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'सत्ता में आए तो एक घंटे में खत्म कर देंगे बिहार से शराबबंदी', प्रशांत किशोर का बड़ा बयान

प्रशांत किशोर ने कहा कि शराबबंदी के कारण अवैध घरेलू शराब वितरण बढ़ गया है और राज्य को 20,000 करोड़ रुपये के संभावित उत्पाद शुल्क राजस्व से वंचित कर दिया है. उन्होंने राजनेताओं और नौकरशाहों पर भी अवैध शराब व्यापार से लाभ उठाने का आरोप लगाया.

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प्रशांत किशोर. (फाइल फोटो)
प्रशांत किशोर. (फाइल फोटो)

बिहार की राजनीति में अपना सिक्का आजमाने उतरे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अगर उनकी नई राजनीतिक पार्टी सत्ता में आती है तो वह एक घंटे के भीतर ही बिहार में शराबबंदी को समाप्त कर देंगे. मीडिया से बात करते हुए जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी 'अपनी सरकार बनाने के एक घंटे के भीतर शराबबंदी को समाप्त कर देगी.'

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प्रशांत किशोर ने कहा कि शराबबंदी का फैसला नीतीश कुमार की तरफ से एक ढकोसला है. किशोर ने मौजूदा शराबबंदी की आलोचना की और दावा किया कि यह अप्रभावी साबित हुई है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी के कारण अवैध घरेलू शराब वितरण बढ़ गया है और राज्य को 20,000 करोड़ रुपये के संभावित उत्पाद शुल्क राजस्व से वंचित कर दिया है. उन्होंने राजनेताओं और नौकरशाहों पर भी अवैध शराब व्यापार से लाभ उठाने का आरोप लगाया. किशोर ने यह भी कहा कि वे 'काबिलियत की राजनीति' में विश्वास करते हैं और शराबबंदी पर बोलने से नहीं हिचकिचाएंगे. 

यह भी पढ़ें: प्रशांत किशोर की पिच पर बैटिंग कर रहे तेजस्वी यादव? RJD ने आखिर हरे गमछे पर क्यों लगाया बैन

40 मुस्लिम कैंडिडेट उतारने का ऐलान

हाल ही में प्रशांत किशोर ने मंच से ऐलान किया था कि उनकी पार्टी अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में कम से कम 40 मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट देगी.

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राजनीतिक के अभिषेक बच्चन हैं तेजस्वी: पीके 

पीके ने तेजस्वी की तुलना अभिषेक और खुद को शाहरुख बताते हुए कहा कि उसी तरह तेजस्वी की भी पहचान सिर्फ यह है कि वह लालू जी के बेटे हैं. तेजस्वी को तो जीडीपी और जीडीपी विकास दर में भी फर्क नहीं पता और यह बिहार का दुर्भाग्य है. पीके ने कहा कि ज्ञान और बुद्ध की धरती पर हमने अनपढ़ और बदमाश लोगों को अपना नेता बना रखा है लेकिन जिस तरह से शाहरुख खान ने बॉलीवुड में अपना रास्ता और अपनी पहचान खुद बनाई है, उसी तरह राजनीति में प्रशांत किशोर ने अपनी पहचान खुद बनाई है, इसलिए हमारा रास्ता सीधा नहीं है. जन सुराज के सूत्रधार ने कहा, अब जनता को तय करना है कि उनको भरोसा उन पर करना है जिसने अपनी बुद्धि और मेहनत से अपने लिए रास्ता बनाया है या उन पर जो अपने बाबू जी (पिता) के नाम से आगे बढ़े हैं.

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