President Election 2022: देश के 15वें राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज वोटिंग हो रही है. इसमें करीब 4,800 सांसद और विधायक वोट डालेंगे.
इस चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) की जीत लगभग तय मानी जा रही है. उन्हें 60% से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान है.
द्रौपदी मुर्मु अगर ये चुनाव जीत जातीं हैं, तो वो देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी. उनसे पहले प्रतिभा पाटिल इस देश की राष्ट्रपति रह चुकीं हैं.
राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार कौन हैं? वोटिंग कैसे होगी? वोटों की गिनती कैसे होगी? इन सभी जरूरी सवालों के जवाब जानें...
1. राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार कौन?
- द्रौपदी मुर्मु, एनडीएः 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में जन्म हुआ. वो आदिवासी संथाल परिवार से ताल्लुक रखतीं हैं. उन्होंने श्याम चरण मुर्मू से शादी की है. उन्होंने एक टीचर के रूप में करियर शुरू किया. फिर क्लर्क की नौकरी की. 1997 में पार्षद बनीं. 2000 और 2009 में मयूरभंज की रायगंज सीट से दो बार विधायक बनीं. मई 2015 में झारखंड की राज्यपाल बनीं.
- यशवंत सिन्हा, विपक्षः 6 नवंबर 1937 को पटना के कायस्थ परिवार में जन्म. 1960 में आईएएस बने. करीब 24 साल तक इस सेवा में रहे. 1984 में आईएएस के पद से इस्तीफा दिया और राजनीति में आ गए. जनता पार्टी से शुरुआत की और फिर बीजेपी में आ गए. 1998, 1999 और 2009 में हजारीबाग से बीजेपी सांसद रहे. नवंबर 1990 से जून 1991 तक चंद्रशेखर की सरकार में वित्त मंत्री रहे. 2018 में बीजेपी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए.
2. दोनों से किसके जीतने के आसार?
- राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत लगभग तय मानी जा रही है. उन्हें 60% से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान है.
- माना जा रहा है कि द्रौपदी मुर्मु को कुल 10,86,431 वोटों में से 6.67 लाख से ज्यादा वोट मिल सकते हैं. इस हिसाब से उन्हें 61% वोट मिल सकते हैं.
3. चुनाव में कौन-कौन वोट डालेगा?
- देश में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है यानी जनता इसमें वोट नहीं कर सकती है. चुनावी प्रक्रिया में राज्यसभा और विधान परिषद में नामित सदस्य और विधानपार्षद भी शामिल नहीं हो सकते. केवल निर्वाचित राज्यसभा सांसद, लोकसभा सांसद और विधायक ही वोट दे सकते हैं.
- अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री विधान परिषद का सदस्य है तो वह भी राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान नहीं कर सकता है.
- राष्ट्रपति चुनाव में एकल हस्तांतरणीय मत यानी सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के जरिए मतदान होता है. इसका मतलब यह हुआ कि राज्यसभा, लोकसभा और विधानसभा का एक सदस्य एक ही वोट कर सकता है.
4. EVM नहीं, बैलेट से होती है वोटिंग
- देश के सर्वोच्च नागरिक का चुनाव आम चुनावों की तरह गोपनीय तरीके से होता है. राष्ट्रपति चुनाव में ईवीएम तो नहीं लेकिन बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है.
- गोपनीय मतदान का मतलब निर्वाचक अपना वोट किसी को दिखा नहीं सकते. अगर वह ऐसा करते हैं तो उनका वोट रद्द हो जाएगा.
- इसके अलावा अगर किसी राजनीतिक दल को यह पता चल जाए कि उसका कोई सदस्य पार्टी की इच्छा के विरुद्ध वोट कर रहा है तो दल अपने सदस्य के खिलाफ व्हिप जारी नहीं कर सकते.
- लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को जहां हरे रंग के मतपत्र दिए जाएंगे, वहीं विधायकों को गुलाबी रंग के मतपत्र मिलेंगे.
5. राष्ट्रपति चुनाव में वोटों का क्या है गणित?
- राष्ट्रपति का चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होता है. इसमें वोटर को प्राथमिकता के आधार पर वोट देना होता है. जैसे- अगर चुनाव में तीन उम्मीदवार खड़े हैं, तो वोटर को अपनी पहली, दूसरी और तीसरी पसंद बतानी होगी. चूंकि, इस चुनाव में दो ही उम्मीदवार हैं, इसलिए वोटर को पहली और दूसरी पसंद ही बतानी होगी.
- चुनाव में लोकसभा के 543, राज्यसभा के 233 और विधानसभा के 4,033 सदस्य वोटिंग करेंगे. इस तरह कुल 4,809 वोटर्स होंगे. लोकसभा और राज्यसभा के 776 सांसद वोट डालेंगे. उनके वोटों की वैल्यू 5,43,200 है. वहीं, सभी विधायकों की कुल वोट वैल्यू 5,43,231 है.
- इस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में कुल वोटों की वैल्यू 10,86,431 हो गई. राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए कम से कम 5,43,216 वोटों की जरूरत होगी.
6. कैसे तय होती है वोटों की वैल्यू?
- विधायकों और सांसदों के वोट की वैल्यू 1971 की जनगणना के आधार पर तय होती है. किसी राज्य के विधायक के पास कितने वोट हैं, इसका पता लगाने का एक फॉर्मूला होता है.
- इसके लिए राज्य की आबादी को राज्य के विधायकों की संख्या से भाग दिया जाता है. इसके बाद जो संख्या आती है, उसे 1000 से भाग दिया जाता है. फिर जो संख्या मिलती है, वही विधायकों की वोट की वैल्यू होती है. हर राज्य के विधायकों की वोट की वैल्यू अलग-अलग होती है.
- वहीं, सांसदों के वोट की वैल्यू निकालना आसान है. देश के सभी राज्यों के विधायकों की वोट की वैल्यू को जोड़ा जाता है और उसे फिर लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की कुल संख्या से भाग दिया जाता है. फिर जो संख्या आती है, वही एक सांसद के वोट की वैल्यू होती है.
7. अगर किसी राज्य में विधानसभा भंग हो तो?
- संविधान के अनुच्छेद के 71 (4) में स्पष्ट रूप से लिखा है कि राष्ट्रपति पद का चुनाव किसी भी स्थिति में नहीं रुकेगा.
- अगर किसी राज्य की विधानसभा भंग है या कई राज्यों में विधानसभा सीटें रिक्त हैं तो भी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव तय समय से ही होंगे.
8. नए राष्ट्रपति शपथ कब लेंगे?
- मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है. इससे पहले देश को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा.
- राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटों की गिनती 21 जुलाई को होगी. जबकि, नए राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ लेंगे.
9. राष्ट्रपति पद का महत्व क्या है?
- अक्सर ऐसा कहा जाता है कि सारे अधिकार और शक्तियां प्रधानमंत्री के पास होती हैं, तो राष्ट्रपति के पद का महत्व क्या है? लेकिन ऐसा नहीं है. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अपने-अपने क्षेत्र हैं.
- राष्ट्रपति का प्रमुख दायित्व प्रधानमंत्री को नियुक्त करना और संविधान का संरक्षण करना है. कोई भी बिल उनकी मंजूरी के बिना पास नहीं हो सकता.
- राष्ट्रपति मनी बिल को छोड़कर किसी भी बिल को पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं. राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के प्रमुख होते हैं.
10. अब तक कितने राष्ट्रपति रह चुके हैं?
डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति थे. रामनाथ कोविंद 14वें राष्ट्रपति हैं.
1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद (26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962)
2. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन (13 मई 1962 से 13 मई 1967)
3. जाकिर हुसैन (13 मई 1967 से 3 मई 1969)
4. वीवी गिरी (24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974)
5. फखरूद्दीन अली अहमद (24 अगस्त 1974 से 11 फरवरी 1977)
6. नीलम संजीव रेड्डी (25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982)
7. ज्ञानी जैल सिंह (25 जुलाई 1982 से 25 जुलाई 1987)
8. रामास्वामी वेंकटरमन (25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992)
9. शंकर दयाल शर्मा (25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997)
10. केआर नारायनन (25 जुलाई 1997 से 25 जुलाई 2002)
11. एपीजे अब्दुल कलाम (25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007)
12. प्रतिभा पाटिल (25 जुलाई 2007 से 25 जुलाई 2012)
13. प्रणब मुखर्जी (25 जुलाई 2012 से 25 जुलाई 2017)
14. रामनाथ कोविंद (25 जुलाई 2017 से)