पेट्रोल और डीजल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं. बेतहाशा बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतें जीएसटी के दायरे में लाई जाएं, ये मांग भी जोर पकड़ रही है. इन सबके बीच देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में शामिल करने में केंद्र सरकार के स्तर से ही रोड़े हैं. उन्होंने यह भी कहा है कि जब काउंसिल इसके संबंध में निर्णय लेगी और रेट निर्धारित करेगी, तब काउंसिल इसे जीएसटी के दायरे में लेने पर विचार करेगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल पर केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों की ओर से कर लगाए जाते हैं. केंद्र सरकार तय राशि वसूलती है जबकि राज्यों की दर कीमतों में इजाफे के साथ बढ़ती जाती है. उन्होंने कहा कि इस बजट में कृषि डेवलपमेंट सेस भी लगाया गया था. वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.
उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमत में कई लेयर हैं. इसे जीएसटी के दायरे में लाने में केंद्र सरकार की ओर से रोड़े हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि जब काउंसिल तय करेगा तब इसे भी जीएसटी में शामिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अभी इसे शून्य रेट पर रखा गया है. जीएसटी काउंसिल इसपर विचार करेगी. जीएसटी कम्पेन्सेशन को लेकर निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी मुआवजा परिषद में जो भी फॉर्मूला तय किया जाता है, वह सबके लिए काम करता है.
वित्त मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में काउंसिल के नियमों के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से लगातार पैसे दिए गए और हर हफ्ते भुगतान किया जा रहा था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स आवश्यक वस्तुओं की निगरानी कर रहा है. उन्होंने कहा कि तिलहन का उत्पादन प्रभावित हुआ है जिससे इसकी कीमतें बढ़ी हैं.
वैक्सीनेशन को लेकर निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यों को वैक्सीन की आपूर्ति हर महीने की जाती है. उन्होंने कहा कि किस राज्य को कितनी वैक्सीन दी जानी है, इसकी घोषणा सात दिन पहले ही कर दी जाती है. राज्य इसके बाद परेशान करते हैं.