सुप्रीम कोर्ट ने बीते हफ्ते अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के कोटे में कोटा दिए जाने को मंजूरी दी थी. कोर्ट ने कहा था कि SC-ST कैटेगरी के भीतर नई सब कैटेगरी बना सकते हैं और इसके तहत अति पिछड़े तबके को अलग से रिजर्वेशन दे सकते हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरोध में भी आवाजें उठने लगी हैं.
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के उप-वर्गीकरण की मंजूरी देने वाले फैसले से बिल्कुल सहमत नहीं है. उन्होंने कहा कि एससी और एसटी समुदायों ने अत्याचारों का सामना एक समूह के रूप में किया है और इन समूहों के भीतर किसी भी तरह का उप-वर्गीकरण करना सही नहीं होगा.
मायावती ने कहा कि आरक्षण में वर्गीकरण का मतलब आरक्षण को खत्म कर उसे सामान्य वर्ग को देने जैसा होगा. हमारी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं है और हम रिजर्वेशन में से किसी तरह के वर्गीकरण के खिलाफ हैं.
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अगस्त के इस फैसले से 20 साल पुराने दिए गए फैसले को पलट दिया है, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के भीतर किए जाने वाले वर्गीकरण को मान्यता देने से इनकार किया गया था और कहा गया था कि इन जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण नहीं किया जा सकता क्योंकि ये एक ही समरूप अर्थात समान वर्ग में आते हैं.
मायावती ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के भीतर उपवर्गीकरण किया जाता है तो इससे मौजूदा समय में लागू आरक्षण के अनुसार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अनेक पद खाली रह जाएंगे क्योंकि जिन सीमित वर्ग की उपजातियों को आरक्षण दिया जाएगा, उसमें खाली पद के सापेक्ष उतने अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हो पाएंगे और ऐसी स्थिति में ये बची हुई रिक्तियां सामान्य वर्ग के हिस्से में चली जाएंगी.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से अपील की है कि संसद के इसी सत्र में संविधान में उचित संशोधन लाकर यह स्पष्ट करें कि अनुच्छेद 341 और 342 के तहत राष्ट्रपति द्वारा घोषित एससी-एसटी जातियों के संबंध में भविष्य में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ व उपवर्गीकरण करने का अधिकार किसी को भी नहीं होगा.
चिराग पासवान ने भी जताया कोर्ट के फैसले पर विरोध
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति में वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी. हमारी पार्टी सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करेगी कि वह इस फैसले की समीक्षा करे. हम अदालत में समीक्षा याचिका दायर करेंगे.
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कैटेगरी के भीतर नई सब कैटेगरी बनाने से समाज के वंचित वर्ग के उत्थान का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण का आधार छुआछूत है, जो समाज में अभी भी जारी है.
क्या बंद कमरे में बैठकर कुछ भी फैसला ले लिया जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जिन जजों ने ये ऑर्डर दिया, उसमें एससी-एसटी के कितने हैं. ये बहुत जरूरी है कि अगर आप वर्गीकरण करना ही चाह रहे हैं तो सुप्रीम कोर्ट से इसकी शुरुआत होनी चाहिए.
चंद्रशेखर ने कहा कि अगर आपको वर्गीकरण करना ही है तो सर्वोच्च संस्था से ही क्यों ना किया जाए? क्या एससी-एसटी की मॉनिटिरिंग की है, जो आपने ऑर्डर दिया था रिजर्वेशन में प्रमोशन का. क्या एससी और एसटी का बैकलॉग भरा गया? क्या आपको जानकारी है कि एससी-एसटी को आरक्षण मिल रहा है, उसे क्या आंकड़ें हैं. आपके पास आर्थिक स्थिति के क्या आंकड़े हैं? बंद कमरे में बैठकर कुछ भी फैसला ले लिया जाएगा. क्या ये आर्टिकल 341 का उल्लंघन नहीं है?