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Explainer: दिल्ली में यमुना कैसे मैली होती गई, क्यों नहीं सुधर नहीं रहे हालात?

यमुनोत्री से इलाहाबाद तक यमुना नदी 1,370 किलोमीटर तक का सफर तय करती है. वजीराबाद और ओखला के बीच, 22 किलोमीटर का हिस्सा है जो यमुना की कुल लंबाई के 2 प्रतिशत से भी कम है. नदी का ये 22 किमी हिस्सा पूरी नदी में 80 प्रतिशत प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार है.

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छठ पर यमुना नदी की सतह पर तैरते जहरीले झाग के बीच पूजा
छठ पर यमुना नदी की सतह पर तैरते जहरीले झाग के बीच पूजा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली के सियासी दलों में वार-पलटवार
  • छठ पर यमुना की तस्वीर ने सबका ध्यान खींच

छठ पूजा (Chhath Puja) के अवसर पर, दिल्ली में यमुना नदी (Yamuna) की सतह पर तैरते जहरीले झाग (Toxic Foam) के बीच पूजा करते श्रद्धालुओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं. इन तस्वीरों पर आम आदमी पार्टी (AAP)और बीजेपी (BJP) में राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है. 

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बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने नदी की "दयनीय" स्थिति को छिपाने के लिए यमुना तट पर छठ पूजा समारोह की अनुमति नहीं दी. जबकि आम आदमी पार्टी के गोपाल राय और राघव चड्ढा ने नदी में झाग के लिए उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों को दोषी ठहराया है.

क्यों है यमुना की सतह पर झाग?

यमुनोत्री से इलाहाबाद तक यमुना नदी 1,370 किलोमीटर तक का सफर तय करती है. वजीराबाद और ओखला के बीच, 22 किलोमीटर का हिस्सा है जो यमुना की कुल लंबाई के 2 प्रतिशत से भी कम है. नदी का ये 22 किमी हिस्सा पूरी नदी में 80 प्रतिशत प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार है.

विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अनुपचारित सीवेज में मौजूद फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट की वजह से ही यमुना नदी में झाग होते हैं. इसके अलावा दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों से आने वाला गंदा पानी और दिल्ली के ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाला गंदा पानी, नदी में प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है.

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यमुना की सफाई में क्यों कम हैं दिल्ली की कोशिशें?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 35 में से औसतन 24 एसटीपी ने पिछले एक साल में अपशिष्ट जल के लिए निर्धारित मानकों को पूरा नहीं किया. 

दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में 13 सीईटीपी में से औसतन केवल छह, अपशिष्ट जल के लिए डीपीसीसी मानकों के हिसाब से काम कर रही हैं.

दिल्ली से एक दिन में लगभग 720 मिलियन गैलन गंदा पानी निकलता है. पूरी दिल्ली में 20 जगहों पर स्थित 35 एसटीपी 597MGD तक सीवेज को ट्रीट कर सकती हैं और अपनी क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत इस्तेमाल कर रही हैं.

जनवरी में, दिल्ली सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से कहा था कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली को यमुना में झाग कम करने के लिए एसटीपी को अपग्रेड करना होगा. इसके लिए जगह भूमि और पैसे की उपलब्धता के आधार पर 3 से 5 पांच साल लगेंगे.

जुलाई में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, दिल्ली सरकार ने कहा था कि यमुना न्यूनतम पर्यावरण प्रवाह की कमी की वजह से कभी नहाने योग्य नहीं हो सकती. प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ के अनुसार, पर्यावरणीय प्रवाह वह पानी है जो किसी नदी, आर्द्रभूमि या तटीय क्षेत्र में पारिस्थितिक तंत्र को बनाए रखने के लिए उपलब्ध कराया जाता है. 

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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, रुड़की द्वारा किए गए एक अध्ययन में इस बात की सिफारिश की गई है कि डाउनस्ट्रीम ईकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए सुस्त मौसम में हरियाणा के यमुना नगर जिले में हथिनीकुंड बैराज से नदी में 23 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड (क्यूमेक) पानी छोड़ा जाए.

सियासी बयानबाजी भी जारी

झाग से ढकी यमुना नदी में नाव से सवारी करने वाले बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने यमुना के तट पर छठ पूजा की अनुमति इसलिए नहीं दी, क्योंकि वह प्रदूषण की वजह से हुए झागों को छिपाना चाहती थी.

उन्होंने यह भी कहा- "दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 2013 से कह रहे हैं कि उनकी सरकार पांच साल में यमुना को नहाने लायक बना देगी. आज दिल्ली की हवा और पानी दोनों जहरीली हैं. उन्होंने यमुना पर छठ का कार्यक्रम नहीं होने दिया ताकि कोई यह देख न सके कि नदी कितनी जहरीली हो गई है."

इस पर पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने भी नदी के जहरीले झागों के लिए हरियाणा सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा - "मनोज तिवारी को हरियाणा की बीजेपी सरकार से यह सवाल करना चाहिए. दिल्ली यमुना में जहरीला पानी नहीं छोड़ती, यह काम हरियाणा करता है."

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मैली यमुना पर दिल्ली सरकार का पक्ष

आप नेता और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा का कहना है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश, नजफगढ़ और शाहदरा नालों के ज़रिए यमुना में एक दिन में लगभग 155 मिलियन गैलन अनुपचारित गंदा पानी छोड़ रहे हैं. उनका कहना है कि इस पानी में बहुत सारा जैविक कचरा, कैमिकल और डिटर्जेंट होता है. यह पानी जब ओखला बैराज की ऊंचाई से गिरता है, तो झाग बनते हैं.

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर की पेपर और चीनी मिलें भी, ओखला बैराज में हिंडन नहर के ज़रिए यमुना में सर्फेक्टेंट युक्त अनुपचारित अपशिष्ट जल छोड़ती हैं.

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने के लिए काम कर रही है, ताकि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के संशोधित मानकों पर खरा उतरा जा सके. ऐसे में, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को भी नदी को साफ रखने में अपना योगदान देना चाहिए.

 

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