आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को राज्यसभा में सुझाव दिया कि सरकार को अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने से रोककर इसे एक सौदेबाजी के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 27 प्रतिशत टैरिफ पर पुनर्विचार किया जा सके.
सवाल जवाब के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए, चड्ढा ने अमेरिकी टैरिफ के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई और कहा कि इससे जीडीपी में "50-100 आधार अंकों की गिरावट" आ सकती है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या हमें एलन मस्क की स्टारलिंक को मंजूरी रोककर इसे सौदेबाजी के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह अमेरिका का एक प्रमुख चेहरा हैं?"
AAP सांसद ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका के प्रति अटूट निष्ठा और मित्रता दिखाई है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने ऊंचे टैरिफ लगाए हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकते हैं. उन्होंने कहा, "भारत ने अमेरिका को लाल कालीन बिछाकर स्वागत किया, लेकिन बदले में हमें टैरिफ मिले. भारत ने अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं, लेकिन फिर भी यह टैरिफ लगा दिया गया."
चड्ढा ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले सप्ताह वित्त मंत्री ने ‘गूगल टैक्स’ यानी अमेरिकी कंपनियों जैसे मेटा और अमेज़न पर लगाए गए 6 प्रतिशत समानिकरण शुल्क को हटाने के लिए संशोधन किया, जिससे भारत को 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिया जवाब
इस पर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा, "मैं किसी विशेष कंपनी के पक्ष में नहीं हूं, मैं नागरिकों के हित में हूं."
उन्होंने बताया कि सरकार भारतीय उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके साथ ही सख्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत में पहले ही दो कंपनियों - रिलायंस और भारती एयरटेल को सैटेलाइट इंटरनेट टेक्नोलॉजी के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं.
यह उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही रिलायंस और भारती एयरटेल, दोनों ने स्पेसएक्स के साथ सौदे किए थे, ताकि भारत में स्टारलिंक सेवाएं लाई जा सकें, हालांकि यह अभी नियामकीय मंजूरी के अधीन है.
सिंधिया ने कहा, "यदि आप सभी सुरक्षा मानकों को पूरा कर लेते हैं, जो सभी उपग्रह संचार प्रदाताओं के लिए समान हैं, तो भारत के दरवाजे आपके लिए खुले हैं. ग्राहक तय करेंगे कि वे किस सेवा प्रदाता को चुनना चाहते हैं."
स्टारलिंक के संभावित दुरुपयोग पर चिंता
राघव चड्ढा ने यह भी चिंता जताई कि स्टारलिंक का गलत इस्तेमाल हो सकता है. उन्होंने अंडमान में हुई एक ड्रग तस्करी का उदाहरण दिया, जिसमें कथित रूप से तस्करों ने स्टारलिंक का उपयोग नेविगेशन के लिए किया था, लेकिन जब भारतीय सरकार ने इस मामले में जानकारी मांगी, तो स्टारलिंक ने डेटा गोपनीयता कानूनों का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया.
इस पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने टिप्पणी की कि राघव चड्ढा डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क के मुद्दों को लेकर अत्यधिक जुनूनी नजर आते हैं और उन्हें थोड़ा अधिक भारतीय संदर्भ" वाले सवाल उठाने चाहिए. इसके जवाब में चड्ढा ने कहा, "मैं किसी भी मुद्दे को लेकर जुनूनी हूं, जो भारत के हितों, विशेष रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है. यही मुझे इस सदन में लाता है और मैं इसी तरह सभी महत्वपूर्ण मुद्दे उठाता रहूंगा."
स्टारलिंक की गति भारत की ब्रॉडबैंड सेवाओं से कमजोर
संचार राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने स्टारलिंक को लेकर कहा कि भारत की टेरेस्ट्रियल ब्रॉडबैंड स्पीड, स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट सेवाओं की तुलना में 188 गुना अधिक है. उन्होंने यह भी बताया कि स्टारलिंक के वैश्विक ग्राहक केवल 46 लाख हैं, जबकि भारत में 990 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं.
इसके अलावा, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत में उपग्रह संचार प्रदाताओं के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत में परिचालन करने के लिए कंपनियों को स्थानीय गेटवे, भारतीय धरती पर ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर, और यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय ग्राहकों का सारा डेटा घरेलू गेटवे से होकर गुजरे. उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया का सबसे सस्ता टेलीकॉम बाजार है, जहां डेटा की कीमत मात्र 11 सेंट प्रति जीबी है, जबकि वैश्विक औसत 2.59 अमेरिकी डॉलर है, जो इसे वैश्विक डेटा व्यवसायों के लिए आकर्षक बनाता है.