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'Great Judgement...', पीएम मोदी ने 'वोट के बदले नोट मामले' में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

पीएम मोदी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर कहा कि स्वागतम! सुप्रीम कोर्ट का एक बेहतरीन फैसला, जिससे राजनीति में पारदर्शिता आएगी और सिस्टम में लोगों का विश्वास और गहरा होगा.

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पीएम मोदी मार्च में घाटी के दौरे पर जा सकते हैं
पीएम मोदी मार्च में घाटी के दौरे पर जा सकते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोट के बदले नोट मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. कोर्ट ने सोमवार को अपने फैसले में कहा था कि अगर सांसद पैसे लेकर सदन में भाषण या वोट देते हैं तो उनके खिलाफ केस चलाया जा सकेगा. यानी अब उन्हें इस मामले में कानूनी छूट नहीं मिलेगी.

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पीएम मोदी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर कहा कि स्वागतम! सुप्रीम कोर्ट का एक बेहतरीन फैसला, जिससे राजनीति में पारदर्शिता आएगी और सिस्टम में लोगों का विश्वास और गहरा होगा.

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सोमवार को 1998 के नरसिम्हा राव के फैसले को पलट दिया. 1998 में 5 जजों की संविधान पीठ ने 3:2 के बहुमत से तय किया था कि इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटने के चलते अब सांसद या विधायक सदन में मतदान के लिए रिश्वत लेकर मुकदमे की कार्रवाई से नहीं बच सकते हैं.

संविधान पीठ ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सात सदस्यों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से दिए गए अपने फैसले में कहा कि हमने स्वतंत्र रूप से इस विवाद के सभी पहलुओं पर निर्णय लिया है. क्या सांसदों को इससे छूट मिलनी चाहिए? इस बात से हम असहमत हैं और बहुमत से इसे खारिज करते हैं.

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चीफ जस्टिस ने कहा कि रिश्वत को रिश्वत तब कहा जाता है, जब उसे स्वीकार किया जाता है. सांसदों के भ्रष्टाचार और रिश्वत लेने से 
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि विधायिका के किसी सदस्य द्वारा किया गया भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी को खत्म कर देती है.

क्या है मामला?

यह मामला झामुमो के सांसदों के रिश्वत कांड पर आए आदेश से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा था. आरोप था कि सांसदों ने 1993 में नरसिम्हा राव सरकार को समर्थन देने के लिए वोट दिया था. इस मसले पर 1998 में 5 जजों की बेंच ने फैसला सुनाया था. लेकिन अब 25 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया है. यह मुद्दा दोबारा तब उठा, जब झमुमो की विधायक सीता सोरेन ने अपनने खिलाफ जारी आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की याचिक दाखिल की. उन्होंने कहा कि संविधान में उन्हें अभियोजन से छूट मिली हुई है. दरअसल, सीता सोरेन पर आरोप था कि उन्होंने 2012 के झारखंड राज्यसभा चुनाव में एक खास प्रत्याशी को वोट देने के लिए रिश्वत ली थी.

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