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BSP कैंडिडेट को सम्मान में सिक्कों से तौला जा रहा था, तराजू टूटकर गिरने से सिर में लगी चोट

बीएसपी कार्यकर्ताओं द्वारा सिक्कों से तौलते वक्त लकड़ी का तमगा टूटकर डॉ ऋतु सिंह के सिर में लग गया और वो बुरी तरह घायल हो गईं. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया.

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सिक्कों से तौली जा रही थीं BSP कैंडिडेट, तराजू टूटने से सिर में लगी चोट
सिक्कों से तौली जा रही थीं BSP कैंडिडेट, तराजू टूटने से सिर में लगी चोट

पंजाब (Punjab) के चंडीगढ़ से बीएसपी उम्मीदवार डॉ ऋतु सिंह हादसे का शिकार हो गई हैं. सोमवार को एक कालोनी में पार्टी कार्यकर्ता डॉ ऋतु सिंह को सिक्कों से तौल रहे थे. इसी वक्त लकड़ी का तमगा टूटकर उनके सिर में लग गया और वो बुरी तरह घायल हो गईं. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया. उनके सिर पर कुछ टांके लगे और उसके बाद घर भेज दिया गया.

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पंजाब में आखिरी चरण में वोटिंग

पंजाब में सातवें चरण में 1 जून को मतदान होगा. सूबे में कुल 13 लोकसभा सीटें हैं और राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है. यहां इंडिया ब्लॉक में शामिल AAP और कांग्रेस के बीच संयुक्त उम्मीदवार उतारने पर बात नहीं बन पाई है. साल 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 8 सीटों पर चुनाव जीता था. बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल को 2-2 सीटों पर जीत मिली थी. एक सीट पर आम आदमी पार्टी के भगवंत मान जीते थे. कांग्रेस को 40.6 फीसदी, SAD 27.8 फीसदी, बीजेपी को 9.7 फीसदी, AAP को 7.5 फीसदी वोट मिले थे.

पंजाब में बीजेपी के लिए कड़ी परीक्षा

ठीक ऐसे ही पंजाब में बीजेपी का बड़ा और कड़ा इम्तिहान है. पंजाब में बीजेपी का अकाली दल से गठबंधन था, एनडीए को 13 में से 4 सीटों पर जीत मिली थी, 2 सीट पर अकाली और 2 पर बीजेपी जीती थी. अबकी बार किसान आंदोलन के चलते अकाली दल एनडीए का हिस्सा नहीं है, वो अकेले चुनाव लड़ रही है. यानी 28 साल बाद बीजेपी अकेले चुनाव लड़ रही है, बीजेपी की चुनावी लड़ाई, आम आदमी पार्टी ,कांग्रेस और अकाली दल से है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है लिहाजा सीधी टक्कर आप से है.

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इस बार मैदान में अकेली लड़ रही बीजेपी

पंजाब में बीजेपी इस बार के लोकसभा चुनावों में पहली बार अकेले चुनाव लड़ रही है. इस पर विवाद हो सकता है कि शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन तोड़ना पार्टी की रणनीति थी या अकालियों के साथ समझौता ही नहीं हो सका. पर इसमें कोई संदेह नहीं है कि पार्टी अब इस राज्य में बिना किसी सहारे के अकेले खड़ा होना चाहती है. जिस तरह दूसरे दलों के मजबूत लोगों को पार्टी में शामिल करके चुनाव लड़ाया जा रहा है, यह उसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह बीजेपी पंजाब में फतह हासिल कर लेगी. जैसी परिस्थितियां बन रही हैं, उससे यह नहीं लगता कि बीजेपी कोई बहुत बड़ा कमाल करने जा रही है. राज्य बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ खुद कहते हैं कि यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक अहम कदम है. उनका दावा है कि पार्टी इस बार अपने वोट शेयर में काफी सुधार करेगी और 2027 के चुनावों में जीत हासिल करेगी.

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