कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी में शामिल होने वाले अभिजीत गांगुली शनिवार को अपनी राजनीतिक रैली की. बीजेपी द्वारा आयोजित इस रैली में अभिजीत गांगुली ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए. ममता सरकार को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था की हालत बुरी बिगड़ी हुई है और वरिष्ठ अधिकारियों, नेताओं के आदेश पर पुलिस लोगों को परेशान करती हैय
उन्होंने आगे कहा, 'मुझसे पूछा गया कि क्या बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए? मैं कहता हूं हां, बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए. ममता बनर्जी संदेशखाली नहीं गईं. उनके सांसद (नुसरत जहां) भी वहां नहीं गईं. वह डांस करने में व्यस्त थीं.'
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कुछ दिन पहले ही थामा था बीजेपी का दामन
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही अभिजीत गांगुली ने कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायधीश के पद से इस्तीफा दिया था और बाद में उन्होंने बीजेपी मुख्यालय में जाकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी. सूत्रों के मुताबिक़ उन्हें तमलुक से चुनाव लड़ाया जा सकता है. अभिजीत गांगुली के राजनीति में उतरने के लिए जज पद से इस्तीफा दिए जाने के इस फैसले पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं.
कौन हैं अभिजीत गांगुली
जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय (गांगुली) जज बनने से पहले उन्होंने 24 वर्षों तक वकालत की. वह 2 मई 2018 को कलकत्ता हाई कोर्ट के एडिशनल जज बने, फिर 2020 में उन्हें प्रमोट होकर स्थायी जज बने. अब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया है.जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्यायने कहा कि उन्होंने अब राजनीति में उतरने का फैसला किया है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें मैदान में आकर लड़ने की चुनौती दी थी.
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उन्होंने कहा कि वह पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति से खुश नहीं हैं और राज्य के लोगों के लिए कुछ करना चाहते हैं.कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने 5 मार्च 2024 को इस्तीफा दे दिया. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं 7 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहा हूं' जस्टिस अभिजीत इसी साल अगस्त में सेवानिवृत्त होने वाले थे.