं.
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सूरत के हजीरा से भावनगर के घोघा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा शुरू होने के बाद पीपावाव से सूरत, सूरत से दीव और मुंबई से पीपावाव तक के जल रास्ते जुड़ जाएंगे. केंद्र और राज्य सरकार गुजरात के समुद्र तट को सीधे दक्षिण भारत से जोड़ने की परियोजना पर भी काम कर रही है.
दिलचस्प बात यह है कि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावनगर के घोघा से रो-पैक्स फेरी सेवा की शुरुआत की थी, जो भरुच के दहेज तक थी. हालांकि बाद में इस रो-पैक्स फेरी को इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि घोघा में जहां ये बंदरगाह बना है वहां बड़े हिस्से में मिट्टी आ गई थी, जो जहाज के तैरने के लिए काफी नहीं थी.