यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर ने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के सामने बड़ा दावा किया है. उन्होंने ED को बताया कि उन्हें प्रियंका गांधी वाड्रा से एमएफ हुसैन (MF Hussain) की एक पेंटिंग खरीदने के लिए मजबूर किया गया था. उन्होंने कहा कि जिस रकम का भुगतान किया गया था उसका उपयोग गांधी परिवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इलाज के लिए किया था. बता दें कि ये बात संघीय धन शोधन रोधी एजेंसी (Federal Anti-Money Laundering Agency) की ओर से दायर आरोपपत्र में सामने आई है.
इतना ही नहीं, राणा कपूर ने ED के सामने कई दावे किए. राणा ने ED को बताया कि तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने उनसे कहा था कि अगर वह एमएफ हुसैन की पेंटिंग नहीं खरीदेंगे तो उन्हें गांधी परिवार के साथ संबंध बनाने में दिक्कत होगी. साथ ही, उन्हें 'पद्म भूषण' पुरस्कार भी नहीं मिल पाएगा.
मिलिंद ने बताया पैसे कहां खर्च किए गए
एजेंसी के मुताबिक, राणा कपूर का बयान मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यस बैंक के सह-संस्थापक, उनके परिवार, दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के प्रमोटर कपिल और धीरज वधावन समेत अन्य के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में दायर दूसरे पूरक आरोपपत्र (कुल मिलाकर तीसरा) के तहत दर्ज किए गए है. राणा कपूर ने दावा किया कि उन्होंने 2 करोड़ रुपये के चेक का भुगतान किया था. इसके बाद मिलिंद देवड़ा ने उन्हें बताया था कि बिक्री की आय का उपयोग गांधी परिवार द्वारा न्यूयॉर्क में सोनिया गांधी के इलाज में किया गया था.
'अहमद पटेल ने भी बनाया था दबाव'
कपूर ने ईडी को बताया कि सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल ने उनसे कहा था कि सोनिया गांधी के इलाज के लिए सही समय पर गांधी परिवार की मदद करके उन्होंने अच्छा काम किया है. लिहाजा 'पद्म भूषण' पुरस्कार के लिए उनके नाम पर विचार किया जाएगा. इसके साथ ही राणा कपूर ने ED को दिए बयान में दावा किया है कि साल 2010 में मुरली देवड़ा ने राणा कपूर से कहा था कि अगर वह पेंटिंग नहीं खरीदेंगे को उन पर और यस बैंक पर इसका प्रतिकूल असर हो सकता है.
'मिलिंद देवड़ा ने कई कॉल किए थे'
चार्जशीट के मुताबिक, राणा कपूर ने पेंटिंग खरीदने के बारे में कहा कि सबसे पहले तो मैं यह बताना चाहता हूं कि यह एक ऐसी खरीद थी जिसके लिए मैं कभी तैयार नहीं था. लेकिन मिलिंद देवड़ा ने उन्हें मनाने के लिए उनके घर और कार्यालय के कई बार चक्कर लगाए थे. इतना ही नहीं, उन्होंने मुझे इस संबंध में कई मोबाइल नंबरों से कॉल और मैसेज भी किए थे. मैं इस सौदे के लिए राजी नहीं था. मैंने कई बार उनके कॉल और मैसेजों के अवॉइड भी किया था.
2020 से न्यायिक हिरासत में हैं राणा कपूर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया था कि राणा कपूर और दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटर कपिल और धीरज वधावन ने संदिग्ध लेनदेन के माध्यम से 5,050 करोड़ रुपये के फंड की हेराफेरी की थी. बता दें कि वह मार्च 2020 में हुई गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं.