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Pollution Updates: प्रदूषण से लगातार खराब हो रही दिल्ली की हवा, इन 5 शहरों में भी 'गंभीर' स्थिति

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार रविवार की सुबह दिल्ली के आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 431, जहांगीरपुरी में 465, पंजाबी बाग में 426  और रोहिणी में 424 रिकॉर्ड किया गया. जो कि गंभीर श्रेणी में आता है.

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Delhi Air Pollution: प्रदूषण के कारण धुंध (फोटो-PTI)
Delhi Air Pollution: प्रदूषण के कारण धुंध (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजधानी दिल्ली में बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर
  • प्रदूषण के कारण हवा की गुणवत्ता में गिरावट
  • दिवाली पर ऐसी ही स्थिति रहने की आशंका

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर में वायु प्रदूषण (Pollution) गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बढ़कर 440 तक पहुंच गया जबकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में भी वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई है.  

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार रविवार की सुबह दिल्ली के आनंद विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 431, जहांगीरपुरी में 465, पंजाबी बाग में 426  और रोहिणी में 424 रिकॉर्ड किया गया. जो कि गंभीर श्रेणी में आता है.

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) दिल्ली के सबसे करीबी पांच शहरों की हवा में प्रदूषण कारक तत्वों PM 2.5 और PM 10 की मात्रा भी अधिक रही. एयर क्वालिटी इंडेक्स गुरुग्राम में 439, गाजियाबाद में 436, ग्रेटर नोएडा में 428, नोएडा में 426 और फरीदाबाद में 414 दर्ज किया गया. 

बता दें कि 0 और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच 'मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' माना जाता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली तक दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में ही बने रहने की आशंका जताई है. 

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दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शनिवार सुबह को 443 और शाम को 427 दर्ज किया गया. जिसमें PM 2.5 कणों के स्तर में पराली जलाने की भागीदारी लगभग 32 फीसदी रही. वहीं, प्रदूषण का स्तर बढ़ने से हवा जहरीली होने के साथ आसमान में सुबह-शाम स्मॉग यानी धुंध की चादर छाने लगी है. जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो रही है. ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं में कमी नहीं आती है तो हालात बेहतर होने की कोई उम्मीद नहीं है.

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