एक फरवरी यानी आज मंगलवार को देश का आम बजट आ रहा है. वहीं इससे पहले प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल (Principal Economic Advisor Sanjeev Sanyal) ने कहा कि वैश्विक मुद्रा स्फीति लंबे समय तय परेशानी का सबब रहा, लेकिन इसके बावजूद रोजगार सृजन में सुधार हुआ है. साथ ही कहा कि लॉकडाउन में रोजगार पर पड़ा बुरा असर पड़ा.
इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण को तैयार करने वाली टीम को लीड करने वाले संजीव सान्याल ने कहा कि कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में हालात लगातार बेहतर हो रहे हैं. यह कोविड से पहले की स्थिति में आ चुके हैं.
संजीव सान्याल ने कहा कि कृषि और औद्योगिक क्षेत्र कोविड से पहले के स्तर से काफी ऊपर हैं. साथ ही कहा कि सेवा क्षेत्र कोविड काल में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था. लेकिन स्थितियां पटरी पर आ गई हैं. साथ ही वित्त और लोक प्रशासन में भी हालत सुधरे हैं. लेकिन सिर्फ संपर्क-गहन सेवाएं (contact intensive services) पिछड़ रही हैं.
'मुद्रास्फीति से प्रभावित होती है अर्थव्यवस्था'
बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर संजीव सान्याल ने कहा कि वैश्विक मुद्रास्फीति एक ऐसा मुद्दा है, जो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहा है. भू-राजनीति के कारण तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है. इससे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है.
'कमजोर वर्ग के लिए सुरक्षा घेरा जरूरी'
सान्याल ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में इस बात पर जोर दिया गया है कि अनिश्चितता की दुनिया में आर्थिक नीति कैसे बनाते हैं. सान्याल ने कहा कि कमजोर वर्ग के लिए सुरक्षा घेरा बना रहे, इसलिए नीति निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है.
'भारत में रोजगार एक जटिल मुद्दा'
भारत में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है. इसे लेकर संजीव सान्याल ने कहा कि रोजगार सृजन पर अक्सर चर्चा होती रहती है. उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण लगे पहले लॉकडाउन के दौरान रोजगार पर काफी बुरा असर पड़ा था. हालांकि अब इसमें तेजी से सुधार हो रहा है. सान्याल ने कहा कि रोजगार एक मुश्किल मुद्दा है, क्योंकि भारत में रोजगार के मामले में कई ग्रे शेड हैं. उन्होंने कहा कि गिग इकॉनमी भी इसकी एक महत्वपूर्ण वजह है.
क्रिप्टोकरंसी पर बहस जारी
क्रिप्टोकरंसी के मुद्दे पर सान्याल ने कहा कि इसे लेकर संसद और वित्त मंत्रालय में बहस हो रही है. अन्य देशों में इसका क्या असर हुआ है, हम लोग इस पर भी बारीकी से नजर बनाए हुए हैं. हालांकि कुछ समय बाद इसे लेकर भी एक तस्वीर स्पष्ट होगी.
'चीन की उपेक्षा करना संभव नहीं'
प्रधान आर्थिक सलाहकार ने कहा कि अल्पावधि में चीन की उपेक्षा करना संभव नहीं है. भारत ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कुछ योजनाएं तैयार की हैं. क्योंकि चीन विश्व अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.