पेगासस जासूसी विवाद समेत अन्य मसलों पर विपक्ष एकजुट होकर केंद्र सरकार को सड़क से संसद (Parliament) तक घेरना चाहता है. बीते दो दिनों में विपक्षी पार्टियों (Opposition Parties) की एक साथ दो बैठकें हुई हैं, जिसमें सरकार को घेरने की रणनीति बनी है. दोनों ही बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने हिस्सा लिया और वह विपक्ष की अगुवाई करते हुए नज़र आए.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के दिल्ली में होने के बावजूद उनकी पार्टी के किसी प्रतिनिधि ने इन दोनों बैठकों में हिस्सा नहीं लिया. साथ ही बसपा ने भी राहुल गांधी की दूसरी बैठक से दूरी बनाए रखी है. ऐसे में इस रस्साकशी को खुद को एकजुट विपक्ष के नेता के तौर पर पेश करने के तौर पर देखा जा रहा है.
बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को पांच दिवसीय दौरे पर दिल्ली आई हैं. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रही हैं. मंगलवार को ममता ने कांग्रेस नेता कमलनाथ और आनंद शर्मा से मुलाकात की, तो वहीं बुधवार को विपक्ष के दूसरे दलों के नेताओं से मिलने का प्रोग्राम तय है. ममता के दिल्ली में कदम पड़ने के साथ ही राहुल गांधी भी एक्टिव मोड में दिख रहे हैं.
विपक्षी पार्टियों की बैठक में राहुल गांधी एक्टिव
मंगलवार को विपक्षी पार्टियों ने संसद भवन में बैठक की थी, जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए थे. इस मीटिंग में करीब एक दर्जन पार्टियां साथ आई थीं, जिनमें बहुजन समाज पार्टी भी थी. इसके बाद बुधवार को भी विपक्ष की बैठक हुई, जिसमें भी राहुल गांधी मौजूद रहे और इस बार समाजवादी पार्टी बैठक में शामिल थी.
हालांकि, इन दोनों ही बैठकों में तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई भी शामिल नहीं हुआ है, जिसके बाद अटकलों का बाज़ार गर्म है. टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि विपक्ष पूरी तरह से एकजुट है, संसद के अंदर और संसद के बाहर पेगासस विवाद को लेकर विपक्ष सरकार को घेरना चाहता है.
सोनिया-ममता की मीटिंग से निकलेगा संदेश?
बता दें कि बुधवार शाम को ही ममता बनर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बैठक होनी है. ऐसे में विपक्षी एकजुटता के लिए कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच के समीकरण को लेकर इस मीटिंग से बड़ा संदेश निकल सकता है. ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच तालमेल पहले भी बेहतर रहा है, लेकिन अब लक्ष्य है कि वैसा ही तालमेल राहुल गांधी और ममता बनर्जी के बीच बैठाया जाए.
सूत्रों की मानें, तो राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं. जो ममता बनर्जी के भरोसेमंद माने जाते हैं और हाल ही में प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी. इतना ही नहीं प्रशांत किशोर एनसीपी प्रमुख शरद पवार से भी तीन मुलाकातें कर चुके हैं.
विपक्ष का बड़ा नेता कौन?
पश्चिम बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी नई दिल्ली के दौरे पर पहली बार पहुंची हैं. ये दौरा करीब एक हफ्ते का है, इस दौरान वह विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात करेंगी. जिसे मिशन 2024 से जोड़ा जा रहा है. माना जा रहा है कि ममता दिल्ली दौरे से अपना दावा मजबूत कर रही हैं, जिसके लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से लेकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत से मिलेंगी.
वहीं, राहुल गांधी भी विपक्षी पार्टियों की बैठक में मौजूद रहकर खुद को विपक्षी नेता के तौर पर पेश करने में जुटे हुए हैं. बुधवार को भी विपक्षी पार्टियों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की अगुवाई खुद राहुल गांधी ने ही की, जिसमें सपा से लेकर आरजेडी और लेफ्ट पार्टियों के नेता मौजूद रहे. हालांकि, टीएमसी की गैर-मौजूदगी विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर रही है.
बता दें कि ममता बनर्जी बीजेपी के खिलाफ तीसरा मोर्चा तैयार करने पर सहमति जता चुकी हैं. हालांकि, वो यह भी कह चुकी हैं कि कांग्रेस के बगैर कोई मोर्चा मुमकिन नहीं है तो कांग्रेस भी यह जाहिर कर चुकी है कि विपक्षी दलों के एकजुट होने का वक्त आ चुका है. मंगलवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, 'ममता में शक्ति है.' साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी कहा कि बीजेपी के विजयरथ को रोकने के लिए एक समान सोच वाली पार्टियों को साथ आना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के बगैर विपक्षी एकता कारगार नहीं होगी.
पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे के बाद से ही प्रशांत किशोर विपक्षी दलों को एकजुट करने के कवायद में जुटे हैं. बीते दिनों एनसीपी प्रमुख शरद पवार से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं. ऐसे में राहुल और ममता दोनों नेताओं के बीच विपक्षी चेहरा बनने की कवायत तेज हो गई है.